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== क्रिस्टलों के सामान्य लक्षण == क्रिस्टल चारों ओर से सतहों से घिरा होता है। इन सतहों को फलक (Faces) कहते हैं। फलक साधारणत: समतल और चिकने होते हैं। फलक एक ही प्ररूप (type) या भिन्न भिन्न प्ररूप के हो सकते हैं। यदि सब फलक एक तरह के होते हैं तथा समान रूप से विकसित होते हैं तब उनकी ज्यामितीय आकृतियाँ समान होती हैं। लेकिन इन्हीं एक किस्म के फलकों की आकृति भिन्न हो जाती है, यदि वे दूसरी किस्म के फलकों के संयोजन में प्राप्त होते हैं। एक ही प्ररूप के सभी फलक एक क्रिस्टल रूप (form) के सदस्य होते हैं। यह रूप उन फलकों का जोड़ है जिनकी उपस्थिति उस स्थिति में क्रिस्टल सममिति के लिये आवश्यक होती है जब कि उनमें से कोई एक उपस्थित हो। इन फलकों की संख्या उस क्रिस्टल सममिति के ऊपर निर्भर करती है। दो संलग्न को मिलानेवाली रेखा को क्रिस्टल का कोर (Crystal edge) कहते हैं। वह कोना जहाँ तीन या अधिक फलक मिलते हैं कोनिया (Coign), जिसे बहुत से लेखक घन कोण कहते हैं, कहलाता है। बहुफलक के समान क्रिस्टल में भी फलक संख्या और कोनिया की संख्या का जोड़ कोर की संख्या और दो के जोड़ के बराबर हो जाता है। क्रिस्टलकी में दो फलकों पर खींचे गए अंतराफलक अभिलंबों के बीच के कोण को अंत:फलक कोण (Interfacial angle) कहते हैं। यह बात ध्यान में रखने की है कि यह कोण फलकों के बीच के वास्तविक कोण का पूरक (supplement) है। यह विशेष प्रकार का अंतराफलक कोण, कोण मापने की विधि के अनुरूप है। यह एक ओर गणितीय परिकलन (को कोणों के माप के आधार पर निर्भर है) और दूसरी ओर क्रिस्टल के फलकों के त्रिविम निरूपण और तदनंतर गोलीय त्रिकोणमिति द्वारा परिकलन के भी अनुकूल है। अपेक्षाकृत बड़े क्रिस्टलों का अंतराफलक कोण मापने के लिये संस्पर्श क्रिस्टल कोणमापी, जिसे 1870 ई. में कारनग्यो (Carangeot) ने बनाया था, उपयोग में लाया जाता है। क्रिस्टल में बहुत से फलक इस प्रकार व्यवस्थित हो सकते हैं कि उनकी सतह, जहाँ पर कि संलग्न जोड़े मिलते हैं, समांतर हों। ऐसे फलकों के समुदाय को मंडल (zone) कहते हैं। वह काल्पनिक रेखा, जो क्रिस्टल के केंद्र से होकर गुजरती है तथा जो कोरों के समांतर होती है, मंडल अक्ष (zone axis) कहलाती है और वह समतल, जिसमें मंडल के सभी फलकों के अभिलंब पड़ते हैं, मंडलतल (zone pkane) कहलाता है। फलक एक या अनेक रूप (forms) के हो सकते हैं।
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