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== अभिनय यात्रा == उन्हें मुख्य भूमिका निभाने का पहला मौका [[केदार शर्मा]] ने अपनी फ़िल्म [[नीलकमल (1947 फ़िल्म)|नील कमल]] (१९४७) में दिया। इस फ़िल्म मे उन्होने [[राज कपूर]] के साथ अभिनय किया। इस फ़िल्म मे उनके अभिनय के बाद उन्हे ''''''सिनेमा की सौन्दर्य देवी'''''' (Venus Of The Screen) कहा जाने लगा। [[File:1949 mahaal.jpg|thumb|मधुबाला अपनी पहली सफल फिल्म ''महल'' में।]] इसके २ साल बाद [[बाम्बे टॉकीज़]] की फ़िल्म [[महल (1949 फ़िल्म)|महल]] में उन्होने अभिनय किया। महल फ़िल्म का गाना ''''''आयेगा आनेवाला'''''' लोगों ने बहुत पसन्द किया। इस फ़िल्म का यह गाना पार्श्व गायिका [[लता मंगेशकर|लता मंगेश्कर]], इस फ़िल्म की सफलता तथा मधुबाला के कैरियर में, बहुत सहायक सिद्ध हुआ। महल की सफलता के बाद उन्होने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उस समय के स्थापित पुरूष कलाकारों के साथ उनकी एक के बाद एक फ़िल्म आती गयीं तथा सफल होती गयीं। उन्होंने [[अशोक कुमार (राजनीतिज्ञ)|अशोक कुमार]], [[रहमान]], [[दिलीप कुमार]], [[देवानन्द]] आदि सभी के साथ काम किया। १९५० के दशक में उनकी कुछ फ़िल्मे असफल भी हुयी। जब उनकी फ़िल्मे असफल हो रही थी तो आलोचक ये कहने लगे की मधुबाला में प्रतिभा नही है तथा उनकी कुछ फ़िल्में उनकी सुन्दरता की वज़ह से हिट हुयीं, ना कि उनके अभिनय से। लेकिन ऐसा नहीं था। उनकी फ़िल्मे फ़्लाप होने का कारण था- सही फ़िल्मों का चुनाव न कर पाना। मधुबाला के पिता ही उनके मैनेजर थे और वही फ़िल्मों का चुनाव करते थे। मधुबाला परिवार की एक मात्र ऐसी सदस्या थीं जिनकी आय पर ये बड़ा परिवार टिका था। अतः इनके पिता परिवार के पालन-पोषण के लिये किसी भी तरह के फ़िल्म का चुनाव कर लेते थे। चाहे भले ही उस फ़िल्म मे मधुबाला को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले या ना मिले और यही उनकी कुछ फ़िल्मे असफल होने का कारण बना। इन सब के बावजूद वह कभी निराश नही हुयीं। १९५८ मे उन्होने अपने प्रतिभा को पुनः साबित किया। इस साल आयी उनकी चार फ़िल्मे ([[फागुन (1958 फ़िल्म)|फ़ागुन]], [[हावड़ा ब्रिज (1958 फ़िल्म)|हावरा ब्रिज]], [[काला पानी (1958 फ़िल्म)|काला पानी]] और [[चलती का नाम गाड़ी (1958 फ़िल्म)|चलती का नाम गाडी]]) सुपरहिट हुयीं।
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