सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
लिनस पाउलिङ्
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
==व्यवसाय== सन १९२६ में उन्को यूरोप की यात्रा करने के लिये गुग्नेइनिम फैलोशिप दिया गया थ। उधर उन्को अर्नोल्ड सोमर्फील्ड, नीइल्स बॉह्र,और एर्विन स्क्रोडिङर- इन तीनों वैज्ञानिकों के साथ काम करने का मौका मिला। वह क्वांटम रसायन विज्ञान के क्षेत्र का प्रतम वैज्ञानिकों में से एक बन गया। सन १९२७ में पॉलिंग कैलटेक विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम करना शुरू किया। उन्होंने पांच वर्ष में लगभग पचास पत्रों प्रकाशित किया और पांच नियमों को बनाया जिसे हम पॉलिंग के नियमों कहते हैं। सन १९३०में पॉलिंग नेअपना सबसे महत्वपूर्ण लेख को प्रकाशित किये थे, जिसमें उन्होंने "हैब्रिडैसेशन ऑफ अटामिक आर्बटल्स" और "कार्बन की टेट्रावेलन्सी" पर काम किये थे।सन १९३२ में पॉलिंग ने वैद्युतीयऋणात्मकता की अवधारणा की शुरू की। तत्वों के विभिन्न गुणों का उपयोग, उन्होंने एक पैमाने, और अधिकांश तत्वों के लिए एक संबद्ध संख्यात्मक मूल्य की स्थापना की। सन १९३६ में पाउलिङ को कैलटेक के रसायन विज्ञान और केमिकल इंजीनियरिंग के विभाजन के अध्यक्ष का पदोन्नित मिला। सन १९३७ में उन्होंने कॉर्नेल विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र के प्राध्यापक के रूप में काम किया। उस समय, वह अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "रासायनिक बंधन का स्वभाव" पूरा किया। रासायनिक बंधन का स्वभाव में उन्की अनुसन्धान के लिये उन्को सन १९५४ में नोबेल पुरस्कार मिली। सन १९३० के बाद पाउलिङ ने प्रोटीन, अमिनो एसिड और डीएनए आदि की संरचनाओं की अनुसंधान में अपनी रुची दिखाने लगे। नवंबर १९४९ में, पॉलिंग, हार्वे इटानो, एस जे सिङर और इबर्ट वेल्स ने "सिकल सेल एनीमिया" नामक एक आण्विक रोग के बारे में "साइंस" जर्नल में प्रकाशित किये। सन १९५१ में, पॉलिंग "आण्विक चिकित्सा " के हकदार पर एक व्याख्यान दिया। सन १९५० के बाद पॉलिंग मस्तिष्क समारोह में एंजाइमों की भूमिका पर काम किया।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)