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==== मस्तिष्क में सूचना का संवहन ==== तंत्रिका कोशा ही सूचना संवहन की इकाई होती है। मुख्य रूप से तंत्रिका कोशा कला के बाहर और अंदर की घटनाएं ही इसके लिए उत्तरदाई होतीं हैं। कोशा कला के अंदर और बाहर [[सोडियम]] आयन्स (Na+) और (K+) घुलनशील अवस्था में विद्यमान होते हैं। उद्दीपन की स्थिति में इन आयनों का संवहन सामान्य से विचलित हो जाता है और यह सतत् विचलन एक संवेग में परिवर्तित हो जाता है। विभिन्न उद्दीपकों की उपस्थिति में उनका समाकलन एवं योग भी होता है और यह उद्दीपन को कोड करने का कार्य करता है। यह संवेग कोशिका के एक सिरे से दूसरे सिरे पर संवहित होता है। दो तंत्रिका कोशाओं में संवेग संचरण न्यूरोकेमिकल्स के माध्यम से होता है। दो कोशाओं के सिरे आपस में साइनेप्स का निर्माण करते हैं। एक वाहक कोशिका से स्रावित न्यूरोकेमिकल दूसरी कोशा को आयनिक विचलन द्वारा उत्तेजित कर देता है। इस प्रकार संवेग का संचरण पूर्ण होता है। अब प्रश्न उठता है कि मस्तिष्क में इन सभी संचरणों के फलस्वरूप क्या होता है? मस्तिष्क में विभिन्न स्तरों पर इन सूचनाओं का संकलन एवं परिमार्जन किया जाता है। उदाहरण के लिए हम दृश्य परिघटना को ले सकते हैं। किसी भी दृश्य का दिखाई देना उस पर पड़ रही प्रकाश की किरणों के प्रत्यावर्तन के कारण होता है। इस प्रत्यावर्तित प्रकाश की किरणें जब हमारी रेटिना पर पड़ती हैं तो उस दृश्य का एक उल्टा एवं द्विवीमीय प्रतिबिंब बनता है (क्योंकि [[दृष्टि पटल|रेटिना]] एक द्विवीमीय फोटोग्राफिक प्लेट की तरह कार्य करती है। परंतु जब मस्तिष्क के दृश्य क्षेत्र में रेटिना द्वारा प्राप्त संकेतो की व्याख्या होती है तो हम एक वास्तविक त्रिविमीय दृश्य का अनुभव करते हैं। ऐसा मस्तिष्क में विभिन्न स्तरों पर संयोजन, परिमार्जन एवं प्रक्रमण के कारण होता है।
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