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== लेखन और प्रकाशन == ''गोविन्द चन्द्र पाण्डेय'' द्वारा लिखे गये [[संस्कृति]], [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]], [[साहित्य]], [[इतिहास]]-विषयक अनेक आलोचनात्मक शोधग्रन्थ, काव्य-ग्रंथ और विविध शोधपूर्ण आलेख, भारत और विदेशों में सम्मानपूर्वक प्रकाशित हैं। आप द्वारा संस्कृत भाषा में रचित मौलिक एवं अनूदित तथा प्रकाशित प्रमुख ग्रन्थ ‘दर्शन विमर्श:’ 1996 वाराणसी, ‘सौन्दर्य दर्शन विमर्श:’ 1996 वाराणसी, ‘एकं सद्विप्राः बहुधा वदन्ति’ 1997 वाराणसी ‘न्यायबिन्दु’ 1975 [[सारनाथ]]/ [[जयपुर]], इसके अतिरिक्त संस्कृति एवं इतिहास विषयक पाँच ग्रन्थ और दर्शन विषय के आठ ग्रन्थों में ‘[[शंकराचार्य]]: विचार और सन्दर्भ‘ ग्रन्थ महनीय हैं। विविध साहित्यिक कृतियों में आप द्वारा विरचित आठ अन्य ग्रन्थ [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] वाड्मय को विभूषित कर रहे हैं। इन्होंने [[ऋग्वेद]] की अनेक कविताओं का सरस हिन्दी काव्यानुवाद भी किया था। इनके कृतित्व पर [[कलानाथ शास्त्री]] ने लिखा है-{उद्धरण} <ref name=RSA/> - " मार्च 2003 में दिल्ली में [[भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्]] ने उनके 80 वर्ष पूरे करने पर अभिनन्दनार्थ, जो विशाल विद्वत् संगोष्ठी रखी थी, उसमें विश्व भर के दार्शनिक, इतिहासविद्, संस्कृत-मनीषी, लेखक, कवि आदि उपस्थित थे। उनके सर्जनात्मक और विमर्शात्मक वैदुष्य के आयामों पर तीन दिन तक चर्चा हुई थी। उस संगोष्ठी में पढ़े गए शोध-लेख, ग्रंथाकार में भी निकले। हिन्दी में भी एक ग्रंथ उस संगोष्ठी के निष्कर्षों को शामिल कर निकाला गया, जिसका शीर्षक था ‘अव्यय : आचार्य गोविन्द चंद्र पाण्डे का सर्जनात्मक अवदान’ (संपादक: सत्यप्रकाश मिश्र)२००५: (ISBN 8188216356 | 9788188216352), किन्तु उसमें भी उन के कृतित्व का पूरा चित्र नहीं था, क्योंकि उसका फलक बहुत व्यापक है। उन्होंने [[प्राचीन इतिहास]], [[बौद्ध धर्म|बौद्ध संस्कृति]], [[वेद|वैदिक वाङ्मय]], [[मूल्य मीमांसा]], [[इतिहास दर्शन]], [[भारतीय दर्शन]], [[शंकराचार्य]], [[तुलनात्मक धर्म]], [[तुलनात्मक सौंदर्यशास्त्र]] आदि दस पन्द्रह विषयों पर पचास से भी अधिक जो पुस्तकें लिखी थीं, वे अंग्रेजी, हिन्दी और संस्कृत तीनों में थीं। अनुवाद अलग थे।" "[[दर्शनशास्त्र|दर्शन]], [[इतिहास]] और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के गहन ज्ञान ने इनसे जो ग्रंथ लिखवाए, उनमें गूढता, प्रौढता और संक्षेप में बात कहने की प्रवणता होना स्वाभाविक था। [[राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी|राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी]] से छपे इनके ग्रंथों में ‘मूल्य मीमांसा’ इन सभी लक्षणों को चरितार्थ करती है।" "[[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] और [[बुद्धकालीन भारत]] पर इनके ग्रंथ सर्वोत्कृष्ट माने जाते हैं। [[ज्योतिष]] पर भी उनका अधिकार था। बाद के दिनों में [[वेद]] [[साहित्य|वाङ्मय]] का सर्वांगीण विमर्श प्रस्तुत करने हेतु लिखा गया इनका ग्रंथ ‘[[वैदिक धर्म|वैदिक]] [[संस्कृति]]’ भी शिखर स्तर का ग्रंथ है। यह ग्रंथ जब लिखा जा रहा था, मैं इनके निकट संपर्क में था, क्योंकि इनका यह शौक सुप्रसिद्ध था कि [[इलाहाबाद]] में रहते हुए अपने जन्मदिन पर [[इलाहाबाद म्यूजियम]] में देश के शिखरस्थ मनीषियों की किसी न किसी विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी अवश्य ही आयोजित होती थी। मुझ जैसे अधकचरे को भी ये अवश्य बुलाते थे। मैंने इस ग्रंथ का शीर्षक सुझाया था ‘[[वैदिक धर्म|वैदिक]] [[साहित्य|वाङ्मय’]], पर उन्होंने ‘वैदिक [[संस्कृति]]’ नाम क्यों रखा, इसका औचित्य उन्होंने यह बताया कि इस में [[उपनिषद्]] [[साहित्य|वाङ्मय]] का भी पूरा विमर्श है। यह शीर्षक ही दोनों को समाहित कर सकता है। इन्होंने वहीं बताया था कि [[नेताजी]] [[सुभाष चन्द्र बोस]] के मित्र क्षेत्रेश बाबू से ये संस्कृत पढ़े थे और उनके सामने भी उनकी कक्षाएँ, उनके आदेश पर ये [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] माध्यम में ही पढ़ाते थे। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] पर इनका किस गहराई तक अधिकार था। आज शायद देश में चार-पाँच विद्वान् ही उस कद-काठी के बचे हों।" "प्रसिद्ध [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] कवियों की कविताओं का संस्कृत में अनुवाद ‘[[अस्ताचलीयम्]]’ और [[प्राकृत]] [[गाथा सप्तशती]] का [[हिन्दी]] के दोहों में अनुवाद ‘महिलाएँ’ शीर्षक से उन्होंने निकाला।" "[[तुलनात्मक धर्म]] पर [[सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय]] [[काशी]] में दिए इनके [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] [[स्मारक]] भाषण का ग्रंथाकार प्रकाशन हुआ है ‘एक सद् विप्रा बहुधा वदन्ति’ शीर्षक से। उसमें इन्होंने [[धर्म]] का जो विवेचन किया है, वह मानव के इतिहास में [[धर्म]] की अवधारणा से लेकर धर्म को सम्प्रदाय बना देने वाले पंथों की विवेचना तक समाहित किये हुए हैं। कोई संस्कृत-पंडित भी ऐसा ग्रंथ लिख पाए, यह कम ही संभव है। इससे अधिक अजूबा- है इनका [[तुलनात्मक सौंदर्यशास्त्र]] जिसका शीर्षक है, ‘सौंदर्यदर्शन विमर्शः’। इसमें [[यूनानी सौंदर्यशास्त्र]] से लेकर [[बॉम गार्टन]] की [[जर्मन भाषा|जर्मन]] [[कला]] परिभाषाओं से होते हुए [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] [[काव्यशास्त्र]] को लपेट कर फ्रांसीसी [[क्रोचे]] और [[अस्तित्ववाद]] तक ये अपने विमर्श को ले आए हैं। संस्कृत में यह सब लिखना कठिन होता है, यद्यपि संस्कृत ही विश्व में ऐसी एक भाषा है जिसमें विश्व भर की अवधारणाओं के लिए शब्द बन सकते हैं। ऐसे शब्द बनाते-बनाते इन्होंने, (शायद विनोद में) जर्मनी के एक [[सौंदर्यशास्त्री]] [[बॉम गार्टन]] (जो [[ललित कला]]ओं के वर्गीकरण का जनक माना जाता है) का नाम भी [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में उतार डाला ‘वृक्षोद्यान’! ([[जर्मन भाषा|जर्मन]] में बॉम, वृक्ष होता है, गार्टन उद्यान याने गार्डन)!!" {उद्धरण-अंत} === कुछ प्रमुख ग्रन्थ === 1.'[[भारतीयता]] के मूल स्वर' 2.‘[[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] विमर्श’ 1996 [[वाराणसी]], 3.'सौन्दर्य दर्शन विमर्श’ 1996 राका प्रकाशन, जयपुर / वाराणसी, [http://www.printsasia.it/book/%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6-%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%AF]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} 4.‘एकं सद्विप्राः बहुधा वदन्ति’ 1997 [[वाराणसी]] [https://web.archive.org/web/20140729173509/http://books.google.co.in/books?id=Yl2Rqu960o8C] 5.‘न्यायबिन्दु’ 1975 [[सारनाथ]], जयपुर [https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 6.'भक्तिदर्शनविमर्शः'[https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 7. 'Social and Economic Life of Early Medieval Bihar': forwarded G. C. Pande Publisher: Allahabad : Raka Prakashan, 2005. ISBN 8188216275 8. 'भागीरथी' Bhagirathi (Poetry in Hindi and Sanskrit, awarded the Saraswati Samman (an annual award for outstanding prose or poetry literary works in any Indian language.)[https://web.archive.org/web/20140727025216/http://books.google.co.in/books?id=BgtkAAAAMAAJ&q=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=RKXGU-eiIcSMuATPlYKIBg&ved=0CD0Q6AEwBg] 9. 'Kalidas and His Age' (1999)[https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 10. 'Timeless River' (कविता-संग्रह) (selected poems from Bhagirathi) 11. 'महिलाएं' Mahilayen [[गाथा सप्तशती]] का अनुवाद [https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 12. 'जया' ('Jaya') (कविता संग्रह) (poems)[https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 13. 'हंसिका' 'Hansika (कविता-संग्रह) (poems)[https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 14. 'मूल्य-मीमांसा' Mulya Mimansa [https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 15. 'The Meaning and Process of Culture' 16. 'क्षण और लक्षण' (कविता-संग्रह) "Kshan aur Lakshan" (poems)[https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 14. 'अग्निबीज' (Agni Beej)(poems)[https://web.archive.org/web/20140727013849/http://books.google.co.in/books?id=Q75HAAAAMAAJ&q=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=36fGU4fKHZaHuATeg4KICg&ved=0CCEQ6AEwATgK] : भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली 15. धर्मकीर्ति विरचित 'न्यायबिन्दु' (अनुवाद, व्याख्या), 1972 Nyaya Bindu [https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 16.रत्नकीर्ति विरचित 'अपोहसिद्धि'(अनुवाद एवं व्याख्या), 1971 Apohh Siddhi [https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 17. 'Consciousness Values and Culture' [https://web.archive.org/web/20140727022045/http://books.google.co.in/books?id=xaPZAAAAMAAJ&q=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=RKXGU-eiIcSMuATPlYKIBg&ved=0CBwQ6AEwAA] 18. 'Life and Thought of Shankarachary'a [https://web.archive.org/web/20140727010825/http://books.google.co.in/books?id=nAiyujUqTwYC&printsec=frontcover&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=RKXGU-eiIcSMuATPlYKIBg&ved=0CCAQ6AEwAQ] 19. 'Foundations of Indian Culture' [https://web.archive.org/web/20140727010246/http://books.google.co.in/books?id=VMf-isGALqQC&printsec=frontcover&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=RKXGU-eiIcSMuATPlYKIBg&ved=0CCYQ6AEwAg] 20. 'Studies in the origin of Buddhism' [https://web.archive.org/web/20140727024402/http://books.google.co.in/books?id=__1kiAonBzIC&printsec=frontcover&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=RKXGU-eiIcSMuATPlYKIBg&ved=0CDIQ6AEwBA] 21. 'बुद्ध धर्म के विकास का इतिहास' [https://web.archive.org/web/20140727021200/http://books.google.co.in/books?id=4XsbAAAAIAAJ&q=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=RKXGU-eiIcSMuATPlYKIBg&ved=0CEMQ6AEwBw] 22. 'Jain thought and culture' [https://web.archive.org/web/20140727013721/http://books.google.co.in/books?id=w-0XAAAAIAAJ&q=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=RKXGU-eiIcSMuATPlYKIBg&ved=0CE4Q6AEwCQ] 23. 'भारतीय समाज' [https://web.archive.org/web/20140727024312/http://books.google.co.in/books?id=gavzml4HVooC&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=36fGU4fKHZaHuATeg4KICg&ved=0CD4Q6AEwBjgK] 24. 'ऋग्वेद : चौथा एवं सप्तम मंडल' [https://web.archive.org/web/20140727005136/http://books.google.co.in/books?id=n0AqAQAAMAAJ&q=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&dq=inauthor:%22Govind+Chandra+Pande%22&hl=en&sa=X&ei=36fGU4fKHZaHuATeg4KICg&ved=0CEIQ6AEwBzgK] 25. 'अर्द्धशती का भारतीय काव्य चिंतन :पक्ष और विपक्ष' [http://www.books.google.co.in/books?isbn=8170557062]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} 26. 'पालि साहित्य का इतिहास' [https://web.archive.org/web/20140727014556/http://books.google.co.in/books?id=gXd7-Gwqly4C] 27. इतिहास: स्वरुप एवं सिद्धांत [https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83] 28. '[[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री|मंजुनाथ]] ग्रंथावली' समीक्षा [https://web.archive.org/web/20160305020536/http://www.sanskrit.nic.in/svimarsha/Sanskritv4.htm] 29. 'शंकराचार्य : विचार और सन्दर्भ' [https://web.archive.org/web/20180218210405/http://hindi.indiawaterportal.org/up?page=83]
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