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== कक्षीय लक्षण == धूमकेतु को उसकी भ्रमण कक्षा के आधार पर वर्गीकृत किया गया है | छोटी भ्रमणकक्षा वाले धूमकेतुओं की कक्षा २०० वर्ष से छोटी होती है जबकि लम्बी भ्रमणकक्षा वाले धूमकेतुओं की कक्षा बहुत लम्बी होने के बावजूद सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के अन्दर होती है | एकल भ्रमण धुमकेतूओं की कक्षा परवलयाकार या अतिवालायाकार होने से ऐसे धूमकेतु एक बार सूर्य का चक्कर लगाकर हमेशा के लिए सौरमंडल के बाहर चले जाते है | छोटी कक्षा वाले एंके धूमकेतु की कक्षा सूर्य और गुरु के बीच स्थित है | ऐसा माना जाता है कि छोटी कक्षा वाले धुमकेतूओं की उत्पत्ति क्युइपर बेल्ट में जबकि लम्बी भ्रमणकक्षा वाले धुमकेतूओं की उत्पत्ति ऊर्ट बादल में होती है | ऐसी मान्यता है कि जब सूर्य आकाशगंगा की परिक्रमा करते हुए किसी तारे के पास से गुजरता है या जब सूर्य का संभावित साथी तारा नेमेसिस या प्लेनेट एक्स उसके नजदीक आता है तब धूमकेतु बहुत लम्बी भ्रमणकक्षा धारण करते है | कम द्रव्यमान और अंडाकार कक्षा के कारण धूमकेतु कभी कभी बड़े ग्रहों की तरफ आकर्षित होते है और इससे उसकी कक्षा पर असर पड़ता है | छोटी कक्षा वाले धुमकेतूओं का एक केंद्र (परवलय के दो केंद्र होते है) बड़े ग्रहों की कक्षा के अन्दर स्थित होता है | यह स्पष्ट है कि ऊर्ट बादल से आने वाले धुमकेतूओं की कक्षा पर बड़े ग्रहों का असर पड़ता है | बड़ी संख्या में ऐसे धुमकेतूओं पर विशेष रूप से बृहस्पति का असर पड़ता है जिसका द्रव्यमान सौरमंडल के अन्य सभी ग्रहों के द्रव्यमान से भी ज्यादा है | परिक्रमा कक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण कभी कभी पहले से खोजे गए धूमकेतु खो जाते है | कभी कभी ऐसा होता है कि खोजे गए नए धूमकेतु के गहन अध्ययन के बाद यह गुमशुदा धूमकेतुओं के रूप में पहचाने जाते है | 11P/ टेम्पल - स्विफ्ट - लीनियर धूमकेतु इसका उदाहरण है | सन् १८६९ में उसको सबसे पहले देखा गया, १९०८ के बाद बृहस्पति के प्रभाव के कारण उसकी कक्षा बदल गई और वह अंतरिक्ष में कहीं ओझल हो गया | सन् २००१ में लीनियर नाम के वैज्ञानिक ने उसकी फिर से खोज की थी |
सारांश:
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