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== राजनीतिक जीवन == === आरंभिक राजनीतिक जीवन === [[File:Dr Subramanian Swamy with Morarji Desai.jpg|thumb|250px|सुब्रह्मण्यम स्वामी मोरार्जी देसाई के साथ|कड़ी=Special:FilePath/Dr_Subramanian_Swamy_with_Morarji_Desai.jpg]] डॉ॰ स्वामी का राजनीतिक जीवन अराजनैतिक आंदोलन के साथ शुरू हुआ। यह आन्दोलन एक गैरराजनीतिक आन्दोलन के रूप में शुरू हुआ जिसने आगे चलकर जनता पार्टी की नींव डाली। डॉ॰ स्वामी द्वारा रखे गए उदारवादी आर्थिक नीतियों की तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी बहुत बड़ी विरोधी थी और बाद में इंदिरा गाँधी के कारण डॉ॰ स्वामी को आई॰आई॰टी॰ से बर्खास्त कर दिया गया और इस घटना के बाद से डॉ॰ स्वामी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। डॉ॰ स्वामी इंदिरा गांधी के विरोधी पार्टी [[भारतीय जनसंघ|जनसंघ]] के तरफ से राज्यसभा के सदस्य बने। 1974 और 1999 के बीच डॉ॰ स्वामी 5 बार संसद सदस्य के रूप में चुने गए। उन्होंन 1974 और 1999 के बीच उत्तर पूर्व मुंबई, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का संसद में प्रतिनिधित्व किया। डॉ॰ स्वामी जयप्रकाश नारायण के साथ जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक है और 1990 के बाद से इसके अध्यक्ष हैं। === आपातकाल === डॉ॰ स्वामी के नौकरशाहों के बीच काफी संपर्क थे। इसलिए उन्हें पहले ही आपातकाल के विषय में पता चल गया था। २५ जून १९७५ के दिन डॉ॰ स्वामी जयप्रकाश नारायण के साथ रात्रिभोज कर रहे थे तो उन्होंने जी॰पी॰ को कहा की कुछ बड़ा आने वाला है तो जी॰पी॰ ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया, उन्होंने कहा की इंदिरा गाँधी ऐसी मूर्खता नहीं करेंगी। दूसरे दिन सुबह 4.30 बजे उन्हें एक गुमनाम कॉल आया जिसमे उन्हें पुलिस ने अप्रत्यक्ष रूप से बताया की वो डॉ॰ स्वामी को पकड़ने वाले है। इसके बाद डॉ॰ स्वामी ६ महीनो के लिए भूमिगत हो गए। उस समय जयप्रकाश नारायण ने डॉ॰ स्वामी को सूचना भेजी की तुम अमेरिका जाओ। क्योंकि उन्होंने डॉ॰ स्वामी को हार्वर्ड में देखा था। जी॰पी॰ ने कहा की अमेरिका में जाकर भारत के आपातकाल के बारे में लोगो को जागरूक करो। उसके बाद डॉ॰ स्वामी अमेरिका में जाकर हार्वर्ड में प्रोफेसर बन गए और हार्वर्ड के मंच का उपयोग करके आपातकाल अमेरिका के २३ राज्यों में भारतीयों को जागरूक करना शुरू किया। === संसद मे घुसकर भाषण देना=== डॉ॰ स्वामी ने आपातकाल के समय सोचा की लोगों में आपातकाल के खिलाफ हिम्मत जगाने के लिए वो एक दिन के लिए संसद में घुसेंगे और २ मिनट का भाषण देकर पुनः भूमिगत हो जायेगे। इस कार्य को करके वे यह सिद्ध करना चाहते थे कि पूरा देश इंदिरा गाँधी के नियंत्रण में नहीं है। उस समय डॉ॰ स्वामी के नाम से वारंट जारी हो चुका था। लेकिन फिर भी वो १० अगस्त १९७६ के दिन संसद में गए और यह देश विदेश के पत्रकारों के सामने यह कहकर निकल गए की भारत में प्रजातंत्र मर चुका है। उसके बाद डॉ॰ स्वामी नेपाल के मार्ग से वापस अमेरिका चले गए। इस घटना से लोगों को एक नया बल मिला और वे आपातकाल के समय एक नायक बन गए। === भारत के कानून और वाणिज्य मंत्री === 1990 और 1991 के दौरान स्वामी योजना आयोग के सदस्य और भारत और वाणिज्य मंत्री रहे। इस अवधि के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल के दौरान भारत में आर्थिक सुधारों के लिए खाका बनाया। जो बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के नेतृत्व में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 1991 लागू किया गया। डॉ॰ स्वामी ने अपनी पुस्तक में बताया है की मनमोहन सिंह ने इस बात को स्वीकार भी किया है। 1994 और 1996 के बीच, वह पी॰वी॰ नरसिम्हा राव सरकार के कार्यकाल के दौरान "श्रम मानकों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर आयोग के अध्यक्ष" (एक कैबिनेट मंत्री के पद के समकक्ष) के पद पर रहे। ===२००४ का लोकसभा चुनाव === २००४ के लोकसभा चुनावो में जनता पार्टी ने अपने कई उम्मीदवार उतारे। लेकिन एक भी उम्मीदवार की जीत नहीं हुई। बाद में स्वामी ने बताया की कई चुनाव बूथों में उनकी पार्टी को जीरो वोट मिले है। इस चुनाव के बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में वोटिंग मशीन में गड़बड़ी के मामले को लेकर मुकदमा दायर किया। स्वामी ने दावा किया की वोटिंग मशीन में गड़बड़ी के कारण उनकी पार्टी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई। ===२००९ का लोकसभा चुनाव === [[File:Dr Subramanian Swamy meets Narendra Modi.jpg|thumb|250px|सुब्रह्मण्यम स्वामी [[नरेन्द्र मोदी]] के साथ (११ मार्च २०११)|कड़ी=Special:FilePath/Dr_Subramanian_Swamy_meets_Narendra_Modi.jpg]] २००९ के लोकसभा चुनावो में स्वामी ने जनता पार्टी की तरफ से एक भी उम्मीदवार चुनावो में नहीं उतारा। स्वामी ने कहा की २००९ के चुनावो में कांग्रेस बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में गड़बड़ी करके चुनाव जीतने वाली है इसलिए चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं है। २०१३ के अंत में उन्हें वोटिंग मशीन में गड़बड़ी के मामले में सर्वोच्च न्यायलय में जीत हासिल हुई। सर्वोच्च न्यायलय ने निर्णय दिया की वोटिंग मशीन में रसीद प्रिंट की जाएगी जिसे बैलेट बॉक्स में डाला जायेगा। अगर चुनाव में गड़बड़ी की आशंका होगी तो बैलेट बॉक्स में गिनती की जाएगी। === जनता पार्टी का NDA से जुड़ना=== डॉ॰ स्वामी 2G घोटाले में कांग्रेस के खिलाफ अपने प्रदर्शन के लिए सुर्खियों में रहे। डॉ॰ स्वामी जनता पार्टी को NDA का हिस्सा बनाना चाहते थे। अन्ततः ११ मार्च २०१२ को जनता दल को NDA का घटक दल बना लिया गया। जनता दल के जुड़ने से NDA के घटक दलों की संख्या बढकर ६ हो गई। ===२०१२ का गुजरात विधानसभा चुनाव === २०१२ के गुजरात के विधान सभा चुनावो के लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने अक्टूबर २०१२ से ३ महीने के लिए नरेंद्र मोदी के समर्थन में चुनावी प्रचार किया। उन्होंने कहा की वर्त्तमान बीजेपी पार्टी में नरेन्द्र मोदी प्रधान मंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा योग्य है। स्वामी ने कहा की गुजरात में सबसे न्यूनतम भ्रष्टाचार है। चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत हुई लेकिन स्वामी का दावा है की मोदी और भी ज्यादा सीटे जीतते अगर कांग्रेस सरकार वोटिंग मशीन में गड़बड़ी नहीं करती। स्वामी ने दावा किया की अगर गुजरात में EVM का बिलकुल प्रयोग नहीं होता तो BJP 35 सीटें और जीतती। ===२०१४ का लोकसभा चुनाव === सुब्रह्मण्यन स्वामी ने २०१४ के चुनावो के लिए बहुत पहले से ही प्रचार अभियान आरंभ कर दिया। चुनाव को दृष्टि में रखते हुए उन्होंने पूरे देश में आम सभाएं कीं। इस दौरान उन्होंने २ बार नरेंद्र मोदी से जाकर भेंट की। चुनावी सभाओ में उन्होंने NDA के मुद्दों से जनता को अवगत कराया। जून २०१३ में वो अमेरिका के दौरे पर गए एवं अमेरिका के कई राज्यों में सभाएं कीं। उन्होंने कहा कि कश्मीर-समस्या का हल सबसे महत्वपूर्ण तो है ही साथ में बांग्लादेशी घुसपैठ को रोकना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
सारांश:
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