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==मगही के प्रथम उपन्यासकार== जयनाथ पति ने 1927 के अंत में मगही भाषा के पहले उपन्यास ‘सुनीता’ की रचना की जो 1928 में प्रकाशित हुआ।<ref>{{Cite web |url=https://books.google.co.in/books?id=vwKvpoSMVYEC&q=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi2mOTxj9baAhVMro8KHZVXCAUQ6AEIKDAA |title=संग्रहीत प्रति |access-date=25 अप्रैल 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180427044502/https://books.google.co.in/books?id=vwKvpoSMVYEC&q=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi2mOTxj9baAhVMro8KHZVXCAUQ6AEIKDAA |archive-date=27 अप्रैल 2018 |url-status=live }}</ref> इस उपन्यास की समीक्षा सुप्रसिद्ध भाषाविद् सुनीति कुमार चटर्जी ने ‘द मॉडर्न रिव्यू’ के अप्रेल 1928 के अंक में की है।<ref>{{Cite web |url=https://magahi-sahitya.blogspot.in/2008/02/blog-post.html?m=0 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=25 अप्रैल 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180426213427/https://magahi-sahitya.blogspot.in/2008/02/blog-post.html?m=0 |archive-date=26 अप्रैल 2018 |url-status=dead }}</ref> मगही का यह पहला उपन्यास अब उपलब्ध नहीं है। लेकिन 1928 की पहली अप्रैल को प्रकाशित उनका दूसरा मगही उपन्यास ‘[[फूल बहादुर]]’ की प्रति सुरक्षित है।<ref>{{Cite web |url=https://www.prabhatkhabar.com/news/nawada/story/377445.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=25 अप्रैल 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180426213724/https://www.prabhatkhabar.com/news/nawada/story/377445.html |archive-date=26 अप्रैल 2018 |url-status=dead }}</ref> इसके बाद उनका तीसरा उपन्यास ‘गदहनीत’ छपा। अपने इन तीनों उपन्यासों में उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों और भ्रष्टाचार पर करारी चोट की है। इसके अतिरिक्त जयनाथ पति ने 1937 में गवर्नमेंट आफ इंडिया एक्ट 1935 का मगही अनुवाद कर ‘स्वराज’ शीर्षक से प्रकाशित किया है। आधुनिक मगही साहित्य के विकास के लिए उन्होंने एक संगठन भी बनाया था तथा कई पुस्तकें लिखीं जिनमें से अधिकांश अप्रकाशित रह गई।<ref>{{Cite web |url=https://books.google.co.in/books?id=IDXhAAAAMAAJ&q=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi2mOTxj9baAhVMro8KHZVXCAUQ6AEIVzAH |title=संग्रहीत प्रति |access-date=25 अप्रैल 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180427044551/https://books.google.co.in/books?id=IDXhAAAAMAAJ&q=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi2mOTxj9baAhVMro8KHZVXCAUQ6AEIVzAH |archive-date=27 अप्रैल 2018 |url-status=live }}</ref> उनके द्वारा संकलित मगही लोकसाहित्य की एक पुस्तक भी प्रकाशित है।
सारांश:
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