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== हिंदी की पहली दलित कथा लेखिका == एलिस एक्का हिंदी साहित्य की पहली दलित कथा लेखिका भी हैं। ‘आदिवासी’ पत्रिका के जनवरी 1962 अंक में छपी ‘दुर्गी के बच्चे और एल्मा की कल्पनाएं’ हिंदी की पहली दलित कहानी है। इस कहानी के केन्द्र में दो अवर्ण महिलाएं हैं, एक आदिवासी और दूसरी दलित, और दोनों एकदूसरे के सुख-दुःख के साथ खड़ी हैं। प्रकाशन के लिहाज से प्रेमचंद के बाद दलित विषय पर लिखी गई यह हिंदी की पहली दलित कहानी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मराठी दलित लेखक बाबुराव बागुल का पहला कहानी संग्रह 1963 में छपा था ‘जब मैंने जात छुपायी’। कुछ लोग डॉ. अंगनेलाल लिखित ‘आदिवंश कथा’ (1968) को पहली दलित कहानी मानते हैं। इस प्रकार 1963 के पूर्व जयशंकर प्रसाद, प्रेमचंद, पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ आदि को छोड़कर उनके पूर्व हिंदी अथवा मराठी में किसी दलित कहानी के प्रकाशन का ब्यौरा नहीं मिलता। कम से कम अवर्ण लेखकों की किसी दलित कथा का तो जिक्र नहीं ही मिलता हे। आठवें दशक के बाद ही हम हिंदी और मराठी दोनों में दलित साहित्य का सुगठित उभार देखते हैं। अतः इसमें कोई संदेह नहीं कि ‘दुर्गी के बच्चे और एल्मा की कल्पनाएं’ किसी अवर्ण लेखक द्वारा लिखी गई भारत की पहली हिंदी कहानी है। <ref name="ReferenceA"/> === प्रकाशित कृति === {{मुख्य|एलिस एक्का की कहानियां}} एलिस एक्का के जीवन काल में उनकी सारी रचनाएं मुख्य रूप से तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा रांची से प्रकाशित ‘आदिवासी’ पत्रिका में छपी। उन दिनों एक यही पत्रिका थी जिसमें आदिवासियों की रचनाएं छपा करती थीं। अथक श्रम और शोध के बाद आदिवासी साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी [[वंदना टेटे]] ने उनकी अनेक कहानियां और दूसरी रचनाएं खोज निकालीं। जिसका प्रकाशन कथा संकलन ‘''[[एलिस एक्का की कहानियां]]''’<ref>{{cite news|title=Alice Ekka Ki Kahaniyan|url=http://www.rajkamalprakashan.com/default/alice-ekka-ki-kahaniyan|accessdate=3 जुलाई 2017|date=3 जुलाई 2017}}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> के रूप में राधाकृष्ण (राजकमल), दिल्ली से प्रकाशित हुआ है। इस संकलन में उनकी मौलिक हिंदी कहानियां और खलील जिब्रान के साहित्य का अनुवाद शामिल है।
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