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==रमन प्रभाव== भौतिकीविदों का प्रभावी औजार शुरूआती दौर में रमन प्रभाव का उपयोग भौतिकीविदों द्वारा शोध अध्ययनों में किया गया। पहले 7 वर्षों में इस प्रभाव को आधार बना कर 700 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। एक ओर [[सैद्धान्तिक भौतिकी|सैद्धांतिक भौतिकी]] की दृष्टि से इस प्रभाव ने क्वांटम भौतिकी को सुदृढ़ आधार प्रदान करने का कार्य किया तो वहीं दूसरी ओर प्रायोगिक भौतिकविदों को क्रिस्टलों और अणुओं की संरचनाओं के अध्ययन के लिए एक अत्यन्त दक्ष, सरल तकनीक प्रदान की। फिर धीरे-धीरे भौतिकविदों की इस नई तकनीक में रूचि कम होने लगी। पर तब तक रसायनज्ञों के बीच एक विश्लेषणात्क औजार के रूप में यह तकनीक लोकप्रिय होने लगी थी। रसायनज्ञों के औजार के रूप में प्रत्येक पदार्थ का अपना विशिष्ट स्पेक्ट्रम होता है। अतः पदार्थ को नष्ट किए बिना मिश्रणों का भी रासायनिक विश्लेषण इस तकनीक द्वारा किया जा सकता था और पदार्थ कार्बनिक हो या अकार्बनिक उसके हस्ताक्षर रमन स्पेक्ट्रम में पहचाने जा सकते थे। साथ ही स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तीव्रता की तुलना से उनके सापेक्ष परिमाण की उपस्थिति का आकलन भी किया जा सकता था। यह एक व्यापक तकनीक थी और इसका उपयोग द्रवों के अतिरिक्त गैसों और ठोसों के लिए भी किया जा सकता था। किंतु [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के बाद सुग्राही संसूचकों और इलेक्ट्रॉनिकी में हुए विकास के कारण वैज्ञानिकों को [[अवरक्त स्पेक्ट्रममिति]] रमन स्पेक्ट्रममिति से सरल लगने लगी और रमन प्रभाव के अनुप्रयोगों की ओर रूझान कुछ कम हुआ। किंतु [[लेसर विज्ञान|लेसर]] की खोज के बाद 1960 से रमन प्रभाव फिर से वैज्ञानिक अन्वेषकों में लोकप्रिय हो गया।
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