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==विचारधारा== बहुत कम लोगों को पता है कि मधोक [[भीमराव आंबेडकर]] के काफ़ी नज़दीक थे और उनके अंतिम दिनों में अक्सर उनके 26, अलीपुर रोड वाले निवास पर उनसे मिलने जाते थे। वे पूरे भारत में गौहत्या पर प्रतिबंध चाहते थे। उन्होंने पूरे भारत में घूम कर गौ हत्या विरोध का माहौल बनाने की कोशिश की थी। 1968 में वे पहले नेता थे जिन्होंने [[अयोध्या]] में [[बाबरी मस्जिद]] हिंदुओं के हवाले करने की माँग उठाई थी। उसके बदले में उन्होंने हिंदुओं द्वारा मुसलमानों के लिए एक भव्य मस्जिद बनाने की पेशकश की थी। बलराज मधोक हिंदुत्व राजनीति के असली संस्थापक थे। उन्होंने अक्तूबर, 1951 में [[श्यामाप्रसाद मुखर्जी]] के साथ मिल कर भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी लेकिन श्यामा प्रसादजी अधिक दिन जीवित नहीं रहे और जल्दी ही उनका निधन हो गया। इन्होंने [[भारत विभाजन|भारत के विभाजन]] से पहले ही हिंदुत्व राजनीति की कई चीजें लिख दी थीं। उन्होंने कई पीढ़ियों पर अपनी छाप छोड़ी थी जिसमें आडवाणी, सुब्रमण्यम स्वामी और नरेन्द्र मोदी शामिल थे। उन्होंने पहले अपने मित्रों और फिर सहयोगियों को नाराज किया और नाराजगी का ये दायरा बढ़ता चला गया और अंततः वो अलगथलग पड़ गए। शायद [[दीनदयाल उपाध्याय]] की हत्या के बाद वो मानते थे कि जनसंघ का नेतृत्व करने की क्षमता सिर्फ़ उनमें ही है, दूसरे किसी में नहीं है। उनकी इस धारणा को न तो उनके सहयोगियों ने माना और न ही संघ ने। यही कारण है कि उनमें असंतोष और निराशा बढ़ती गई और वो अपने सहयोगियों और संघ के बारे में अनाप-शनाप बोलने लगे। वह संगठन कौशल और लोगों को जोड़ने की कला को सीख नहीं पाए और यही उनके राजनैतिक पतन का कारण बना। बलराज मधोक ने भारतीय अल्पसंख्यकों के कथित "भारतीयकरण" की अवधारणा दी थी। उनका कहना था कि - : ''मुसलमानों को भारत की मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। इसके लिए दो कदम ज़रूरी हैं। पहला क़दम ये है कि उनके दिमाग से निकालो कि मुसलमान बनने के कारण तुम्हारी संस्कृति बदल गई। संस्कृति तुम्हारी वही है जो भारत की है। भाषा तुम्हारी वही है जो तुम्हारे माँ-बाप की थी। [[उर्दू]], [[हिन्दी]] का एक शैली है। मैं भी उसे पसन्द करता हूँ, क्योंकि मेरी शिक्षा भी उर्दू मे हुई है। लेकिन उर्दू मेरी भाषा नहीं है। मेरी भाषा पंजाबी है।'' : ''दूसरी बात उन्हें ये बताओ कि देश [[माँ]] की तरह है। सारे जापानी बौद्ध हैं। वो [[भारत]] आते हैं। उसे पुण्यभूमि मानते हैं लेकिन वो जापान से प्यार करते हैं। हिन्दुस्तान में इस्लाम के मज़हब को पूजा-विधि के रूप में कोई खतरा नहीं है, लेकिन यहाँ ये नहीं चल सकता कि जो मोहम्मद को माने वो भाई हैं और बाकी काफ़िर हैं।'' भारत के विभाजन को मधोक ने कभी स्वीकार नहीं किया और आजीवन हर मंच पर उसका विरोध करते रहे। मधोक का कहना था, : ''"दुर्भाग्य ये हुआ कि उस समय हमने विभाजन तो स्वीकार कर लिया लेकिन उससे निकलने वाले परिणामों को अनदेखा कर दिया। विभाजन ने दो बातें साफ़ कर दीं। ये जो 'साझा संस्कृति' को जो बात थी, वो समाप्त हो गई। हर देश की साझा संस्कृति होती है लेकिन कोई इसे 'साझा' नहीं कहता। विश्व में आज सबसे अधिक साझा संस्कृति अमरीका की है लेकिन वो भी उसे साझा नहीं कहते। वो इसे 'अमरीकन कल्चर' कहते हैं। [[गंगा]] के अन्दर अनेक नदियाँ मिलती हैं , लेकिन मिलने के बाद गंगाजल हो जाता है। ये 'गंगा-जमुनी' की बात गलत है। जब जमुना, गंगा मे मिल जाती है तो कोई गंगा के पानी को गंगा-जमुनी पानी नहीं कहता। वह गंगाजल कहलाता है।"
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