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=== हेलेनिकोत्तर काल === रोम द्वारा यूनान पर विजय के बाद का, अर्थात् ग्रेको-रोमन साहित्य गद्य में इतिहास और आलोचना शास्त्र की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण है। रोम के ईसाई धर्म में दीक्षित होने के बाद प्रकृतिपूजक ग्रीस के साहित्य और संस्कृति को बहुत चोट पहुंची। फिर इस युग में [[प्लूतार्क]] और [[लूसियन]] जैसे इतिहासकार और [[दियोनीसियस]] तथा [[लाजिनस]] जैसे आलोचनाशात्री हुए। प्राचीन रोमन या लातीनी साहित्य प्रसार और समृद्धि दोनों ही दृष्टियों से प्राचीन ग्रीक साहित्य से घटकर है। इसके भी तीन विभाजन किए जाते हैं : * (१) रिपब्लिक या गणतंत्र युग (२५०-२७ ई. पू.), * (२) आगस्तस युग (२७ ई. पू.- १४ ई.), * (३) साम्राज्य युग (१४ ई.-५२४ ई.)। 1. '''रिपब्लिक युग''' में प्रहसन, नाटक गद्य कविता के क्षेत्र में विशेष कार्य हुआ। प्रहसन में माक्कियस प्लातस, स्तातियस और तेरेंस या तेरेंतियस आफ़ेर, गद्य में वारे और प्रसिद्ध वक्ता तथा राजनीतिज्ञ सिसरो और कविता में लुक्रिशियस तथा कातुलस इस युग के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। इन सभी लेखकों की विष्यवस्तु रोम के जीवन से संबद्ध थी, लेकिन इनकी रचनाओं के रूप पर प्राचीन ग्रीक साहित्य का गहरा असर है। 2. '''आगस्तस काल''' [[लातीनी साहित्य]] का स्वर्णयुग माना जाता है। इसके साथ लातीनी कविता के सबसे महान कवि वर्जिल का नाम जुड़ा हुआ है। गड़ेरिया जीवन संबंधी दस कविताओं, एक्लोग्ज़ और ग्रीक योद्धा इस के जीवन पर आधारित महाकाव्य, ज्योर्जिक्स के लिये प्रसिद्ध है। उसके साहित्य में ग्रीक और रोमन सांस्कृतिक परंपराओं, रोमन साम्राज्य के तत्कालीन गौरव और एक महान यूरोपीय सभ्यता के उदय के स्वप्न की अत्यंत प्रौढ़, परिमार्जित और समन्वित अभिव्यक्ति है। उसके दृष्टिकोण की सार्वभैम व्यापकता और उदारता और उसकी कविता में ग्रीक और लातीनी कविता की रूपगत शालीनता और सौंदर्य के चरमोत्कर्ष का उल्लेख करते हुए टी. एस. ईलियट ने कहा है : ‘हमारा कलासिक, समसत यूरोप का क्लासिक, वर्जिल है’। इस युग के दो अन्य विख्यात कवियों में [[होरेस]] और [[ओविद]] हैं। पहला अपनी व्यंग्य और कटाक्षपूर्ण रचनाओं और कसीदों (ओडों) के लिये और दूसरा प्रणयकविताओं और मरसियों के लिये प्रसिद्ध है। लिवियस या लिवी इस यु ग का प्रसिद्ध इतिहासकार है। उसने रोम का इतिहास लिखा। 3. '''साम्राज्यकाल''' के दो उपविभाजन किए जाते हैं: * (अ) रजत काल (१४ ई.-११७ ई.), * (ब) ईसाई काल (११७ ई.-५२४ ई.)। रजतकान के प्रसिद्ध साहित्यकारों में सेनेका ने ग्रीक परंपरा में त्राजेदी, ल्यूकन ने महाकाव्य, फ्लाकस और जुवेनाल व्यंग्य और कटाक्ष, प्लिनी ने इतिहास, क्विंतिलियन ने साहित्यालाचन और इतिहास तथा तासितस ने जीवनचरित, इतिहास, साहित्यिक आलोचना इत्यादि की रचना से लातीनी साहित्य को समृद्ध किया। विद्वानों के मतानुसार वास्तव में रजतयुग के साथ लातीनी साहित्य के क्लासिकल युग की अंत हो जाता है, क्योंकि इसके बादवाले लातीनी साहित्य में भाषा और भाव की शालीनता का उत्तरोत्तर क्षय होता गया। दूसरी सदी के बाद लातीनी साहित्य पर ईसाई धर्म की प्रभुता स्थापित हो गई। इस साहित्य में प्राचीन ग्रीक और लातीनी मूर्ति और प्रकृतिपूजक परंपरा और ईसाई धर्म की मान्यताओं के बीच तीव्र द्वंद्व की अभिवयक्ति हुई। इस युग के उल्लेखनीय साहित्यकारों में तरतूलियन, मिनूसियस फ़लिक्स, लाक्तांतियस, संत जेरोम, संत आगुस्तिन, बोएथियम, कासियादोरस, संत बेनेदिक्त, ग्रेगरी महान्, संत इसीदार आदि हैं। ईसा की छठी सदी से लेकर पूरे मध्य युग तक लातीनी साहित्य की रचना होती रही। चर्च का सारा कार्य लातीनी में होता ही था, इसके अतिरिक्त लौकिक साहित्य, दर्शन और शिक्षा के क्षेत्र में भी इस भाषा का प्रमुख स्थान था। इस लंबे काल के रचनाकारों में कुछ प्रसिद्ध नाम ये हैं: कोलंबानस (५४३-६१५), बीड (६७३-७३५), अल्कुइन (७३५-८०४), संत बर्नार्ड (१०९०-११५३), संत तोमस अक्विनस (१२२४-७४), [[दांते एलीगियरी|दांते]] (१२६५-१३२१)। इस युग में लातीनी की महत्वपूर्ण भूमिका का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि इसके साहित्यकार ने केवल इटली या रोम के थे, बल्कि आयलैंड, इंग्लैंड और पश्चिमी यूरोप के अनेक देशों के भी थे।
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