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== बायोकॉन == 1978 में, वे आयरलैंड के कॉर्क के बायकॉनकैमिकल्स लिमिटेड से एक प्रशिक्षु प्रबंधक के रूप में जुड़ीं। उसी वर्ष उन्होंने आरंभिक पूंजी के साथ जो 10,000 थी, बंगलौर के किराये के मकान के गैरेज में बायोकॉन शुरू किया। प्रारंभ में, उन्हें अपनी कम उम्र, लिंग और बगैर परखे गए व्यापार मॉडल के कारण विश्वसनीयता संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कोई भी बैंक उन्हें ऋण नहीं देना चाहता था, इसलिए समस्या केवल धन की ही नहीं थी, बल्कि अपने नए काम पर लोगों को नियुक्त करना भी कठिन था। उन्होंने ढांचागत क्षेत्र में उदासीनता के माहौल वाले देश में एक बायोटेक व्यवसाय को खड़ा करने की कोशिश में एकनिष्ठ दृढ़ संकल्प के साथ प्रौद्योगिकी से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया और इनसे बाहर निकलीं। उस समय भारत में निर्बाध विद्युत, बेहतर गुणवत्तावाले पानी, रोगाणुरहित प्रयोगशालाओं, आयातित अनुसंधान उपकरण और उन्नत वैज्ञानिक कौशल आसानी से उपलब्ध नहीं था। वे किसी भी चीज़ को आसानी से जाने देनेवाली नहीं रही हैं, इसीलिए उन्होंने तमाम चुनौतियों का सामना किया और सीमित परिस्थिति में बायोकॉन को नई और प्रगति की ऊंचाइयों पर पहुंचाने का काम किया। उन्हें ऐसा कहते हुए उद्धृत किया गया है, "उद्देश्यपरक और चुनौती झेलने की भावना के साथ सपने का पीछा करना ही सफलता है। सफलता को प्राप्त करने का कोई आसान रास्ता नहीं है और न ही मेहनत का कोई विकल्प है। मेरा यह भी मानना है कि अलग तरीके से काम करना भी सफलता का मंत्र है - मजबूती से खड़े होने के लिए कुछ अलग करने की हिम्मत होनी चाहिए। बायोकॉन के नाम के साथ लिखा होता है 'अंतर हमारे डीएनए (DNA) में रहता है' और हम सब इसमें विश्वास रखते हैं। हम अन्य कंपनियों की नकल नहीं करते, बल्कि हमने अपने व्यापार के भाग्य की रूपरेखा स्वयं तैयार की है।" बायोकॉन के परिचालन के लिए सालों से विकास के प्रक्षेप पथ और नवाचारों के साथ बायोकॉन के परिचालन का श्रेय उन्हीं को जाता है। अपनी स्थापना के एक वर्ष के भीतर, बायोकॉन एंजाइमों का विनिर्माण करनेवाली और संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोप को उनका निर्यात करनेवाली भारत की पहली कंपनी बन गई। 1989 में, बायोकॉन भारत की पहली जैव प्रौद्योगिकी कंपनी बनी, जिसे ट्रेडमार्क युक्त प्रौद्योगिकियों के लिए अमेरिका से धन प्राप्त हुआ। 1990 में, उन्होंने बायोकॉन के उन्नत आन्तरिक अनुसंधान कार्यक्रम को ट्रेडमार्क युक्त सान्द्र अधःस्तर खमीरण प्रौद्योगिकी पर आधारित बनाया। इस कार्यक्रम की व्यावसायिक सफलता के कारण 1996 तक इसका तीन गुना विस्तार हुआ और बायोकॉन ने जैवफार्मास्युटिकल्स और स्टैटिन के क्षेत्र में प्रवेश किया। 1997 में, समर्पित निर्माण की सुविधा के जरिए उन्होंने मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहल की। 1998 में, जब यूनीलीवर अपनी हिस्सेदारी बायोकॉन में भारतीय प्रमोटरों को बेचने पर सहमत हुआ तब बायोकॉन एक स्वतंत्र संस्था बन गई। दो साल बाद, बायोकॉन का ट्रेडमार्क युक्त सान्द्र मैट्रिक्स खमीरण पर आधारित बायोरिएक्टर, जिसका नामकरण प्लैफरेक्टरटीएम (Plafractor TM) किया गया था, ने यू.एस। पेटेंट प्राप्त किया और किरण मजूमदार-शॉ ने बायोकॉन को विशेष दवाइयों के उत्पादन के लिए पहला पूरी तरह से स्वचालित जलमग्न खमीरण संयंत्र बनाया। 2003 तक बायोकॉन पिचिया प्रकटन प्रणाली पर मानव इंसुनिल विकसित करनेवाली दुनिया की पहली कंपनी बन गया। इसी साल, उन्होंने बायोकॉन बायोफ़ार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को क्यूबन सेंटर ऑफ मॉलीक्युलर इम्यूनोलॉजी के साथ संयुक्त उद्यम में बायोथेप्युटिक के चुनिंदा रेंज के विनिर्माण और विपणन में शामिल किया। 2004 में, उन्होंने पूंजी बाजार तक पहुंचने के लिए बायोकॉन के शोध कार्यक्रमों की पाइप लाइन को विकसित करने का फैसला किया। बायोकॉन का आईपीओ 32 बार अत्यधिदत्त (ओवरसब्सक्राइब) हुआ और पहले दिन 1.11 बिलियन डॉलर के बाजार मूल्य के साथ बंद हुआ, सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन बायोकॉन 1 बिलियन डॉलर के निशान को पार करनेवाली भारत की दूसरी कंपनी बन गयी। उन्होंने 2,200 से अधिक उच्च मूल्य अनुसंधान एवं विकास (R&D) लाइसेंस तथा 2005 और 2010 के बीच फार्मास्यूटिकल्स और जैव फार्मास्यूटिकल्स के अन्य सौदों में उन्होंने कदम रखा; इससे बायोकॉन को अधिग्रहण, भागीदारी और लाइसेंस के जरिए उभरने और विकसित बाजार में विस्तार कर विश्व में अपने कदमों के निशान छोड़ने में मदद मिली। उनका विश्वास है कि स्वास्थ्य के देखभाल की जरूरत केवल सस्ते आविष्कार के साथ पूरी हो सकती है, यही वह दर्शन है जिसने बायोकॉन को प्रभावी ढंग से विनिर्माण करने और बाजार में अनुकूल लागत के साथ दवाओं के विपणन में मदद की। वर्ष 2007-08 में अमेरिका के एक प्रमुख व्यापार प्रकाशन, मेड एड न्यूज ने बायोकॉन को दुनिया भर की जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों में 20वां और दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं में 7वां स्थान दिया। बायोकॉन को सर्वश्रेष्ठ सूचीबद्ध कंपनी का 2009 का बायोसिंगापुर एशिया पेसिफिक बायोटेक्नोलॉजी पुरस्कार भी मिला। उनके नेतृत्व को धन्यवाद है, जिससे बायोकॉन ने आज लाभदायक क्षमता और वैश्विक विश्वसनीयता तथा अपने विनिर्माण और विपणन गतिविधियों में विश्व स्तर को प्राप्त किया है। यह एशिया की सबसे बड़ी इंसुलिन और स्टैटिन सुविधाएं हैं तथा इसके पास शरीर के अंगों और उत्तकों में एंटीबॉडी का छिड़काव-आधारित उत्पादन की सुविधाएं भी है।
सारांश:
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