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== बहुफलक == कुछ मनोरंजक तिर्यकछिन्न समबाहु फलकों के प्रति रूप बनाने की विधि यह है : किसी दफ्ती या कड़े कागज पर एक सम षड्भुज खींचे और इसकी प्रत्येक भुजा पर ऐसा ही षड्भुज खींचे। इन सात षड्भुजों से घिरे हुए क्षेत्र की परिसीमा में १८ भुजाएँ हैं। इनके अनुदिश तेज चाकू या ब्लेड से काट कर इस क्षेत्र को अलग कर ले। फिर इस क्षेत्र से बीचवाला षड्भुज भी काट कर अलग कर दें। अब हर जोड़ी षड्भुजों की उभयनिष्ठ कोरों में से पाँच को भीतर से आधी दूर तक काट दें और शेष अर्धभाग में शिकन बना दें। छठी उभयनिष्ठ कोर को पूरा काट दें। अब यदि इस कटी हुई कोरवाले षड्भुजों को एक दूसरे के ऊपर संपाती कर दिया जाय तो बीच में समपंचभुजाकार छिद्र मिलेगा। यदि ऐसे सिरे के दो षड्भुजों को दूसरे सिरे के दो षड्भुजों पर संपाती कर दिया जाय तो वर्गाकार छिद्र मिलेगा। यदि सिरे के तीन षड्भुजों को संपाती कर दिया जाय तो समबाहु त्रिभुजाकार छिद्र मिलेगा। तीन सलंग्न षड्भुजों की मुक्त कोरों को सटाकर चिपका देने से भी समबाहु त्रिभुजाकार छिद्र मिलेगा। यदि त्रिभुजाकार छिद्रवाले वलय के एक सिरे पर कटा हुआ षड्भुज बैठा दिया जाय तो ऐसा तिर्यकछिन्न समचतुष्फलक मिलेगा। जिसके चारों शीर्षों पर से ४ छोटे समान समचतुष्फलक काट दिए गए हैं। वर्गाकार छिद्रवाले दो वलयों को इस प्रकार रखने पर कि वर्गाकार छिद्र के संमुखवाले भाग संपाती हो जायँ, वह तिर्यकछिन्न अष्टफलक बनता है जो सम अष्टफलक के शीर्षों से समान वर्गाधारवाले सूचीस्तंभ काटने पर मिलता है। पंचभुजाकर छिद्रवाले १२ वलयों को इस प्रकार रखने पर कि षड्भुज होते जाए, वह तिर्यकछिन्न समविंशातिफलक बनता है जिसके शीर्षों से समपंचभुजाकारवाले सूचीस्तंभ काट लिए गए हैं। तिर्यकछिन्न अष्टफलकों को सटाकर अवकाश को उसी प्रकार भरा जा सकता है जैसे ईटोंं से। इस दशा में षड्भुज एक ऐसे समस्पंज अर्थात् कुटिल (तिरछे skew) बहुफलक के फलक हो जाते हैं जिसके प्रत्येक शीर्ष पर चार षड्भुज है। इसी प्रकार तिर्यकछिन्न चतुष्फलकों से जो कुटिल बहुफलक बनता है उसके प्रत्येक शीर्ष पर छह षड्भुज रहते है इन दो के अतिरिक्त एक और प्रकार का कुटिल बहुफलक है जिसके प्रत्येक शीर्ष पर छह वर्ग रहते हैं। यह बहुफलक है जिसके प्रत्येक शीर्ष पर छहवर्ग रहते हैं। यह बहुफलक ऐसे घनवलयों से बन सकता है जिनमें दो सम्मुख फलक न हों। इस बहुफलक की घरी हो सकती है। इन तीनों कुटिल बहुफलकों के पाँच प्लेटोनीय ठोसों की भाँति फलक समभुज और कोण समान होते हैं।
सारांश:
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