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== अनुप्रयोग == {{Split section|applications of the Stirling engine|talk:Stirling engine#Splitting section out|date=अप्रैल 2009}} [[चित्र:Stirling Engine.jpg|thumb|250px|एक डेस्कटॉप अल्फा स्टर्लिंग इंजन. इस इंजन में कार्यरत द्रव हवा है। गर्म ताप एक्सचेंजर दाईं तरफ का कांच सिलेंडर है और शीत ताप एक्सचेंजर शीर्ष पर पंखेदार सिलेंडर है। यह इंजन एक छोटे से अल्कोहल बर्नर (नीचे बांए की ओर) का इस्तेमाल एक ताप स्रोत के रूप में उपयोग करता है]] === तापन और शीतलन === अगर यांत्रिक उर्जा के रूप में पूर्ति कि जाये तो स्टर्लिंग इंजन गरम पम्प और ठंडा करने की विपरीत भूमिका में काम कर सकता है। वायु ऊर्जा का इस्तेमाल स्टर्लिंग चक्र हेतु प्रयोग किया जा चुका है जिसका उपयोग हम पम्प को घरेलू ताप और एयर-कंडीशनिंग के लिए किया जाता है। 1930 के दशक के उत्तरार्ध में नीदरलैंड्स के फिलिप्स कार्पोरेशन ने सफलता पूर्वक तुषार-जनित अनुप्रयोगों के लिए स्टर्लिंग क्रिया का प्रयोग किया।<ref name="Hargreaves63">सी. एम. हर्ग्रिव्स (1991), p.63 </ref> === संयोजित ताप और उर्जा === विद्युत ग्रिड पर थर्मल उर्जा के केन्द्रों में ईंधन का प्रयोग बिजली के उत्पादन के लिए किया जाता है, हांलाकि भारी मात्रा में अप्रयुक्त ताप का उत्पादन होता है जो बिना किसी उपयोग के रह जाते हैं। दूसरी स्थिति में उच्च-श्रेणी के ईंधन का प्रयोग न्यून तापमान के अनुप्रयोग के लिए किया जाता है। थर्मोडायनामिक्स के दूसरे नियमानुसार एक उष्मीय इंजन इस तापमान के अंतर से उर्जा का निर्माण कर सकता है। एक CHP में उच्च तापमान प्राथमिक ताप, स्टर्लिंग इंजन के हीटर में प्रवेश करता है, फिर इंजन में कुछ उर्जा का बदलाव यांत्रिक उर्जा के रूप में हो जाता है और शेष शीतलक से गुजर जाता है, जहां पर वह न्यून तापमान में होता है। "अपशिष्ट" ताप इंजन के मुख्य ''शीतलक'' से आती है, या संभवतः दूसरे स्रोतों से जैसे कि निकास के बर्नर से, अगर वह उसमें है तो. एक संयोजित ताप और उर्जा (CHP) की व्यवस्था में, यांत्रिक और विद्युत उर्जा का निर्माण सामान्य प्रकिया के द्वारा ही होता है, हालांकि इंजन द्वारा जो अपशिष्ट गर्मी प्राप्त होती है उसे दूसरे उष्णीय अनुप्रयोग के लिए पूर्ति की जाती है। यह वास्तविक रूप में कुछ भी हो सकता है जो न्यून तापमान की गर्मी का प्रयोग करता है। यह अक्सर पहले से विद्यमान उर्जा का ही इस्तेमाल है, जैसे कि वाणिज्यिक स्थानों का तापन, आवासीय जल तापन या फिर औद्योगिक प्रक्रिया. इंजन द्वारा निर्मित उर्जा का प्रयोग औद्योगिक और कृषि सम्बन्धी प्रक्रिया को चलाने के लिए किया जा सकता है, जो कि जैव ईंधन के रूप में पुनः अग्राह्य शेष के रूप में प्राप्त होता है, इसका इस्तेमाल इंजन के लिए निःशुल्क ईंधन के रूप में किया जा सकता है, जो कि इस शेष को निकलने के खर्चे को कम कर देता है। यह पूरी प्रक्रिया उपयोगी और फायदेमंद हो सकती है। डिसेंको, एक ब्रिटेन में स्थापित कंपनी अपने गृह ऊर्जा संयंत्र के विकास की अंतिम प्रक्रिया से गुजर रहा है। बाज़ार में आने वाले अन्य m-CHP उपकरण के विपरीत HPP, 3 kW की विद्युतीय एवं 15 kW उष्मीय ऊर्जा उत्पन्न करता है। जो कि इस उपकरण को घरेलु और SME बाजारों दोनों के लिए अनुकूल बना देता है। [[न्यूज़ीलैण्ड|न्यूजीलैंड]] के एक व्यावसायिक कंपनी व्हिस्परजेन जिसका कार्यालय [[क्राइस्टचर्च|क्राईस्टचर्च]] में है, ने ए.सी माईक्रो उष्णता और उर्जा के संयोजन से स्टर्लिंग इंजन का विकास किया है। ये माईक्रो CHP इकाई, केन्द्रीय उष्ण वाष्पित्र में गैस को भरता है और न इस्तेमाल की गई ऊर्जा को फिर से विद्युत ग्रिड में भेज देता है। व्हिस्परजेन ने 2004 में यह घोषित किया कि वे 80,000 इकाइयों का उत्पादन [[संयुक्त राजशाही (ब्रिटेन)|ब्रिटेन]] के घरेलू बाजार के लिए करेंगे। एक बीस इकाइयों का परीक्षण 2006 में शुरू हुआ।<ref name="claverton-energy1">{{cite web |author=by: admin |url=http://www.claverton-energy.com/what-is-microgeneration.html |title=What is Microgeneration? And what is the most cost effective in terms of CO2 reduction | Claverton Group |publisher=Claverton-energy.com |date=6 नवंबर 2008 |accessdate=24 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150711112424/http://www.claverton-energy.com/what-is-microgeneration.html |archive-date=11 जुलाई 2015 |url-status=dead }}</ref> === सौर ऊर्जा उत्पादन === परवलय आईने की किरणों को अगर स्टर्लिंग इंजन पर केंद्रित कर दिया जाये तो सौर उर्जा को वह विद्युत में बदल सकता है जो कि गैर-संकेंद्रित चित्रवैद्युत बैटरी से उपयोगी तथा संकेंद्रित चित्र विद्युत के समान होगा। अगस्त 11, 2005, सदर्न कैलिफोर्निया एडिसन ने 30,000 से अधिक सौर ऊर्जा चालित स्टर्लिंग इंजन के प्रयोग से उत्पन्न विद्युत् को खरीदने के लिए स्टर्लिंग एनर्जी सिस्टम्स के साथ करार करने की घोषणा की<ref>शुद्ध ऊर्जा प्रणाली (2005)</ref> जो कि बीस साल की समयावधि में होगा जो 850 MW बिजली को पैदा करने के लिए काफी है। ये सिस्टम 8000 एकड़ (19 km<sup>2</sup>) के सौर खेत में आइनों का निर्देशन सूर्य की किरणों को इंजनों पर सान्द्रित करने के लिए करेंगे जो की जेनरेटर को चलायेंगे. इस फ़ार्म पर निर्माण के 2010 में होने की सम्भावना है<ref name="tessera-projects">{{cite web |url=http://www.tesserasolar.com/international/projects.htm |title=Tessera Solar World-Scale Power Projects |publisher=Tessera Solar |accessdate=21 जनवरी 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100128051604/http://www.tesserasolar.com/international/projects.htm |archive-date=28 जनवरी 2010 |url-status=dead }}</ref>, हालांकि परियोजना को लेकर विवाद है<ref name="greeninc-calico">{{cite news |url=http://greeninc.blogs.nytimes.com/2009/08/05/battle-brewing-over-giant-desert-solar-farm/ |title=Battle Brewing Over Giant Desert Solar Farm |publisher=New York Times |date=5 अगस्त 2009 |accessdate=21 जनवरी 2010 |first=Todd |last=Woody |archive-url=https://web.archive.org/web/20090813203624/http://greeninc.blogs.nytimes.com/2009/08/05/battle-brewing-over-giant-desert-solar-farm/ |archive-date=13 अगस्त 2009 |url-status=dead }}</ref> क्योंकि इस स्थान में रहने वाले जीव-जन्तुओं पर ऐसे पर्यावरण के प्रभाव को लेकर चिंता है। === स्टर्लिंग क्रायोकूलर === कोई भी स्टर्लिंग इंजन प्रतिलोम में गर्मी के पम्प के रूप में भी काम करता है; जब गति को शैफ्ट पर प्रयुक्त किया जाता है तब जलाशयों के बीच तापमान का अंतर आता है। स्टर्लिंग क्रायोकूलर के सभी महत्वपूर्ण अवयव स्टर्लिंग इंजन के समरूप ही होते हैं। इंजन और ताप पम्प, दोनों में ही ताप, फैलाव के स्थान से दबाव के स्थान की ओर प्रवाहित होता है, फिर भी निगतन की आवश्यकता थर्मल अनुपात के विपरीत गर्मी को प्रवाहित करने के लिए पड़ती है, विशेषकर तब, जब दबाव का स्थान, फैलाव के स्थान से अधिक गर्म होता है। फैलाव के भाग के बाह्य कोने को थर्मल रोधी कक्ष के अंदर रखा जा सकता है, जैसे कि उष्णीय फ्लास्क. प्रभावस्वरूप गर्मी को इस कक्ष से क्रायोकूलर के क्रियाशील गैस द्वारा दबाव के स्थान में पम्प किया जाता है। दबाव का स्थान आसपास के तापमान से ऊपर होगा ऐसे में गर्मी पर्यावरण में प्रवाहित हो जायेगी. उनके आधुनिक उपयोगों में से एक क्रायोजेनिक्स में है और एक सीमा तक शीतलक में. आदर्श शीतलक तापमान में, स्टर्लिंग कूलर सामान्य तौर पर मुख्यधारा के रेनकिन कूलरों के मुकाबले लागत को लेकर कम प्रतिस्पर्द्धात्मक होते हैं, क्योंकि ऊर्जा का कम इस्तेमाल करते हैं। फिर भी 40° से −30 °C से कम तापमान में रेनकिन के शीतलक प्रभावी नहीं होते क्योंकि कोई अनुकूल शीतलक इस क्वथनांक के साथ इस न्यूनतम तापमान के लिए उपयुक्त नहीं हैं। स्टर्लिंग क्राईकूलर −200 °C (73 K) तक नीचे की गर्मी को उठा सकते हैं, जो कि वायु (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और अर्गोन) को तरल बनाने के लिए काफी हैं। विशेष बनावट के आधार पर ये 40–60 K तक नीचे भी जा सकते हैं। क्रायोकूलर्स इस मामले में अन्य क्रायोकूलर तकनीक से अधिक प्रतिस्पर्द्धात्मक हैं। क्रायोजेनिक तापमान पर प्रदर्शन का गुणांक आदर्श रूप में 0.04–0.05 है (4–5% दक्षता के अनुकूल)। अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि ये यन्त्र पंक्तिबद्ध प्रवृत्ति में हैं, {{nowrap|[[coefficient of performance|COP]] {{=}} 0.0015 × ''T''<sub>c</sub> – 0.065}} जहां पर ''T'' <sub>c</sub> क्रायोजेनिक तापमान है। इस तापमान में ठोस वस्तुओं का विनिर्दिष्ट ताप के लिए न्यूनतम मान होता है, ताकि रीजेनरेटर को अनेपक्षित वस्तुओं से बनाया जा सके जैसे कि कपास. {{Citation needed|date= जनवरी 2010}} पहले स्टर्लिंग क्रिया क्रायोकूलर का निर्माण 1950 के दशक में फिलिप द्वारा किया गया तथा उसका वाणिज्यीकरण तरल वायु उत्पाद के संयंत्रों वाली जगहों पर किया गया। फिलिप्स क्रायोजेनिक व्यवसाय तब तक चलता रहा तब तक 1990 में स्टर्लिंग तुषार-जानिक BV, नीदरलैंड में वह विभाजित नहीं हो गया। यह कंपनी आज भी स्टर्लिंग क्रायोकूलर्स और क्रायोजेनिक शीतलक सिस्टमों के विकास और निर्माण में सक्रीय है। छोटे आकार के बहु-विविध स्टर्लिंग क्रायोकूलर्स व्यावसायिक रूप में उपलब्ध हैं जैसे कि विद्युत संवेदक को ठंडा करने हेतु या कभी-कभी छोटे संगणक को ठंडा करने के लिए। इस अनुप्रयोग के लिए, स्टर्लिंग क्रायोकूलर्स, उपलब्ध होने वाली सबसे उच्च प्रदर्शन तकनीक है, क्योंकि वे न्यून तापमान में भी ताप उपयोगिता को उठा लेने में सक्षम हैं। वे आवाज नहीं करते, कम्पन-मुक्त होते हैं, छोटे आकारों में उन्हें प्रवर्धित किया जा सकता है और कम लागत के होते हैं। 2009 तक केवल क्रायोकूलर्स को ही व्यवसायिक रूप से स्टर्लिंग यंत्र माना गया है। {{Citation needed|date=सितम्बर 2009}} === ताप पंप === एक स्टर्लिंग ताप पंप स्टर्लिंग क्रायोकूलर के बहुत समान है, मुख्य अंतर यह है कि यह कमरे के तापमान में काम करता है और आज तक उसका प्रधान अनुप्रयोग बिल्डिंग के बाहर की गर्मी को अंदर पम्प करना होता है, नतीजतन सस्ते रूप में उसे गर्म करता है। किसी भी स्टर्लिंग यंत्र की तरह, ताप फैलाव के स्थान से दबाव के स्थान की ओर प्रवाहित होता है, फिर भी स्टर्लिंग इंजन की पृथकता में फैलाव का स्थान दबाव के स्थान के मुकाबले न्यून तापमान में होता है, ऐसे में कार्य के उत्पाद की जगह यांत्रिक क्रिया को सिस्टम में निगत करने की आवश्यकता पड़ती है (ताकि उष्णता सम्बन्धी दूसरे नियम को संतुष्ट किया जा सके)। जब ताप पम्प के लिए दूसरे इंजन द्वारा यांत्रिक क्रिया को प्रदान किया जाता है तब उसे "उष्णता संचालित गर्मी के पंप" का जाता है। ताप पम्प का फैला हिस्सा, ताप स्रोत के साथ ताप आधार पर संयोजित होता है, जो कि अक्सर बाह्य पर्यावरण ही होता है। स्टर्लिंग यंत्र का संपीड़न हिस्सा गर्म होने के लिए पर्यावरण में रखा जाता है, उदहारण के लिए एक बिल्डिंग में और उसमें ताप को "पम्प" किया जाता है। आदर्श रूप में दोनों कोनों के बीच एक उष्णता रोधी होगा जिससे रोधन क्षेत्र में तापमान वृद्धि होगी। ताप पम्प अब तक के सबसे अधिक उर्जा बचत वाले ताप प्रणाली हैं। परंपरागत ताप पम्पों के मुकाबले स्टर्लिंग ताप पम्पों की सह-उपयोगिता ऊंची होती है। आज भी इन प्रणालियों का सीमित वाणिज्यिक प्रयोग होता है; फिर भी इनका प्रयोग बाजार द्वारा ऊर्जा बचत की मांग के मद्देनज़र बढ़ने की संभावना है और इन्हें द्रुत गति से तकनिकी संशोधन के आधार पर अपनाया जायेगा. === जलीय इंजन === स्वीडन के जहाज निर्माता कोकम्स ने 1980 के दशक के उत्तरार्ध में सफलतापूर्वक 8 स्टर्लिंग चालित पनडुब्बियों का निर्माण किया। डूबे रहने के वक्त भी वे संपीड़ित ऑक्सीजन का इस्तेमाल ईंधन को जलाने के लिए करते हैं जो स्टर्लिंग इंजन को गर्मी प्रदान करता है। इनका प्रयोग गोटलैंड और सोडरमैनलैंड श्रेणियों की पनडुब्बियों में हो रहा है। ये विश्व में पहले पनडुब्बी हैं जो स्टर्लिंग इंजन के वायु-स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली की विशिष्टता रखते हैं जो कि उनके जल के अंदर की सहनशीलता को कुछ दिनों से बढ़ाकर दो हफ्ते कर देती है।<ref>{{cite web | author = | title = The Kockums Stirling AIP system - proven in operational service | publisher = Kockums | url = http://www.kockums.se/submarines/aipstirling.html | accessdate = 12 नवंबर 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20010411010849/http://www.kockums.se/Submarines/aipstirling.html | archive-date = 11 अप्रैल 2001 | url-status = dead }}</ref> यह क्षमता पहले सिर्फ [[पनडुब्बी|परमाणु आधारित पनडुब्बियों]] में ही थी। एक सदृश सिस्टम जापान के Sōryū श्रेणी के पनडुब्बियों को भी पोषित करती है।<ref>{{Cite web |url=http://www.janes.com/news/defence/naval/jni/jni071206_1_n.shtml |title=संग्रहीत प्रति |access-date=19 अगस्त 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080511172305/http://www.janes.com/news/defence/naval/jni/jni071206_1_n.shtml |archive-date=11 मई 2008 |url-status=live }}</ref> === परमाणु ऊर्जा === विद्युत शक्ति के उत्पादन के संयंत्रों में परमाणु-शक्ति से पुष्ट स्टर्लिंग इंजनों की बहुत संभावना है। वाष्पीय टर्बाईन को अगर परमाणु-शक्ति के संयंत्रों से बदल दिया जाये तो यह संयंत्र को आसान बना देगा, ज्यादा किफायती होगा और रेडियोधर्मी के उपोत्पाद को कम कर देगा। कई प्रजनक परमाणु-भट्टियों का डिजाइन इस प्रकार का है कि वे तरल सोडियम का प्रयोग करते हैं। अगर गर्मी को वाष्पीय संयंत्र में डालना हो तो एक जल/सोडियम के ऊष्मा संयंत्र की आवशयकता पड़ती है, ऐसे में चिंता उठ खड़ी होती है क्योंकि जल और सोडियम उग्र रूप में प्रतिक्रियात्मक होते हैं। स्टर्लिंग इंजन, क्रिया में कहीं भी जल के प्रयोग की बात को दरकिनार कर देता है। संयुक्त राज्य की सरकारी प्रयोगशालाओं ने आधुनिक स्टर्लिंग इंजनों का निर्माण अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए किया है जिन्हें स्टर्लिंग रेडियोआईसोटॉप जेनरेटर कहा जाता है। इनकी बनावट गहन अन्तरिक्षीय अन्वेषण के लिए विद्युत् निर्माण करना है जो कि दशकों तक चलेंगे. चालित हिस्सों को कम करने के लिए इंजन एक एकल डिसप्लेसर का इस्तेमाल करता है तथा उर्जो को स्थानांतरित करने के लिए उत्तम दर्जे के ध्वनि यंत्र का प्रयोग करता है। ताप स्रोत निष्पंद सूखा परमाणु ईंधन होता है और गर्मी का ताप सिंक स्वयं स्थान होता है। === मोटरगाड़ियों के इंजन === यह ज्यादातर मान लिया जाता है कि स्टर्लिंग इंजन ऑटोमोटिव अनुप्रयोगों में बहुत कम उर्जा/भार परिमाण, बहुत लागत वाला और बहुत देर में शुरू होने वाला होता है। इसके ताप संयंत्र जटिल तथा महंगे भी होते हैं। एक स्टर्लिंग कूलर के लिए ओट्टो इंजन या डीजल इंजन रेडियेटर से दुगुना ताप निष्पादन करना आवश्यक है। हीटर को आवश्यक रूप से स्टेनलेस स्टील, असाधारण मिश्रधातु, या सेरामिक का बना होना चाहिए जो कि ऊंचे उर्जा घनत्व की आवश्यकता के लिए उच्च तापमान का समर्थन कर सके और हाइड्रोजन गैस को भी ग्रहण कर सके जिनका इस्तेमाल ऑटोमोटिव स्टर्लिंग इंजनों में शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। मुख्य दिक्कतें जो स्टर्लिंग इंजन के ऑटोमोटिव अनुप्रयोग में आती हैं वे हैं शुरू होने का समय, त्वरता की प्रक्रिया, बंद होने का समय और भार, जिनके पहले से ही बनाये समाधान नहीं हैं। फिर भी हल ही में एक संशोधित स्टर्लिंग इंजन का निर्माण किया गया है जिसे आधिकारिक साइडवॉल दहन कक्ष वाले अंतर-दहन के इंजन की अवधारणा (U.S. अधिकृत 7,387,093) से लिया गया है तथा जो यह वादा करता है कि स्टर्लिंग इंजन के स्वाभाविक ऊर्जा घनत्व की कमी तथा विनिर्दिष्ट शक्ति की समस्याओं के साथ ही साथ मंद त्वरता की प्रतिक्रिया की समस्या पर काबू पा लेगा। <ref>जे हस्सी (2008)</ref> फिर भी यह संभव है कि इन सह-निर्मित सिस्टम में इनका इस्तेमाल किया जायेगा जो कि पारंपरिक पिस्टन और गैस टर्बाईन से बची हुई गर्मी का इस्तेमाल सहायकों को शक्ति देने या फिर टर्बो-संयुक्त सिस्टम के रूप में करेगा जो कि क्रैंकशैफ्ट को शक्ति और टोर्क प्रदान कर सकेगा. अनन्य रूप से स्टर्लिंग इंजन द्वारा चालित कम से कम दो मोटर-गाड़ियों का निर्माण [[नासा|NASA]] द्वारा किया गया है, साथ ही साथ फिलिप्स [https://web.archive.org/web/20101015035342/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,904117,00.html ] और अमेरिकन मोटर कार्पोरेशन द्वारा प्रदत्त इंजनों का इस्तमाल फोर्ड मोटर कंपनी द्वारा इससे पूर्व की परियोजनाओं में किया गया। NASA की गाडियों को ठेकेदारों द्वारा निर्मित किया गया तथा MOD I एवं MOD II के रूप में प्राधिकृत किया गया। MOD II ने 1985 में 4 दरवाजे वाले शेवरोलेट सेलेब्रेटी नॉचबुक के सामान्य चिंगारी से जलने वाले इंजन को बदल दिया। 1986 में MOD II डिज़ाइन विवरण (परिशिष्ट A) में परिणाम दिखाते हैं कि वाहन के औसत भार को बिना बढ़ाए, राजमार्ग की माईलेज 40 से 58 mpg (माईल प्रति गैलन) तथा शहरी माईलेज 26 से 33 माईल प्रति गैलन बढ़ाया गया है। NASA के वाहन में शुरूआती समय 30 सेकण्ड तक बढ़ गया, {{Citation needed|date= जनवरी 2008}} जबकि फोर्ड के शोध के वाहन ने अन्दरूनी बिजली के हीटर का प्रयोग किया, जिसने केवल कुछ सेकंडों में ही उसे शुरू किया। === विद्युत वाहन === मिश्रित विद्युत चालित सिस्टम के एक भाग के रूप में स्टर्लिंग इंजन गैर-मिश्रित स्टर्लिंग मोटरगाड़ी की बनावट की चुनौतियों या दिक्कतों को पार कर देगा। नबम्बर 2007 में स्वीडन में प्रेसर परियोजना द्वारा ठोस जैव-ईंधन और स्टर्लिंग इंजन का इस्तेमाल करने वाली एक मिश्रित कार के निर्माण की घोषणा की गई।<ref>प्रेसर समूह (a)</ref> मेनचेस्टर यूनियन लीडर खबर दी कि डीन कामेन ने फोर्ड थिंक का इस्तेमाल करते हुए प्लग-इन हाइब्रिड कारों की एक श्रृंखला विकसित की है।<ref name="Wickham2008">एस. के. विक्हम (2008)</ref> DEKA, मेनचेस्टर मिलियार्ड में कामेन की तकनीक कम्पनी ने हाल ही में एक विद्युत् कार, DEKA रिवोल्ट प्रदर्शित की है, जो लिथियम बैटरी के एक ही चार्ज में लगभग<ref name="Wickham2008" /> चल सकती है। === वायुयान इंजन === अगर ऊंचे उर्जा घनत्व और कम लागत को पाया जा सके तो स्टर्लिंग इंजन सम्भवतः वायुयान इंजनों की तरह परिकल्पित वादे को बनाये रख सकता है। ये कम आवाज करते हैं, कम प्रदूषण करते हैं, ऊंचाई के साथ न्यून परिवेशीय तापमान की वजह से इनकी उपयोगिता बढ़ जाती है, कम पुर्जों की वजह से ज्यादा विश्वसनीय हैं और ज्वलनशील सिस्टम के आभाव में बहुत कम कम्पन पैदा करते हैं (एयरफ्रेम ज्यादा दिन चलते हैं), सुरक्षित होते हैं और इनमें कम विस्फोटक ईन्धनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर भी स्टर्लिंग इंजन, ओटो इंजन तथा ब्रेटोन चक्र गैस टरबाईन के मुकाबले कम ऊर्जा घनत्व धारण किये होता है। यह मुद्दा मोटरगाड़ियों में विवाद का करण बना रहा है, यह प्रदर्शन वायुयान इंजन के मामले में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। === न्यून तापमान भिन्नता वाले इंजन === [[चित्र:MM-7 Stirling Engine.jpg|thumb|एक कम तापमान अंतर के स्टर्लिंग इंजन को यहां दिखाया गया है जो कि एक गर्म पक्ष के ताप पर चल रहा है]] एक न्यून तापमान भिन्नता वाले (न्यून डेल्टा T, or LTD) स्टर्लिंग इंजन किसी भी तापमान में चल सकते हैं, उदहारण के लिए हाथ के हथेली की गर्मी या कमरे की गर्मी, या कमरे की गरमी या बर्फ के टुकड़े की गर्मी में चल सकते हैं। 1990 में केवल 0.5 K का विवरण प्राप्त हुआ था। देखें<ref>{{Cite web |url=http://www.animatedengines.com/ltdstirling.shtml |title=संग्रहीत प्रति |access-date=19 अगस्त 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100922072540/http://animatedengines.com/ltdstirling.shtml |archive-date=22 सितंबर 2010 |url-status=dead }}</ref> जो इस प्रकार के एनिमेटेड चित्रण को भी दिखाता है। ज्यादातर इनकी बनावट, सरलता के लिए बगैर रीजेनरेटर के युग्मक विन्यास में होती है, हालांकि कुछ विस्थापकों में झिर्रियां होती हैं जो आदर्श रूप में केन से बनी होती है ताकि थोड़ा बहुत पुनः निर्माण हो सके। ये आदर्श रूप से दबावहीन होते हैं और पर्यावरण के समीप 1 के दबाव में चलते हैं। उत्पन्न ऊर्जा 1 W से कम होती है और इनका प्रयोग केवल प्रदर्शन हेतु ही किया जाता है। इन्हें खिलौनों और शिक्षण नमूनों के रूप में बेचा जाता है। विशाल (आदर्श रूप में 1 m गज) न्यून तापमान इंजनों को न्यून अथवा बिना आवर्धन के, सूर्य किरणों का सीधे इस्तेमाल करते हुए पानी पम्प करने के लिए निर्मित किया जाता है।<ref>{{Cite web |url=http://www.bsrsolar.com/core1-1.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=19 अगस्त 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110708102025/http://www.bsrsolar.com/core1-1.php |archive-date=8 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref>
सारांश:
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