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=== गिट्टी === [[बलुआ पत्थर|बालू पत्थर]] या ईंट के छोटे-छोटे टुकड़ों को '''गिट्टी''' कहते हैं। गिट्टी के बदले बड़ी बजरी आदि का भी उपयोग हो सकता है, अत: उनको भी हम यहाँ गिट्टी के अंतर्गत मानेंगे। गिट्टी और बालू दोनों के सम्मिलित रूप को अभिसमूह (ऐग्रिगेट) कहते हैं। नाप के अनुसार गिट्टी के निम्नलिखित वर्ग हैं : (क) दानवी (साइक्लोपियन), जब नाप 7.5 से 15 सेंटीमीटर तक (3 से 6 इंच तक) होती है; (ख) मोटी गिट्टी, 0.5 से 7.5 सेंटीमीटर तक (3/16 से 3 इंच तक); (ग) महीन, 0.15 से 5 मिलीमीटर तक (0.0059 से 3/16 इंच तक)। गिट्टी की नाप बताने के लिए "सूक्ष्मता मापांक" (फ़ाइननेस मॉड्युलस, Fineness modulus) का प्रयोग किया जाता है। नापने के लिए दस प्रामाणिक चलनियाँ रहती हैं जिनकी जाली की नाप निम्नलिखित होती है : 3 इंच, 1 इंच, 0.5 इंच, 0.3 इंच, 2.41 मिलीमीटर, 1.204 मिलीमीटर, 0.599 मिलीमीटर, 0.152 मिलीमीटर। 2.41 मिलीमीटरवाली चलनी को नंबर 7 चलनी तथा उसके बाद की चलनियों का क्रमानुसार नंबर 14, नंबर 25 नंबर 52 और नंबर 100 भी कहते हैं। सूक्ष्मता मापांक प्राप्त करने के लिए माल को इन चलनियों से क्रमानुसार चला जाता है। माल की तौल के अनुसार इन चलनियों पर जितना प्रतिशत बचा रह जाता है उनके योगफल को 100 से भाग दे दिया जाता है। इस प्रकार प्राप्त लब्धि को '''सूक्ष्मता मापांक''' कहते हैं। कंक्रीट के लिए सूक्ष्म मिलावे (बालू या सुर्खी) का सूक्ष्मता मापांक 2 और 3 के बीच होना चाहिए और मोटे मिलावे (गिट्टी) का 5 और 8 के बीच। सूक्ष्म मिलावे (बालू इत्यादि) का 90 प्रतिशत अंश इंच की जाली के पार हो जाना चाहिए और 100 नंबरवाली जाली पर 85 प्रतिशत से कम नहीं पड़ा रहना चाहिए (अर्थात् बालू में धूलि आदि बहुत न हो।)। सूक्ष्म मिलावे के लिए नदी या समुद्र की बालू, अथवा पत्थर की खान से निकला चूरा पीसकर प्रयुक्त किया जाता है। प्राकृतिक अथवा पिसी बजरी में मिट्टी, तलछट और धूलि तौल के अनुसार 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा चूर्ण किए गए पत्थर में 10 प्रतिशत से अधिक धूलि आदि न होनी चाहिए। बालू आदि को घास पात आदि प्राणिज (ऑगैंनिक, organic) अशुद्धियों से मुक्त होना चाहिए। मोटे मिलावे (गिट्टी) के कम से कम 95 प्रतिशत को 3 इंचवाली चलनी से पार हो जाना चाहिए और कम से कम 90 प्रतिशत को इंचवाली चलनी पर पड़ा रहना चाहिए। तोड़ा गया पत्थर, तोड़ी गई ईंट, चूर किया गया पत्थर, झावाँ अथवा छाई, ये सब मोटे मिलावे के लिए काम में लाई जा सकती है। छाई और कोक हलके कंक्रीट के लिए उपयोगी हैं, परंतु भारी और पुष्ट काम के लिए चूने का पत्थर, ग्रैनाइट, नाइस, ट्रैप अथवा कड़ा बलुआ पत्थर काम में लाया जाता है। चिपकानेवाले पदार्थ (सीमेंट) से कमजोर पड़नेवाले नरम पत्थर का प्रयोग करना चाहिए। गिट्टी कुछ गोलाकार हो, रुक्ष हो, उससे चिप्पड़ न छूटें और तोड़ने में पुष्ट हो। तौल के अनुसार गिट्टी पाँच प्रतिशत से अधिक पानी सोखे। उसमें यथासंभव मिट्टी न हो और प्राणिज (ऑगैंनिक) पदार्थ (जैसे घास, काई इत्यादि) न हों।
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