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==ईसाई धर्म की आलोचना== {{Infobox book | nocat_wdimage = yes | name = Christianity: Its Evidences, Its Origin, Its Morality, Its History | image = | image_size = | alt = | caption = |italic title=no | author = एनी बेसेन्ट | audio_read_by = | illustrator = | cover_artist = | country = | series = द फ्रीथिंकर्स टेक्स्टबुक | release_number = | subject = | genre = | set_in = | published = | publisher2 = | pub_date = 1876 | media_type = | awards = | isbn_note = | dewey = | congress = | preceded_by = Part I. by [[Charles Bradlaugh]]<ref>{{cite book | title=The freethinker's text-book. Part I | author1=Bradlaugh, Charles | author2=Besant, Annie | author3=Watts, Charles | author4=नेशनल सेक्युलर सोसायटी | year=1876 | publisher=C. Watts | quote=Part I., section I. & II. by Charles Bradlaugh (Image of [https://books.google.com/books?id=ZqJbAAAAQAAJ&pg=PP1&img=1&zoom=3&hl=en&sig=ACfU3U267hmMRrBzfNC1GOoTgOEVe9sO0A&edge=0 Book cover] at Google Books)}}</ref> | followed_by = | notes = | exclude_cover = | website = | native_external_url = http://www.gutenberg.org/ebooks/13349 | native_external_host = [[Project Gutenberg]] | orig_lang_code = en }} डॉ एनी बेसेन्ट का विचार था कि शताब्दियों से ईसाई धर्म के नेता स्त्रियों को 'आवश्यक बुराई' कहते चले आ रहे हैं और चर्च के सबसे महान सेन्ट वे हैं जो स्त्रियों से सर्वाधिक घृणा करते हैं। अपने 'क्रिस्चियानिटी' नामक ग्रन्थ में वे बताती हैं कि वे [[गास्पेल]] को विश्वसनीय क्यों नहीं मानतीं हैं।
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