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== मुगल युग (मंगोल युग) == चंगेज खाँ तुर्किस्तान के सम्राट् जलालुद्दीन का पीछा करता हुआ सिंध तक आया। उस समय हिंदुस्तान में मुसलमानों का राज्य स्थापित हो चुका था। मुगल मुसलमान नहीं थे। हिंदुस्तान के मुसलमानी राज्य का सौभाग्य था कि हिरात नगर में, जो आजकल अफगानिस्तान के अंतर्गत है, विद्रोह मच गया और चंगेज खाँ उसे दफन करने के लिए वहाँ चला गया। मुगलों (मंगोलों) ने अंत में सन् 1257 ई. में बगदाद भी विजय कर लिया और अब्बासी खलीफों का राज्य समाप्त हो गया। हिंदुस्तान का मुसलमानी राज्य मुगलों के हत्याकांड से बचा हुआ था। इस कारण हर स्थान के कवि तथा विद्वान् हिंदुस्तान आकर शरण लेने लगे। इस प्रकार हिंदुस्तान फारसी भाषा तथा साहित्य का एक प्रभावशाली केंद्र बन गया। भारतीय फारसी साहित्य का अपना एक अलग इतिहास है। फारसी के हिंदुस्तानी कवियों में से केवल अमीर खुसरो का नाम काफी है। गद्यलेखकों में काजी मिनह सिराज ने तबकाते नासिरी लिखी, जो इतिहास का एक ग्रंथ है। हिंदुस्तान में लिखे गए लुबाबुल्ललुबाब ग्रंथ का, जो फारसी के कवियों का महत्वपूर्ण [[तज़किरा]] (कवि चर्चा) है, रचयिता नूरुद्दीन मुहम्मद औफ़ी यहाँ नासिरुद्ददीन कुबचा तथा उसके अनंतर सुलतान शम्सुद्दीन एल्तुत्मिश के दरबार में रहता था। ईरान में जो कवि तथा साहित्यकार हो गए हैं उनमें से कुछ प्रसिद्ध ये हैं : [[अलाउद्दीन अल मलिक जुवीनी]], जिसकी मृत्यु सन् 681 हि. में हुई, इस युग का प्रसिद्ध लेखक है। इनकी पुस्तक तारीख जहाँकुशा विशद ग्रंथ है। इसमें मुगलों के व्यवहार, स्वभाव, शासनपद्धति आदि पर पूरा प्रकाश डाला गया है। इसमें भौगोलिक वृत्तांत भी आया है पर इस ग्रंथ की लेखनशैली में आडंबर भरा हुआ है। अरबी शब्दों, कहावतों तथा कुरान की आयतों का स्थान स्थान पर प्रयोग होने से जो लोग अरबी भाषा नहीं जानते वे इस पुस्तक को सरलता से पढ़ नहीं सकते और न इससे पूरा आनंद प्राप्त कर सकते हैं। [[गुलिस्ताँ]] तथा [[बोस्ताँ]] के प्रणेता [[शेख़ सादी|शेख सादी]] भी इसी युग में हुए। इनकी लेखन शैली अत्यंत सुगम तथा आकर्षक है। गुलिस्ताँ गद्य में और बोस्ताँ पद्य में है। गुलिस्ताँ के सिवा गद्य में इनकी अन्य रचनाएँ भी हैं और पद्य में बोस्ताँ के सिवा इनका दीवान भी है, जिसमें कसीदे, गजलें तथा अन्य प्रकार की कविताओं के नमूने भी हैं। शेख सादी की गणना अच्छे गजल कहनेवाले कवियों में की जाती है। [[तारीख जहाँकुशा]] के समान एक अन्य पुस्तक [[तारीख वस्साफ़]] है, जिसका लेखक [[शिहाबुद्दीन अब्दल्ला]] है। यह सन् 663 हि. में [[शीराज़|शीराज]] में पैदा हुआ और आठवीं शती हिजरी के मध्य तक जीवित रहा। तारीख वस्साफ की शैली आडंबर तथा अत्युक्तियों से भरी है किंतु ऐतिहासिक प्रामाणिकता की दृष्टि से अच्छी पुस्तक है। तारीखे जहाँकुशा के बाद की सभी घटनाएँ इसमें आ गई हैं। इस युग का दूसरा लेखक [[रशीदुद्दीन फजलुल्लाह]] जामेउत्तवारीख का ग्रंथकर्ता है। इसकी मृत्यु सन् 718 हि. में हुई। [[हम्दुल्लाह मुस्तौफी कज़वीनी]] इस युग का एक इतिहासकार है, इसकी पुस्तक का नाम नुज़हतुल्कुलूब है। प्रसिद्ध सूफी कवि [[जलालुद्दीन रूमी]] ने भी गद्य में पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें से कुछ हैं-"किताब वजीया माफिया," "मजालिस" तथा "मकतूबात"। [[नसीरुद्दीन तूसी]] इस काल का प्रसिद्ध विद्वान् तथा साहित्यकार है। इसकी श्रेष्ठ रचनाओं में तर्कशास्त्र संबंधी "एसासुल् इक्तबास" हैं। "मैयारुल् अशआर" [[छन्दशास्त्र|छंदशास्त्र]] पर है। इसकी विशिष्ट पुस्तक "इख्लाके नासिरी" बहुत प्रसिद्ध है। इसकी लेखनशैली कठिन है। इस युग में सूफियाना कविता की बड़ी वृद्धि हुई, जिसका कारण मुगलों के आक्रमणों से हर ओर फैली हुई बरबादी थी। इससे संसार की अस्थिरता सबसे हृदयों पर जम गई। सूफी मत में संसार की नश्वरता पर बड़ा बल दिया जाता है। इस काल के सामाजिक जीवन में बहुत सी बुराइयाँ आ गई थीं, जिनपर इस समय के कवियों ने बहुत लिखा है। इस काल के बड़े कवियों में से जलालुद्दीन रूमी उल्लेख्य हैं। ये सन् 1207 ई. में [[बल्ख]] में पैदा हुए और सन् 1273 ई. में कोनैन: में, जो तुर्की में है, मरे। इनकी प्रसिद्ध मसनवी की सूफी संसार में बड़ी प्रतिष्ठा है और इसे फारसी का 'कुरान' कहा जाता है। मसनवी के सिवा इनका दीवान भी है, जो "दीवान शम्स तब्रेज" के नाम से प्रसिद्ध है। इस युग का प्रसिद्ध हँसोड़ कवि [[उबेद ज़ाकानी]] है। कविता की ओट में अपने समय की सामाजिक कुरीतियों का अच्छा वर्णन इसने किया है और तुर्कों तथा मुगलों के आक्रमणों से उत्पन्न बुराइयों का विवरण दिया है। [[सलमान सावजी]] इस युग का विख्यात [[क़सीदा|कसीदा]] कहनेवाला कवि है, जो [[बग़दाद|बगदाद]] के मुगल बादशाहों की प्रशंसा किया करता था। इस युग के सबसे बड़े तथा अंतिम कवि [[हाफ़िज़ शिराज़ी|हाफिज]] हैं। हाफिज ने सूफी विचारों तथा प्रेम की अच्छी कल्पनाएँ की हैं। शब्दचयन अत्यंत सुष्ठु तथा मधुर है।
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