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== भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में रक्षा बन्धन पर्व की भूमिका == [[भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] में जन जागरण के लिये भी इस पर्व का सहारा लिया गया। श्री [[रवीन्द्रनाथ ठाकुर]] ने [[बंग-भंग]] का विरोध करते समय रक्षाबन्धन त्यौहार को [[बंगाल]] निवासियों के पारस्परिक भाईचारे तथा एकता का प्रतीक बनाकर इस त्यौहार का राजनीतिक उपयोग आरम्भ किया। [[1905]] में उनकी प्रसिद्ध कविता "मातृभूमि वन्दना" का प्रकाशन हुआ जिसमें वे लिखते हैं- "हे प्रभु! मेरे बंगदेश की धरती, नदियाँ, वायु, फूल - सब पावन हों;<br /> है प्रभु! मेरे बंगदेश के, प्रत्येक भाई बहन के उर अन्तःस्थल, अविछन्न, अविभक्त एवं एक हों।"<ref>{{cite web|url= http://www.lakesparadise.com/madhumati/show_artical.php?id=493|title= साहित्य में राष्ट्रीयता का उद्भव|access-date= [[24 जुलाई]] [[2007]]|format= पीएचपी|publisher= मधुमती|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20070928080309/http://www.lakesparadise.com/madhumati/show_artical.php?id=493|archive-date= 28 सितंबर 2007|url-status= dead}}</ref><br/> ([[बांग्ला भाषा|बांग्ला]] से हिन्दी अनुवाद) सन् 1905 में लॉर्ड कर्ज़न ने बंग भंग करके [[वन्दे मातरम्]] के आन्दोलन से भड़की एक छोटी सी चिंगारी को शोलों में बदल दिया। 16 अक्टूबर 1905 को बंग भंग की नियत घोषणा के दिन रक्षा बन्धन की योजना साकार हुई और लोगबाग गंगा स्नान करके सड़कों पर यह कहते हुए उतर आये- : ''सप्त कोटि लोकेर करुण क्रन्दन, सुनेना सुनिल कर्ज़न दुर्जन; : ''ताइ निते प्रतिशोध मनेर मतन करिल, आमि स्वजने राखी बन्धन।<ref name="क्रान्त">{{cite book |last1=क्रान्त |first1= |authorlink1= |last2= |first2= |editor1-first= |editor1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 |format= |accessdate= |edition=1 |series= |volume=1 |date= |year=2006 |month= |origyear= |publisher=प्रवीण प्रकाशन |location=नई दिल्ली |language=hi |isbn=81-7783-119-4 |oclc= |doi= |id= |page=186-187 |pages= |chapter= |chapterurl= |quote= |ref= |bibcode= |laysummary= |laydate= |separator= |postscript= |lastauthoramp= |archive-url=https://web.archive.org/web/20131014175453/http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 |archive-date=14 अक्तूबर 2013 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:भारत में रक्षाबंधन पर्व भाई बहन के पवित्र रिश्तों का प्रतीक है।.jpg|अंगूठाकार|भारत में रक्षाबंधन पर्व भाई बहन के पवित्र रिश्तों का प्रतीक है। ]]
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