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बीमा का इतिहास
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==बीमा का क्षेत्र एवं प्रकार== आधुनिक युग में बीमा का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक हो गया है। बीमा के अनेक प्रकार हैं परन्तु मुख्य रूप से वर्गीकरण इस प्रकार है :- === जीवन बीमा=== जीवन बीमा में बीमाकर्ता एक निश्चित प्रतिफल (प्रीमियम) के बदले एक निश्चित अवधि के बाद बीमित को अथवा बीमित की मृत्यु होने पर उस के उत्तराधिकारियों को एक निश्चित राशि देने का वचन देता है। प्रीमियम की राशि निश्चित समय तक, निश्चित अन्तराल से अथवा एक मुश्त भी जमा करवायी जा सकती है। यदि बीमित की मृत्यु बीमा अवधि में ही हो जाती है तो बीमा प्रीमियम आगे नही चुकाना पड़ता है व उत्तराधिकारियों को दावा राशि प्राप्त दो जाती है इसमें आर्थिक सुरक्षा के साथ -साथ बचत व विनियोग का लाभ भी प्राप्त होता है। === अग्नि बीमा=== अग्नि बीमा में बीमाकर्ता बीमित को एक निश्चित प्रीमियम के बदले निश्चित समयावधि में बीमित विषयवस्तु को अग्नि से होने वाली क्षति की पूर्ति करने का वचन देता है , यह सामान्यतः एक वर्ष की अवधि का ही कराया जाता है। dharm veer raika === समुद्री बीमा === सामुद्रिक बीमा में एक निश्चित प्रतिफल के बदले बीमाकर्ता बीमित को कुछ विशिष्ट संकटों एवं सामुद्रिक जोखिमों से हानि की रक्षा का वचन देता है। समुद्री बीमा जहाज, जहाज में लादे जाने वाले माल, जहाज के भाड़े व मार्ग में होने वाली समुद्रों जोखिमों जैसे जहाज का किसी अन्य जहाज या चट्टान से टकराने , समुद्री तू फान आदि का किया जाता है। === सामाजिक बीमा === सामाजिक बीमा वह व्यवस्था है जिसमें श्रमिकों, सेवायोजकों तथा सरकार के सहयोग से बेरोजगारी, बीमारी, दुर्घटना, मृत्यु आदि अनेक जोखिमों का बीमा करवाया जा सकता है ताकि ये जोखिमें उत्पन्न होने पर भी वे निश्चित होकर जीवन यापन कर सकें। सामाजिक बीमों में प्राय: निम्न प्रकार के बीमा सम्मिलित किये जाते है - *(क) '''बीमारी बीमा'''- बीमार पड़ने पर चिकित्सा सुविधा , दवाईयों तथा बीमारी अवधि की क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की जाती है उदाहरण- मेडीक्लेम योजना। *(ख) '''अपंगता बीमा'''- कारखाने में दुर्घटना में कर्मचारी के पूर्ण या आंशिक अपंगता पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। सेवायोजक बीमा करवा कर यह दायित्व बीमाकर्ता को सौंप देता है। *(ग) '''बेरोजगारी बीमा'''- विशिष्ट कारणों से बेरोजगार होने पर पुन: रोजगार मिलने की अवधि तक बीमा कम्पनी सहायता देती है। *(घ) '''वृद्धावस्था बीमा'''- बीमित को निश्चित आयु के बाद आर्थिक सहायता दी जाती है। === विविध बीमे=== समुद्री , अग्नि के अतिरिक्त भी कुछ अन्य जोखिमें भी है जिनका बीमा करवाने का व्यक्ति प्रयास करता है , व कुछ बीमों को कराना अनिवार्य भी होता है विविध बीमे के कुछ उदाहरण इस प्रकार है - *(1) वाहन बीमा- वाहनों का बीमा करवाना अनिवार्य है। इसमें वाहन व तृतीय पक्षकार को होने वाली क्षति का बीमा करवाया जाता है। *(2) व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा- इस बीमा में बीमित को किसी दुर्घटना में होने वाली क्षति की पूर्ति की जाती है। *(3) चौरी, डकैती बीमा- इस बीमा में बीमित को चोरी सैंधमारी, उठाईगीरी, डकै ती आदि से हुई हानि की पूर्ति का वचन दिया जाता है। *(4) वैधानिक दायित्व बीमा- व्यक्ति के कई वैधानिक दायित्व उत्पन्न हो सकते हैं , उनका बीमा करवाया जा सकता है यथा किसी तीसरे व्यक्ति को, स्वयं को या सम्पत्ति को चोट पहुँचने पर, आग लगने पर पड़ोसियों को होने जले नुकसान, रोजगार के दौरान दुर्घटना ग्रस्त होना आदि। *(5) विश्वसनीयता गारन्टी बीमा- इस बीमा में बीमाकर्ता किसी संस्था के कर्मचारियों की ईमानदारी की गारण्टी देता है व बईगानी से होने वाली हानि की पूर्ति का वचन देता है। *(6) फसल बीमा- फसल बीमा में बीमाकर्ता सामान्यत: जलवायु सम्बन्धी यथा सूखा, बाढ़, आँधी, तूफान आदि , महामारी के प्रकोप, पौधों की बीमारी, दंगो एवं हड़तालों से होने वाली क्षति की पूर्ति का वचन देता है। *(7) पशुधन बीमा - इस प्रकार के बीमा में यदि पशुओं में महामारी के कारण या अन्य बीमित कारणों से क्षति होती है तो क्षतिपूर्ति की जाती है। भारत में गाय, बैल, भैं स, बकरी, ऊंट का बीमा विशेष रूप से प्रचलित है। *(8) अपराध बीमा- बढ़ती अपराध प्रवृत्ति से सुरक्षा प्रदान करने हेतु यह बीमा किया जाता है। *(9) इंजीनियरी बीमा- कारखाने में लगी मशीनों व उपकरणों का बीमा किया जाता है। *(10) अन्य बीमें - उपयुर्क्त वर्णित बीमों के अलावा भी कई बीमे किये जाते हैं जैसे - सुन्दरता , वायुयात्रा, शोरूम के काँच, टेलीविजन, पम्पसेट, बैलगाड़ी, साईकिल आदि
सारांश:
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