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== द ब्रॉई == आइनस्टाइन की खोज और जीत के बाद, वैज्ञानिकों ने धीरे-धीरे प्रकाश के तरंग-कण द्विरूप को मानना शुरू कर दिया था, जब १९२४ में फ़्रांसिसी वैज्ञानिक [[लुई द ब्रॉई]] (जिन्हें भारतीय उपमहाद्वीप में लोग अक्सर लुइ दि ब्रॉग्ली बुलाते हैं) ने भौतिकी की दुनिया में एक और सनसनी फैला दी। उन्होंने कहा के न सिर्फ़ प्रकाश, बल्कि सारे पदार्थ के भी तरंग-कण द्विरूप होते हैं और किसी भी गतिशील पदार्थ को तरंग या कण के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने अपने गणित से दिखाया के गतिशील कण का तरंगदैर्घ्य (वैवलॅन्थ, λ) उसके [[संवेग (भौतिकी)|संवेग]] (मोमॅन्टम, p) पर निर्भर करता है - :<math>\lambda = \frac{h}{p}</math><ref>{{Cite web |url=https://books.google.co.in/books?id=7qCMUfwoQcAC&pg=PA29&dq=wave-particle+all-particles&redir_esc=y&hl=en#v=onepage&q=wave-particle%20all-particles&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180831002427/https://books.google.co.in/books?id=7qCMUfwoQcAC&pg=PA29&dq=wave-particle+all-particles&redir_esc=y&hl=en#v=onepage&q=wave-particle%20all-particles&f=false |archive-date=31 अगस्त 2018 |url-status=live }}</ref> तीन साल बाद इलेक्ट्रॉनों के साथ प्रयोगों में बिलकुल यही पाया गया। यह परमाणुओं के अंश होते हैं और इन्हें हमेशा कण समझा जाता था, लेकिन जब इलेक्ट्रॉन किरण पूँज एक परदे पर फेंकी गयी तो बिलकुल सशक्त प्रकाश की तरह इन्हों ने भी तरंगों वाले [[विवर्तन]] (डिफ़्रैक्शन) के चित्र दिखा दिए। उनकी इस खोज के लिए द ब्रॉई को १९२९ में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
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