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===भारतीय उत्पत्ति === [[File:Five Celestial Musicians LACMA AC1992.254.1-.5.jpg|thumb|upright=1.2|चौथी-पाँचवी सदी की मूर्तियों में विविध वाद्ययंत्र बजाते गंधर्व, जिनमें दो नादवाद्य बजा रहे, हालाँकि ये तबले जैसे नहीं दीखते, अन्य मंदिर उत्कीर्णनों में अवश्य दिखता है।<ref name="Gottlieb1993p2"/><ref>{{cite book|author=ऍस॰ प्रज्ञानंद |title=A historical study of Indian music |trans-title= भारतीय संगीत का एक ऐतिहासिक अध्ययन |url=https://books.google.com/books?id=guXibgtWsNwC|year=1981|publisher=मुंशीराम मनोहरलाल |page=82}}</ref>]] भारतीय उत्पत्ति के सिद्धांत को मानने वाले तबले का मूल भारत में मानते हैं और यह कहते हैं कि मुस्लिम काल में इसने मात्र अरबी नाम ग्रहण कर लिया।<ref name="Dean2012p104"/> भारतीय नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरत मुनि के द्वारा ''उर्ध्वक आलिंग्यक'' वाद्यों के वर्णन की बात कही जाती है।<ref name="atoday2014" /> ऐसे ही, हाथ में लेकर बजाये जाने वाले "पुष्कर" नामक तालवाद्यों से तबले की उत्पत्ति बतायी जाती है। "पुष्कर" वाद्य के प्रमाण छठवीं-सातवीं सदी के मंदिर उत्कीर्णनों में, ख़ासतौर पर मुक्तेश्वर और भुवनेश्वर मंदिरों में, प्राप्त होते हैं।<ref name="Dean2012p104"/><ref name="Gottlieb1993p2">{{cite book|author=रॉबर्ट ऍस॰ गौट्लिब|title=Solo Tabla Drumming of North India |trans-title=उत्तर भारतीय एकल तबला वादन |url=https://books.google.com/books?id=f-xk7L_DNcUC&pg=PA1|year=1993|publisher=मोतीलाल बनारसीदास |isbn=978-81-208-1093-8|pages=2–3}}</ref><ref name="Singh2000p135">{{cite book|author=परशुराम सिंह |title=The Guru Granth Sahib: Canon, Meaning and Authority |trans-title= गुरु ग्रंथ साहिव:पंथ, अर्थ और प्राधिकार |url=https://books.google.com/books?id=HMvXAAAAMAAJ|year=2000|publisher=ऑक्स्फ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |isbn=978-0-19-564894-2|pages=135–136}}</ref> इन कलाकृतियों में वादक कलाकार दो या तीन अलग-अलग रखे तालवाद्यों को सामने रख कर बैठे दिखाए गए हैं और उनके हाथों और उँगलियों के निरूपण से वे इन्हें बजाते हुए प्रतीत होते हैं।<ref name="Gottlieb1993p2"/> हालाँकि, इन निरूपणों से यह नहीं पता चलता कि ये वाद्ययंत्र उन्हीं पदार्थों से निर्मित हैं और चर्मवाद्य ही हैं, जैसा की आधुनिक समय का तबला होता है।<ref name="Gottlieb1993p2"/> तबला आज जिन पदार्थों से और जिस रूप में बनाया जाता है, ऐसे वाद्ययंत्रों के निर्माण के लिखित प्रमाण संस्कृत ग्रंथों में उपलब्ध हैं। "तबला"-जैसे वाद्ययंत्र के निर्माण सम्बन्धी सबसे पुरानी जानकारी संस्कृत ''[[नाट्य शास्त्र]]'' में मिलती है।<ref name="Gottlieb1993p2"/> इन तालवाद्यों को बजाने से सम्बंधित विवरण भी नाट्यशास्त्र में मिलती है। वहीं, दक्षिण भारतीय ग्रंथ, उदाहरणार्थ, ''[[शिलप्पदिकारम]]'', जिसकी रचना प्रथम शताब्दी ईसवी मानी जाती है, लगभग तीस ताल वाद्यों का विवरण देता है जिनमें कुछ रस्सियों द्वारा कसे जाने वाले और अन्य शामिल हैं, लेकिन इसमें "तबला" नामक किसी वाद्य का विवरण नहीं है।<ref>{{cite book |author1=ब्रूनों नेट्ल |author2=स्टोन ऍम॰ रथ |author3=जेम्स पोर्टल (et al) |title=The Garland Encyclopedia of World Music |trans-title=विश्व संगीत का हार रूपी ज्ञानकोश |url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC&pg=PA327 |year=1998 |publisher=टेलर & फ्रांसिस |isbn=978-0-8240-4946-1 |page=327 |access-date=26 फ़रवरी 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170418151350/https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC |archive-date=18 अप्रैल 2017 |url-status=live }}</ref>
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