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=== रसायनों का प्रभाव === त्वचा पर रासायनिक पदार्थों, जैसे क्षार तथा अम्ल आदि, का बुरा प्रभाव पड़ता है। भारत संप्रति औद्योगीकरण की ओर अग्रसर हो रहा है, अतएव अनेक प्रकार के रासायनिक पदार्थों का प्रयोग अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में त्वचा के बहुत से रोग त्वचा पर इन रसायनकों के बुरा प्रभाव डालने के कारण दृष्टिगोचर होंगे। आधुनिक [[समय]] में अन्य देशें में व्यावसायिक त्वचारोंगों (occupational skin diseases) की ओर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। किसी औद्योगिक संस्था में श्रमिक के प्रवेश करते समय यह देखा जाता है कि उस औद्योगिक संस्था में जो रसायन उपयोग में आते हैं, वे श्रमिकों के लिए हानिकारक तो नहीं हैं। दूसरी बात यह है कि ऐसी औद्योगिक संस्थाओं के प्रबंधक एवं चिकित्सक यह भी देखते हैं कि समस्त कर्मचारी उचित प्रकार से हाथ पाँव धोते हैं और काम के पश्चात् अपने कपड़े बदलते हैं अथवा नहीं। जिन कपड़ों को पहन कर वे रसायनकों का प्रयोग करते हैं, उन्हें काम के पश्चात् तुरंत बदल लेना चाहिए, जिससे शरीर पर उन पदार्थों का बुरा प्रभाव अधिक देर तक न पड़ता रहे। आजकल प्रगतिशील देशों में औद्योगिक संस्थाएँ इन समस्त बातों पर पूरा पूरा ध्यान रखती हैं और इस बात पर भी ध्यान देती हैं कि कारखानों की त्वचा पर बुरा प्रभाव न डाल सकें। कर्मचारी के स्वास्थ्य का पूरा पूरा ध्यान रखा जाता है। प्रत्येक कर्मचारी का जीवन बीमा होता है, जिससे काम के मध्य यदि वह रोगग्रस्त हो जाए तो उसकी चिकित्सा उचित प्रकार से हो सके। जिस अवधि तक वह रोगग्रस्त रहता है, उस अवधि का वेतन जीवन बीमा कंपनी देती है और उसकी उचित [[चिकित्सा]] भी करवाती है। इसके अतिरिक्त, यदि यह सिद्ध हो जाता है कि कर्मचारी को कोई रोग कारखानों में कार्य करते समय और वहाँ की किसी ऐसी वस्तु को स्पर्श करने से हुआ है, जो हानिकारक है, तो उस फैक्टरी या कारखाने के प्रबंधकों की ओर से क्षतिपूर्ति (compensation) के रूप में कुछ धन भी कर्मचारी को दिलाया जाता है।
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