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== प्रकाशकी == "सती हितैषिणी" प्रकाशन घर से १९१३ में प्रकट हुवा तिरमलमब की प्रथम उपन्यास का नाम था, "सुशील". उस उपन्यास प्रकाशित की कम समय में अति प्रसिद्द हो कर, तेजी से चार संस्करणों देख लिया और 7000 से अधिक की प्रति की बिक्री हुवा. "सती हितैषिणी" प्रकाशन घर से केवल तिरुमलम्बा की लेखनी के आलावा, "सन्मान ग्रंथावली", "सन्मार्ग ग्रंथ मालिक", "ननिदनी ग्रंथमाला" (पण्यं सुंदर शास्त्री, सरगुरु वेंकट वरदाचार्य के द्वारा लिखे गए), लक्ष्य एवं लक्षणों के बारे में कहते हुवा 'सजावट शास्त्र ग्रंथ' (डा. एस .एन. नृसिंहयय), "सुक्ष्म आयुर्वेद उपचार परीक्षण', 'सरल युनिपाति इलाज' नाम कहा जाने वाली चिकित्सा ग्रंथ (doc. श्रीनिवास मूर्ति) जैसे श्रेष्ट पुस्तक भी प्रकाशित किए गए थे. इतनी श्रेष्ट मनोभाव तिरुमलम्बा की थी. १९१३-१६ में तिरुमलम्बा ने "नभ", "विद्युतललत", "हरिण" जैसे कुल मिलके ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित किया. कथा, उपन्या, छोटे उपन्यास, जासूसी उपन्यास, निबंध, कविता, नाटक जैसे अनेक लेखन मिलाके उन्होंने अट्ठाइस लेखन उन्होंने लिखा. १९३९ में लिखा गया "मणिमाला" उनका अंतिम उपन्यास है.
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