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मैरी १ (स्कॉटलैंड की रानी)
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=== अंग्रेजी सिंघासन पर दावा === नवम्बर 1558 में, [[इंग्लैंड के हेनरी अष्टम|हेनरी अष्टम]] की बड़ी बेटी [[मैरी १, इंग्लैंड की रानी|मैरी १]] के बाद हेनरी की एकमात्र बची हुई संतान [[एलिज़ाबेथ प्रथम|एलिज़ाबेथ]] ने इंग्लैंड की सत्ता संभाली। [[तीसरा उत्तराधिकार कानून]], जो की 1543 में [[इंग्लैंड की संसद]] द्वारा पारित हुआ था के अनुसार, एलिज़ाबेथ को उनकी बहन का उत्तराधिकारी माना गया। हेनरी अष्टम की वसीयत और अंतिम इच्छा के अनुसार कोई भी स्टुअर्ट इंग्लैंड की सत्ता नहीं संभाल सकता था। फिर भी, तमाम कैथोलिकों की नज़र में एलिज़ाबेथ जायज़ नहीं थीं और हेनरी की बड़ी बहन की वंशज स्कॉटलैंड की मैरी ही इंग्लैंड की सही रानी बनने के काबिल थी।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=83}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=18}}</ref> फ्राँस के हेनरी २ ने अपने बेटे और बहू को इंग्लैंड के राजा और रानी के रूप में प्रस्तावित किया और फ्राँस में [[इंग्लैंड का रोयल आर्म|इंग्लैंड के शाही चिन्ह]] को फ्राँसिस और मैरी के शाही बिल्ले में एक चौथाई जगह दे दी गई।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=83}}; {{Harvnb|Guy|2004|pp=95–96}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=18}}; {{Harvnb|Wormald|1988|p=21}}</ref> इंग्लैंड की सत्ता पर मैरी का दावा उनके और एलिज़ाबेथ प्रथम के मध्य टकराव का मुख्य कारण बना।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=85}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=18}}</ref> 10 जुलाई 1559 को जब एक युद्धाभ्यास के दौरान लगी चोटों से हेनरी २ की मृत्यु हो गई तब पंद्रह वर्षीय फ्राँसिस को फ्राँस का राजा बनाया गया और १६ वर्षीय मैरी शासक की पत्नी के रूप में फ्राँस की रानी बनीं।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=86–88}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=100}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=19}}; {{Harvnb|Wormald|1988|p=93}}</ref>अब फ्राँसीसी राजनीती में मैरी के दोनों अंकल [[फ्राँसिस, ड्यूक ऑफ गुईज़|ड्यूक ऑफ गुईज़]] और [[चार्ल्स, लोरेन का कार्डिनल|लोरेन का कार्डिनल]] की भूमिका अहम हो गई थी <ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=88}}; {{Harvnb|Wormald|1988|pp=80, 93}}</ref> और फ्राँस में उनका प्रभुत्व स्थापित होने लगा था।<ref>{{cite book|url=http://books.google.com/?id=EJtwUL1Xmt0C|last=थॉम्पसन|first=जेम्स|title=The Wars of Religion in France|trans-title=फ्राँस में धर्मयुद्ध|year=1909|publisher=शिकागो विश्वविद्यालय प्रेस|location=शिकागो|page=22|isbn=978-1-4179-7435-1}}</ref> <gallery perrow="6"> File:BnF, NAL 83, folio 154 v - Francis II and Mary, Queen of Scots.jpg|मैरी (उम्र १६) और फ्राँसिस II (उम्र १५), १५५९ में फ्राँसिस के राजा बनने के कुछ देर बाद। File:Royal Arms of the Kingdom of Scotland (1558-1559).svg|स्कॉट्स की रानी और फ्राँस की राजकुमारी (डॉफिन) के रूप में मैरी का शाही बिल्ला। File:Royal Arms of the Kingdom of Scotland (1559-1560).svg|स्कॉटलैंड की रानी और फ्राँस की [[पटरानी]] के तौर पर मैरी का शाही बिल्ला। File:Royal Arms of Mary, Queen of Scots, France & England.PNG|१५६० में स्कॉटलैंड, फ्राँस के साथ इंग्लैँड का चिन्ह लगे हुए मैरी का शाही बिल्ला जिसे [[एडिनबर्ग की संधि]] होने से पहले फ्राँस में इस्तेमाल किया जाता था। File:Royal Arms of the Kingdom of Scotland (1560-1565).svg|स्कॉटलैंड की रानी और फ्राँस की [[विधवा रानी]] के तौर पर मैरी का शाही बिल्ला। </gallery> इस बीच स्कॉटलैंड में [[प्रोटेस्टैंट]] इसाईयों का प्रभुत्व बढ़ता ही जा रहा था।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=96–97}}; {{Harvnb|Guy|2004|pp=108–109}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=14}}; {{Harvnb|Wormald|1988|pp=94–100}}</ref> प्रोटेस्टैंट नेताओं ने प्रोटेस्टैंटिज़्म की रक्षा के लिए [[बर्विक की संधि (1560)|स्कॉटलैंड में अंग्रेज सेनाओं को बुला लिया]]। इसके बाद फ्राँस ने स्कॉटलैंड में शासन कर रही गुईज़ की मैरी को और सहायता भेजी जो फ्राँसीसी सैन्य मदद से स्कॉटलैंड पर शासन कर रहीं थी।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=97}}; {{Harvnb|Wormald|1988|p=100}}</ref><ref>{{Harvnb|Wormald|1988|pp=100–101}}</ref>11 June 1560, को गुईज़ की मैरी की मृत्यु के बाद फ्राँसीसी और स्कॉट रिस्तों के भविश्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया था। [[एडिनबर्ग की संधि]] जिस पर मैरी के प्रतिनिधियों ने ६ जुलाई १५६० को हस्ताक्षर किया था के प्रभाव से फ्राँस और इंग्लैंड की सेनाएँ स्कॉटलैंड से हट गयीं और फ्राँस ने एलिज़ाबेथ प्रथम को इंग्लैंड की रानी मान लिया। हाँलांकि, १७ वर्षीय मैरी जो फ्राँसिस की मृत्यु से शोकाकुल थी ने इस संधि को मानने से इंकार कर दिया और इंग्लैंड की सत्ता पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं हुईं।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=97–101}}; {{Harvnb|Guy|2004|pp=114–115}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=20}}; {{Harvnb|Wormald|1988|pp=102–103}}</ref>
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