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== कारण == === माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) === [[चित्र:M leprae ziehl nielsen2.jpg|thumb|right|माइकोबैक्टीरियम लेप्राए, एजेंट की एक कुष्ठ रोग के कारणात्मक.एसिड के रूप में तेजी से जीवाणु, जब ज़ेहल-नील्सन का उपयोग किया जाता है एम. लेप्राए लाल दिखता है।]] {{Main|माइकोबैक्टेरियम लेप्री}} ''माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium leprae)'' और ''माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमैटॉसिस (Mycobacterium lepromatosis)'' कुष्ठरोग का कारण बनने वाले एजेंट हैं। ''एम. लेप्रोमेटॉसिस (M. lepromatosis)'' पहचाना गया अपेक्षाकृत नया माइकोबैक्टेरियम है, जिसे 2008 में विकीर्ण लेप्रोमेटस कुष्ठरोग के एक जानलेवा मामले से पृथक किया गया था।<ref name="new" /><ref name="Sherris" /> एक अंतर्कोशिकीय, अम्ल-तीव्र [[जीवाणु|बैक्टेरियम]], ''एम. लेप्री (M. leprae)'' वायुजीवी और दण्ड के आकार का होता है और यह ''माइकोबैक्टेरियम'' प्रजातियों की मोम-जैसी कोशिका झिल्ली आवरण विशेषता से घिरा होता है।<ref name="Baron">{{cite book | author = McMurray DN | title = Mycobacteria and Nocardia. ''in:'' Baron's Medical Microbiology ''(Baron S ''et al.'', eds.) | edition = 4th | publisher = Univ of Texas Medical Branch | year = 1996 | url = http://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/bv.fcgi?rid=mmed.section.1833 | isbn = 0-9631172-1-1 | oclc = 33838234 | access-date = 30 अगस्त 2010 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090212202626/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/bv.fcgi?rid=mmed.section.1833 | archive-date = 12 फ़रवरी 2009 | url-status = live }}</ref> स्वतंत्र विकास के लिये आवश्यक जीन की अत्यधिक हानि के कारण, ''एम. लेप्री (M. leprae)'' और ''एम. लेप्रोमेटॉसिस (M. lepromatosis)'' को प्रयोगशाला में निर्मित नहीं किया जा सकता, एक ऐसा कारक जो कोच की अभिधारणा की एक दृढ़ व्याख्या के अंतर्गत निर्णायक रूप से इस जीव की पहचान करने में कठिनाई उत्पन्न कर देता है।<ref name="new" /><ref>{{cite journal |author=Bhattacharya S, Vijayalakshmi N, Parija SC |title=Uncultivable bacteria: Implications and recent trends towards identification |journal=Indian journal of medical microbiology |volume=20 |issue=4 |pages=174–7 |date=1 अक्टूबर 2002 |pmid=17657065 |url=http://www.ijmm.org/article.asp?issn=0255-0857;year=2002;volume=20;issue=4;spage=174;epage=177;aulast=Bhattacharya |access-date=30 अगस्त 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181022061351/http://www.ijmm.org/article.asp?issn=0255-0857;year=2002;volume=20;issue=4;spage=174;epage=177;aulast=Bhattacharya |archive-date=22 अक्तूबर 2018 |url-status=dead }}</ref> गैर-संवर्धन-आधारित तकनीकों, जैसे आण्विक आनुवांशिकी ने कारण-कार्य-संबंध की वैकल्पिक स्थापना की अनुमति दी है। हालांकि, अभी तक इसके उत्पादक जीवों को ''प्रयोगशाला में'' संवर्धित कर पाना असंभव रहा है, लेकिन उन्हें पशुओं में विकसित कर पाना संभव हुआ है। यूनाइटेड स्टेट्स लेप्रसी पैनल (United States Leprosy Panel) के चेयरमैन, चार्ल्स शेपर्ड (Charles Shepard) ने 1960 में चूहों के पैरों के पंजों में इन जीवों को सफलतापूर्वक विकसित किया। 1970 में जोसेफ कॉल्सन (Joseph Colson) और रिचर्ड हिल्सन (Richard Hilson) ने सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल, लंदन में जन्मजात रूप से बाल्यग्रंथि-हीन चूहे (‘नग्न चूहे’) के प्रयोग द्वारा इस विधि में सुधार किया। एक अन्य पशु मॉडल एलीनॉर स्टॉर्स (Eleanor Storrs) द्वारा गल्फ साउथ रिसर्च इंस्टीट्यूट (Gulf South Research Institute) में विकसित किया गया। डॉ॰ स्टॉर्स ने अपनी पीएचडी (PhD) के लिये नौ-धारियों वाले वर्मी (armadillos) पर कार्य किया था क्योंकि इस पशु के शरीर का तापमान मनुष्यों के शरीर के तापमान से कम था और इसलिये यह एक उपयुक्त पशु मॉडल हो सकता था। यह कार्य 1968 में वाल्डेमर किर्शीमर (Waldemar Kirchheimer) द्वारा प्रदान की गई सामग्री के साथ कारविल (Carville), [[लुईज़ियाना|लुइज़ियाना (Louisiana)]] में यूनाइटेड स्टेट्स पब्लिक हेल्थ लेप्रोसैरियम (United States Public Health Leprosarium) में प्रारंभ हुआ। ये प्रयोग असफल सिद्ध हुए, लेकिन लियोनार्ड’स वुड मेमोरियल (Leonard's Wood Memorial) के चिकित्सीय निदेशक चैपमैन बिनफोर्ड (Chapman Binford) द्वारा 1970 में प्रदान की गई सामग्री के साथ किया गया अतिरिक्त कार्य सफल रहा. इस मॉडल का वर्णन करने वाले शोध-पत्रों के परिणामस्वरूप प्राथमिकता पर एक विवाद छिड़ गया। जब इस बात की खोज हुई कि लुइज़ियाना में पाये जाने वाले जंगली वर्मी प्राकृतिक रूप से ही कुष्ठरोग से संक्रमित थे, तो आगे एक और विवाद का जन्म हुआ। प्राकृतिक रूप से होने वाला संक्रमण गैर-मानवीय वानरों में भी प्राप्त हुआ है, जिनमें अफ्रीकी चिंपांज़ी (African chimpanzee), सूटी मैंगेबी (sooty mangabey) और साइनोमॉल्गस मकैक (cynomolgus macaque) शामिल हैं। === आनुवांशिकी === अनेक जीन कुष्ठरोग के प्रति संवेदनशीलता से जुड़े हुए हैं। {| class="wikitable" style="font-size:75%" |- ! नाम ! स्थान ! ओएमआईएम (OMIM) ! जीन |- | एलपीआरएस1 (LPRS1) | 10पी13 (10p13) | {{OMIM2|609888}} | |- | एलपीआरएस2 (LPRS2) | 6क्यू25 (6q25) | {{OMIM2|607572}} | पार्क2 (PARK2), पीएसीआरजी (PACRG) |- | एलपीआरएस3 (LPRS3) | 4क्यू32 (4q32) | {{OMIM2|246300}} | टीएलआर2 (TLR2) |- | एलपीआरएस4 (LPRS4) | 6पी21.3 (6p21.3) | {{OMIM2|610988}} | एलटीए (LTA) |}
सारांश:
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