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== रेबीज टिका == पाश्चरने तरह-तरह के सहस्रों प्रयोग कर डाले। इनमें बहुत से खतरनाक भी थे। वे विषैले वाइरस वाले भयानक कुत्तों पर काम कर रहे थे। अत में पाश्चरने इस समस्या का हल निकाल लिया। उन्होंने थोड़े से विषैले वाइरस को दुर्बल बनाया। फिर उससे इस वाइरस का टीका तैयार किया। इस टीके को उन्होंने एक स्वस्थ कुत्ते की देह में पहुँचाया। टीके की चौदह सुइयाँ लगाने के बाद रैबीज के प्रति रक्षित हो गया। पाश्चरकी यह खोज बड़ी महत्त्वपूर्ण थी; पर पाश्चरने अभी मानव पर इसका प्रयोग नहीं किया था। सन् १८८५ ई। की बात है। लुई पाश्चर अपनी प्रयोगशाला में बैठे हुए थे। एक फ्रांसीसी महिला अपने नौ वर्षीय पुत्र जोजेफ को लेकर उनके पास पहुँची। उस बच्चे को दो दिन पहले एक पागल कुत्ते ने काटा था। पागल कुत्ते की लार में नन्हे जीवाणु होते हैं जो रैबीज वाइरस कहलाते हैं। यदि कुछ नहीं किया जाता, तो नौ वर्षीय जोजेफ धीरे-धीरे जलसंत्रास(hydrofobia) से तड़प कर जान दे देगा। लुई पाश्चरने बालक जोजेफ की परीक्षा की। कदाचित् उसे बचाने का कोई उपाय किया जा सकता है। बहुत वर्षों से वे इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रहे थे कि जलसंत्रास को कैसे रोका जाए? लुई इस रोग से विशेष रूप से घृणा करते थे। अब प्रश्न था कि बालक जोजेफ के रैबीज वैक्सिन की सुईयाँ लगाने की हिम्मत करें अथवा नहीं। बालक की मृत्यु की सम्भावना थी। पर सुइयां न लगने पर भी उसकी मृत्यु निश्चित् है। इस दुविधा में लुईने तत्काल निर्णय लिया और बालक जोजेफ का उपचार करना शुरू कर दिया। लुई दस दिन तक बालक जोजेफ के वैक्सीन की बढ़ती मात्रा की सुइयाँ लगाते रहे और तब महान आश्चर्य की बात हुई। बालक जोजेफ को जलसंत्रास नही हुआ। इसके विपरीत वह अच्छा होने लग गया। इतिहास में प्रथम बार मानव को जलसंत्रास से बचाने के लिए सुई लगाई गई। पास्चरने वास्तव में मानव जाति को यह अनोखा उपहार दिया। पाश्चरके देशवासियों ने उन्हें सब सम्मान एवं सब पदक प्रदान किए। उन्होंने लुईके सम्मान में पास्चर इंस्टीट्यूट का निर्माण किया: किन्तु कीर्ति एव ऐश्वर्य से पास्चर मे कोई परिवर्तन नहीं आया। वे जीवनपर्यन्त तक सदैव रोगों को रोक कर पीड़ा हरण के उपायों की खोज में लगे रहे। रेशम के कीड़ो के रोग की रोकथाम के लिए उन्होंने 6 वर्षो तक इतने प्रयास किये कि वे अस्वस्थ हो गये। पागल कुत्तो के काटे जाने पर मनुष्य के इलाज का टीका ,हैजा ,प्लेग आदि संक्रामक रोगों के रोकथाम के लिए उन्होंने विशेषत: कार्य किया। यह सचमुच एक महान कार्य था। इस तरह लुई पाश्चर एक सामान्य मानव से महामानव बने। चिकित्सा विज्ञान में उनके इस महायोगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। सन् 1895 ई। में आपकी निद्रावस्था में ही मृत्यु हो गई। [https://web.archive.org/web/20200521190543/https://www.prabhasakshi.com/personality/louis-pasteur-death-anniversary चिकित्सा जगत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं ‘लुई पाश्चर’] [[श्रेणी:वैज्ञानिक]] [[श्रेणी:फ़्रांस के लोग]] [[श्रेणी:1822 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:१८९५ में निधन]]
सारांश:
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