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=== यूरोप प्रवास === 1930 जुलाई को लोहिया अग्रवाल समाज के कोष से पढ़ाई के लिए [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] रवाना हुए। वहाँ से वे [[बर्लिन]] गए। विश्वविद्यालय के नियम के अनुसार उन्होंने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो॰ बर्नर जेम्बार्ट को अपना प्राध्यापक चुना। 3 महीने में [[जर्मन भाषा]] सीखी। 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने [[दांडी मार्च|दाण्डी यात्रा]] प्रारंभ की। जब नमक कानून तोड़ा गया तब पुलिस अत्याचार से पीड़ित होकर पिता हीरालाल जी ने लोहिया को विस्तृत पत्र लिखा। 23 मार्च को [[लाहौर]] में [[भगत सिंह]] को फांसी दिए जाने के विरोध में [[राष्ट्र संघ|लीग ऑफ नेशन्स]] की बैठक में बर्लिन में पहुंचकर सीटी बजाकर दर्शक दीर्घा से विरोध प्रकट किया। सभागृह से उन्हें निकाल दिया गया। भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे [[बीकानेर]] के महाराजा द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने पर लोहिया ने [[रोमानिया|रूमानिया]] की प्रतिनिधि को खुली चिट्ठी लिखकर उसे अखबारों में छपवाकर उसकी कॉपी बैठक में बंटवाई। [[गांधी-इरविन समझौता|गांधी इर्विन समझौते]] का लोहिया ने प्रवासी भारतीय विद्यार्थियों की संस्था "मध्य यूरोप हिन्दुस्तानी संघ" की बैठक में संस्था के मंत्री के तौर पर समर्थन किया। [[साम्यवाद|कम्युनिस्टों]] ने विरोध किया। बर्लिन के स्पोटर्स पैलेस में [[एडोल्फ़ हिटलर|हिटलर]] का भाषण सुना। 1932 में लोहिया ने [[दांडी मार्च|नमक सत्याग्रह]] विषय पर अपना [[शोध-प्रबन्ध|शोध प्रबंध]] पूरा कर [[हम्बोल्ट बर्लिन विश्वविद्यालय|बर्लिन विश्वविद्यालय]] से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
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