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==चरित्रांकन== जब इस सिरिज के प्रेरणा के विषय पर पुछा गया, तो प्राण साहब ने कहा, "हरेक परिवार में कोई एक बुद्धिमान बुजुर्ग होते हैं। वह अपने सामान्य विवेक से उनके मुश्किलें हल कराते हैं, मगर एक परिहास भरे अंदाज में। और यही हास्य मेरे बनाए कार्टूनों की बुनियाद है।"[3] विशिष्ट तौर पर चाचा चौधरी को अन्य कॉमिक्स सुपरहीरो की तरह ना तो बलिष्ठ शरीर का दिखाया है, और ना ही कभी उन्हें असाधारण शक्तियों या आधुनिक गैजेटों का प्रयोग करते देखा गया। बजाय इनके, वह अपने "दिमाग को किसी भी सुपर-कंप्यूटर से ज्यादा पैनी अथवा तेज बताते" (जिसे बतौर लोकोक्ति में कहा जाता रहा है कि चाचा चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है ![4] ), और एक लकड़ी की छड़ी रखते, जिसे मुसीबत में वह उद्दंड बदमाशों की पिटाई कर डालते। चाचा चौधरी के चरित्रांकन की तरह, प्राण साहब ने अन्य चरित्रों को, १९७० व १९८० के दशक के भारतीय उपनगरों के मध्यमवर्गीय परिवारों की तरह रखा है। तथा उनके खलपात्र भी सामान्य तौर पर भ्रष्ट सरकारी तंत्र के लोग, चोर, राह किनारे गुंडे एवं बदमाश, चालबाज तथा ठगबाज और स्थानीय ठग ही होते हैं। वह ना सिर्फ उनसे लड़ता है बल्कि आमजन की सहायता भी करता है साथ ही वह उन्हें नैतिक पाठ और अच्छे व्यवहार का भी सबक देता है। कई घटनाओं के अंत में ज्यादातर बदमाश उनस त्रस्त भी खाते हैं। सामान्य मध्यमवर्गीय जन की तरह उन्हें भी दैनिक समस्याओं से जुझना पड़ता है। पर इस बारे में भी प्राण साहब उनकी समस्याओं को चुटकी के साथ हल करते हुए उन्हें प्रसन्नचित चेहरों जैसे चमकदार आंखों या मुस्कान के साथ विदा कराते।
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