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=== यात्रा का आरम्भ === सन् 1935 में मात्र 11 वर्ष की उम्र में राजकपूर ने फ़िल्म '[[इन्कलाब (१९३५ फ़िल्म)|इंकलाब]]' में अभिनय किया था। उस समय वे [[बॉम्बे टॉकीज़]] स्टुडिओ में सहायक (helper) का काम करते थे। बाद में वे [[केदार शर्मा]] के साथ क्लैपर ब्वाॅय का कार्य करने लगे। कुछ लोगों का मानना है कि उनके पिता [[पृथ्वीराज कपूर]] को विश्वास नहीं था कि राज कपूर कुछ विशेष कार्य कर पायेगा, इसीलिये उन्होंने उसे सहायक या क्लैपर ब्वाॅय जैसे छोटे काम में लगवा दिया था।<ref name="विनोद">{{cite book |last1=विनोद |first1=विप्लव |title=हिंदी सिनेमा के 150 सितारे |date=2013 |publisher=प्रभात प्रकाशन (पेपरबैक्स) |location=आसफ अली रोड, नयी दिल्ली |isbn=978-93-5048-295-7 |pages=81-82 |edition=प्रथम}}</ref> परन्तु, पृथ्वीराज कपूर के साथ रहने वाले एवं बाद के दिनों में राज कपूर के निजी सहायक एवं सहयोगी निर्देशक वीरेन्द्रनाथ त्रिपाठी का कहना है : "पापा जी (पृथ्वीराज) हमेशा कहते थे राज पढ़ेगा-लिखेगा नहीं, पर फिल्मी दुनिया में शानदार काम करेगा। आज केदार ने उसे मेरा बेटा होने के कारण काम दिया है, लेकिन एक दिन वह भी होगा जब लोग राज को पृथ्वीराज का बेटा नहीं बल्कि पृथ्वीराज को राज कपूर का बाप होने के कारण जानेंगे।"<ref>{{cite book |last1=मृत्युंजय (संपादक) |title=सिनेमा के सौ बरस |date=2017 |publisher=शिल्पायन |location=शाहदरा, दिल्ली |isbn=81-87302-28-3 |page=179 |edition=दशम}}</ref> उस समय के प्रसिद्ध निर्देशक [[केदार शर्मा]] ने राज कपूर के भीतर के अभिनय क्षमता और लगन को पहचाना और उन्होंने राज कपूर को सन् 1947 में अपनी फ़िल्म '[[नीलकमल (1947 फ़िल्म)|नीलकमल]]' में नायक (Hero) की भूमिका दे दी।<ref name="विनोद" />
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