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=== कहानी === कहानी पत्रिका सन् 1938 से ही सरस्वती प्रेस से श्रीपत राय के संपादन में निकल रही थी।<ref>भारतीय पत्रकारिता कोश, खण्ड-2, विजयदत्त श्रीधर, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2010, पृष्ठ-1010.</ref> भैरव प्रसाद गुप्त सन् 1955 में इसके संपादन से जुड़े और 1960 तक इसका संपादन करते रहे। "सन् '55 और सन् '56 में प्रकाशित उसके वार्षिक अंक अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण आज भी मील के पत्थर के रूप में स्वीकृत हैं। विभिन्न भारतीय भाषाओं के महत्त्वपूर्ण कहानीकारों को एक मंच पर लाने का काम कहानी ने किया।"<ref>भैरव प्रसाद गुप्त (विनिबंध), मधुरेश, साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली, प्रथम संस्करण-2000, पृष्ठ-74.</ref> बाद में नीतिगत मतभेद के कारण उन्हें कहानी के संपादन से अलग होना पड़ा। इस संबंध में उन्होंने स्वयं लिखा है: {{quote|"1959 के अंत में श्रीपत राय ने रामनारायण शुक्ल के सहयोग से 'कहानी' को एक व्यावसायिक पत्रिका बनाने का निर्णय लिया। मुझे जब यह मालूम हुआ तो मैंने 1 जनवरी 1960 को इस्तीफ़े के साथ पंद्रह दिन का नोटिस दे दिया। श्रीपत राय ने मुझे 13 जनवरी को ही पंद्रह दिन की तनख़्वाह दे कर मुक्त कर दिया...।"<ref>लेखन, अंक-3-4 (जुलाई 1984, भैरव प्रसाद गुप्त पर केंद्रित), संपादक- विद्याधर शुक्ल, पृष्ठ 30 पर लिखित; भैरव प्रसाद गुप्त (विनिबंध), मधुरेश, साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली, प्रथम संस्करण-2000, पृष्ठ-77 पर उद्धृत।</ref>}}
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