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== विद्रोह में भागीदारी और अन्त == [[चित्र:Birsa Munda Statue at Naya More.jpg|thumb|right|200px|बिरसा मुण्डा की राँची में स्थित मूर्ति]] [[१८९७|1897]] से [[१९००|1900]] के बीच मुंडाओं और अंग्रेज सिपाहियों के बीच युद्ध होते रहे और बिरसा और उसके चाहने वाले लोगों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। [[अगस्त]] [[१८९७|1897]] में बिरसा और उसके चार सौ सिपाहियों ने तीर कमानों से लैस होकर [[खूँटी]] थाने पर धावा बोला। [[१८९८|1898]] में तांगा नदी के किनारे मुंडाओं की भिड़ंत अंग्रेज सेनाओं से हुई जिसमें पहले तो अंग्रेजी सेना हार गयी लेकिन बाद में इसके बदले उस इलाके के बहुत से [[आदिवासी]] नेताओं की गिरफ़्तारियाँ हुईं।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/bihar/patna/news/god-birsa-munda-remembered-on-death-anniversary-091006-4738093.html|title=पुण्यतिथि पर याद किए गए भगवान बिरसा मुंडा|date=2019-06-10|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2020-06-09|archive-url=https://web.archive.org/web/20190612002559/https://www.bhaskar.com/bihar/patna/news/god-birsa-munda-remembered-on-death-anniversary-091006-4738093.html|archive-date=12 जून 2019|url-status=live}}</ref> [[जनवरी]] [[१९००|1900]] डोम्बरी पहाड़ पर एक और संघर्ष हुआ था जिसमें बहुत सी औरतें व बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। बाद में बिरसा के कुछ शिष्यों की गिरफ़्तारियाँ भी हुईं। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 [[मार्च]] 1900 को [[चक्रधरपुर]] में गिरफ़्तार कर लिये गये। बिरसा ने अपनी अन्तिम साँसें 9 जून१९०० को आंग्रेजों द्वारा जहर देकर मर गया |[[1900]] को [[राँची]] कारागार में लीं। आज भी [[बिहार]], [[ओडिशा|उड़ीसा]], [[झारखण्ड|झारखंड]], [[छत्तीसगढ़|छत्तीसगढ]] और [[पश्चिम बंगाल]] के आदिवासी इलाकों में बिरसा मुण्डा को [[भगवान]] की तरह पूजा जाता है।<ref name=":0" /> बिरसा मुण्डा की [[समाधि]] राँची में कोकर के निकट डिस्टिलरी पुल के पास स्थित है। वहीं उनका स्टेच्यू भी लगा है। उनकी स्मृति में रांची में बिरसा मुण्डा केन्द्रीय कारागार तथा [[बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र]] भी है।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/jharkhand/ranchi-jel-aane-ke-do-maah-baad-hi-ho-gayi-thi-birsha-munda-ki-mrityu-20368772.html|title=जेल में आने के दो माह बाद ही जेल में उन्हे खाना के बहना जहर खाकर बिरसा मुंडा की मृत्यु हो गया|last=|first=|date=|website=जागरण|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref>
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