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== प्रमुख कृतियाँ == प्रतिभा-सम्पन्न लेखिका और स्वतंत्र विचारक होने के नाते श्रीमती एनी बेसेन्ट ने थियोसॉफी ([[ब्रह्मविद्या]]) पर करीब २२० पुस्तकों व लेखों की बाढ़ लगा दी थी। 'अजैक्स' उपनाम से भी उनकी लेखनी चली थी। पूर्व-थियोसॉफिकल पुस्तकों एवं लेखों की संख्या लगभग १०५ है। १८९३ में उन्होंने अपनी आत्मकथा प्रकाशित की थी। उनकी जीवनीपरक कृतियों की संख्या ६ है। उन्होंने केवल एक साल के अन्दर १८९५ में सोलह पुस्तकें और अनेक पैम्प्लेट प्रकाशित किये जो ९०० पृष्ठों से भी अधिक थे। एनी बेसेन्ट ने [[भगवद्गीता]] का अंग्रेजी-अनुवाद किया तथा अन्य कृतियों के लिए प्रस्तावनाएँ भी लिखीं। उनके द्वारा क्वीन्स हॉल में दिये गये व्याख्यानों की संख्या प्राय: २० होगी। भारतीय संस्कृति, शिक्षा व सामाजिक सुधारों पर संभवतः ४८ ग्रंथों और पैम्प्लेटों की उन्होंने रचना की। भारतीय राजनीति पर करीबन ७७ पुष्प खिले। उनकी मौलिक कृतियों से चयनित लगभग २८ ग्रंथों का प्रणयन हुआ। समय-समय पर 'लूसिफेर', 'द कामनवील' व 'न्यू इंडिया' के संपादन भी एनी बेसेन्ट ने किये। उनके प्रसिद्ध ग्रंथ निम्नलिखित हैं : [[चित्र:Annie Besant 1895.gif|225px|right| सन १८९५ में एनी बेसेन्ट]] :(१) डेथ-ऐण्ड आफ्टर (थियोसॉफिकल मैन्युअल III) - १८९३ :(२) आत्मकथा - १८९३ :(३) इन द आउटर कोर्ट - १८९५ :(४) कर्म (थियोसॉफिकल मैन्युअल IV) - १८९५ - कर्म-व्यवस्था का सुन्दर चित्रण। :(५) द सेल्फ ऐण्ड इट्स शीथ्स - १८९५ :(६) मैन ऐण्ड हिज बौडीज (थियोसॉफिकल मैन्युअल VII) - १८९६ :(७) द पाथ ऑफ डिसाइपिल्शिप - १८९६ - मुमुक्ष का मार्ग। :(८) द ऐंश्यिएण्ट विज्डम - १८९७ :(९) फोर ग्रेट रेलिजन्स - १८९७ - धर्म पर प्रसिद्ध पुस्तक - कालान्तर में चार भागों में प्रकाशित - हिन्दूइज्म, जोरैस्ट्रियनिज्म, बुद्धिज्म, क्रिश्चियैनिटी। :(१०) एवोल्यूशन ऑफ लाइफ एण्ड फॉर्म - १८९९ :(११) सम प्रॉब्लम्स ऑफ लाइफ - १९०० :(१२) थॉट पावर : इट्स कण्ट्रोल ऐण्ड कल्चर - १९०१ :(१३) रेलिजस प्रॉब्लम् इन इण्डिया - १९०२ - यह उनकी एक महान साहित्यिक कृति थी जो कालान्तर में चार भागों - इस्लाम, जैनिज्म, सिक्खिज्म, थियोसॉफी - में प्रकाशित हुई। :(१३) रेलिजस प्रॉब्लम् इन इण्डिया - १९०२ - यह उनकी एक महान साहित्यिक कृति थी जो कालान्तर में चार भागों - इस्लाम, जैनिज्म, सिक्खिज्म, थियोसॉफी - में प्रकाशित हुई। :(१४) द पेडिग्री ऑफ मैन - १९०४ :(१५) ए स्टडी इन कौंसेस्नेस - १९०४ :(१६) ए स्टडी इन कर्मा - १९१२ - कर्म-सिद्धान्त पर प्रणीत। :(१७) वेक अप, इण्डिया : ए प्ली फॉर सोशल रिफॉर्म - १९१३ :(१८) इण्डिया ऐण्ड ए एम्पायर - १९१४ :(१९) फॉर इण्डियाज अपलिफ्ट - १९१४ :(२०) द कॉमनवील - १९१४ की जुलाई से निकालना शुरू किया (प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्र) :(२१) न्यू इण्डिया - १९१५ - मद्रास (चेन्नई) से निकलने वाला दैनिक पत्र। :(२२) हाऊ इण्डिया रौट् फॉर फ्रीडम - १९१५ - यह प्रसिद्ध ग्रंथ आफिशियल रिकार्डों के आधार पर रचित राष्ट्रीय कांग्रेस की कहानी है। :(२३) इण्डिया : ए नेशन - १९१५ - द पीपुल्स बुक्स सिरीज की इस पुस्तक को १९१६ में अंग्रेज सरकार ने जब्त कर लिया और एनी बेसेन्ट को अलगे वर्ष नजरबन्द कर दिया गया। :(२४) कांग्रेस स्पीचेज - १९१७ :(२५) द बर्थ ऑफ न्यू इण्डिया - १९१७ - यह पुस्तक फॉर इण्डियाज अपलिफ्ट - १९१४, से मिलती जुलती है। :(२६) लेटर्स टू ए यंग इण्डियन प्रिन्स - १९२१ - इस ग्रंथ में छोटे-छोटे देशी राज्यों को आधुनिक तरीकों से पुनर्गणित करने की संस्तुति की गयी है। :(२७) द फ्यूचर ऑफ इण्डियन पॉलिटक्स - १९२२ - इसकी उपादेयता तत्कालीन समस्याओं को समझने के लिए रही है। :(२८) ब्रह्म विद्या - १९२३ :(२९) इण्डियन आर्ट - १९२५ - भारतीय संस्कृति पर यह पुस्तक कलकत्ता विश्वविद्यालय में दिये गये कमला लेक्चर पर आधारित है। :(३०) इण्डिया : बौण्ड ऑर फ्री? - १९२६ - यह पुस्तक अद्भुत साहित्यिक और माननीय रुचि का एक निजी दस्तावेज है। साथ ही साथ भारतीय इतिहास की एक अपूर्व निधि है। इसमें भारत के भूत, वर्तमान और भविष्य का व्यवस्थित सर्वेक्षण किया गया है। [[चित्र:Annie Besant.001.jpg|right|thumb|300px|एनी बेसेन्ट, सन १९२२ में]] इस प्रकार कुल मिलाजुला कर करीबन ५०५ ग्रंथों व लेखों की मलिका डॉ॰ एनी बेसेन्ट ने 'हाऊ इण्डिया रौट् फॉर फ्रीडम' (१९१५) में भारत को अपनी मातृभूमि बतलाया है। 'इण्डिया : ए नेशन' नामक जो पुस्तक जब्त कर ली गयी थी उसमें उन्होंने स्वायत्त-शासन की विचार धारा प्रतिपादित की है। १९१७ में नजरबन्द किये जाने से पहले सत्तर वर्षीय वृद्धा ने अपने भारत के भाइयों और बहनों को आखिरी सन्देश दिया था : ''मैं वृद्धा हूँ, किन्तु मुझे विश्वास है कि मरने के पहले ही मैं देखूंगी कि भारत को स्वायत्त-शासन मिल गया।''
सारांश:
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