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=== कृतियाँ === पण्डित मधुसूदन ओझा ने लगभग 150 से 200 पुस्तकों की रचना की है इनमें से 40 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है एवं 80 पुस्तकें अप्रकाशित हैं शेष पुस्तकें प्राप्य नहीं हैं। इनकी कुछ प्रकाशित रचनाएं हैं - ==== 1. जगद्गुरुवैभवम् ==== हजारों वर्ष पूर्व के वैदिक ब्रह्मा का ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दोनों प्रकार का वर्णन है ==== 2. इंद्रविजय ==== भौम, दिव्य और शरीर इन त्रैलोक्य का विवेचन, भारतवर्ष व हिंदुस्थान दोनों नामों का विवरण। आर्य-लोग भारत में बाहर से आए इस धारणा को भी युक्ति प्रमाण से निर्मूल सिद्ध किया गया। ==== 3. व्योमवाद ==== आकाश ही सृष्टि का प्रभव प्रतिष्ठा और प्रलयस्थान है इसका विवेचन। (पण्डित अनंत शर्मा द्वारा हिंदी टिप्पणानुवाद, पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा प्रकाशित) ==== 4. अपरवाद ==== काल, स्वभाव, नियति, यदृच्छा, भूत, योनि, और पुरुष - इन सात तत्त्वों के पारस्परिक संयोग से विश्व की उत्पत्ति का समर्थन। (पण्डित अनंत शर्मा द्वारा हिंदी टिप्पणानुवाद, पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा प्रकाशित) ==== 5. आवरणवाद ==== वय, वयुन, वयोनाध नामक तीन तत्त्वों से सृष्टि की उत्पत्ति बताई गई है। (पण्डित अनंत शर्मा द्वारा हिंदी टिप्पणानुवाद, पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा प्रकाशित) ==== 6. अम्भोवाद ==== जल को जगत् की उत्पत्ति और प्रलय का कारण बताकर जल की घन, तरल और विरल अवस्थाओं को समझाकर उसकी मूल कारणता सिद्ध की गई है। (पण्डित अनंत शर्मा द्वारा हिंदी टिप्पणानुवाद, पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा प्रकाशित) ==== 7. अत्रिख्याति ==== अत्रिऋषि और उनके वंश का वैज्ञानिक व ऐतिहासिक दोनों प्रकार का वर्णन। (पण्डित अनंत शर्मा द्वारा हिंदी टिप्पणानुवाद, पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा प्रकाशित) ==== 8. दशवादरहस्य ==== जैसे आजकल षड्दर्शन हैं वैसे ही वैदिक काल में दशवाद प्रचलित थे उन्हीं का संक्षिप्त विवरण। ====अन्य ग्रन्थ==== इनके अतिरिक्त अहोरात्रवाद, गीताविज्ञानभाष्य, शारिरकविज्ञानभाष्य, ब्रह्मविज्ञान प्रवेशिका, ब्रह्मविज्ञान, ब्रह्मचतुष्पदी, ब्रह्मसमंवय, देवतानिवित्, वैदिक कोष, कादम्बिनी आदि लगभग 120 प्राप्य रचनाएं हैं। इनके जीवनकाल में व पश्चात भी लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत प्राध्यापक पण्डित आद्यादत्त ठाकुर ने अपने ही ज्ञान व धन से लगभग 15 पुस्तकें प्रकाशित की है और आर्थिक विवशता के कारण मूल (बिना व्याख्या के) ही प्रकाशित करना पड़ा। इसके पश्चात पण्डित मोतीलाल शर्मा, सुरजनदास स्वामी व पण्डित अनंत शर्मा द्वारा आए बढ़ाया गया। [[जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर]] में पण्डित मधुसूदन ओझा के ग्रंथों पर शोध हेतु पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ की स्थापना भी की गई है।
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