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== परिभाषा तथा परिसीमन == चिकित्सा विज्ञान फलसमन्वित ऐसा शास्त्र है, जिसमें ऐसे उपायों के उपयोगों का वर्णन है जो [[जनस्वास्थ्य|लोकस्वास्थ्य]] तथा वैयक्तिक स्वास्थ्य की दृष्टि से, शरीर संबंधी सभी अवस्थाओं में आवश्यक होता है, जैसे * (1) रोगोन्मूलक तथा निवारक, * (2) घटना नियंत्रक तथा सुधारक, * (3) अभावपूरक, * (4) विकारक तथा विकृत अंगों के निष्कासक, * (5) कुरूपता तथा असमर्थता के निवारक, * (6) क्षतांगों के प्रतिस्थापक एवं विकलांगों के पुनर्वासक और विभिन्न प्रकार की आंत्र यक्ष्मा तथा [[फुफ्फुस यक्ष्मा]] की चिकित्सा तथा अन्य नैदानिक कार्यों में उपयोगी, * (7) सुजनन, सुपोषण सुसंतान तथा परिवारनियोजन। चिकित्सा शिक्षण में [[भौतिक शास्त्र|भौतिकी]], [[सांख्यिकी]], [[रसायन विज्ञान|रसायन]], [[वनस्पति विज्ञान|वनस्पति]], [[प्राणिविज्ञान|प्राणि]] तथा [[सूक्ष्मजैविकी|सूक्ष्मजीव विज्ञान]], मानवीय शरीररचना, कायिकी-विकृतिविज्ञान, प्रतिरक्षण विज्ञान, इत्यादि प्रत्यक्ष:, तथा अन्य सभी विज्ञान परोक्षत:, सहायक होते हैं। मूलत: सिद्धांत पर आधारित चिकित्सा के तीन प्रकार हैं : यौक्तिक चिकित्सा (रेशनल थिरैपी), मनोदैहिक चिकित्सा (psychophysical therapy) तथा आनुभविक चिकित्सा (Empiric therapy)। यौक्तिक चिकित्सा में रोग के कारणों एवं रोगी के कायिक तथा मानसिक परिवर्तनों को समझकर, ज्ञात प्रभाव की ओषधियों अथवा साधनों का उपयोग किया जाता है। मनोदैहिक चिकित्सा में विशिष्ट मन:चिकित्सा और विश्वासमूलक चिकित्सा दोनों संमिलित हैं। प्रथम के विस्तारों में नाना प्रकार के मनोविश्लेषण वैविध्य है तथा दूसरे में [[प्लैसेबो]] (Placebo) सदृश निष्प्रभाव ओषधियाँ और [[भूत-प्रेत का अपसारण|झाड़-फूँक]] प्रभृति प्रयोग आते हैं। आनुभविक चिकित्सा में ज्ञात लाक्षणिक प्रभावों के बल पर ओषधियों का प्रयोग करते हैं, किन्तु शरीर में दवा किस प्रकार काम करती है, इसक पता नहीं होता। चिकित्सा शब्द के साथ विशेष साधनों के नाम लगाने से विशेष ओषधीय प्रयोगों का बोध होता है, जैसे [[जलचिकित्सा]], विद्युच्चिकित्सा, डायथर्मी (Diathermy) चिकित्सा आदि।
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