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==== निष्क्रिय प्रतिरक्षण ==== जब तात्कालिक प्रतिरक्षण अपेक्षित हो, जैसे रोग के प्रभाव में आ चुके व्यक्तियों के तंत्र में, तब बने बनाए प्रतिरक्षी प्रविष्ट कराए जाते हैं। ये विभिन्न स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं : (क) विशिष्ट चिकित्सीय सीरम (Specific Therapeutic Serum) - विशिष्ट रोग के प्रति सक्रिय रूप से प्रतिरक्षित घोड़े से यह सीरम प्राय: प्राप्त किया जाता है, यद्यपि अन्य पशुओं के सीरम भी काम में लाए जा सकते हैं। ऐसे सीरम से लाभ यह है कि उसमें प्रतिरक्षी अंश अधिक होता है। ऐसा सीरम किसी भी आवश्यक मात्रा में प्राप्त हो सकता है। इस सीरम के दोष यह है कि इसका प्रोटीन मानव शरीर के प्रोटीन से भिन्न होता है। अत: इन प्रोटीनों के प्रति ऐलर्जिक (allergic) मनुष्यों में सीरम प्रतिक्रियाएँ देता है। ऐसे सीरम के महत्वपूर्ण उदाहरण ऐंटीडिपथीरिया सीरम, ऐंटी टिटनस सीरम, ऐंटीगैसगैंग्रीन सीरम हैं। (ख) अति प्रतिरक्षित सीरम (Hyperimmune serum) - इसमें और उपर्युक्त चिकित्सीय सीरम में अंतर यह है कि इसे मनुष्यों से प्राप्त किया जाता है, न कि अन्य पशुओं से। यह ऐसे मनुष्यों के रुधिर से बनाया जाता है जिनमें बार बार उपयुक्त प्रतिजन की सुई लगाकर असाधारण प्रतिरोध उत्पन्न किया गया है। (ग) उपशमी सीरम (Convalescent serum) - यह मद्य: रोगयुक्त मनुष्य से प्राप्त किया जाता है। किसी विशिष्ट संक्रमण से मुक्त होने पर व्यक्ति में जो प्रतिरक्षी उत्पन्न होता है उसी के कारण उसमें प्रभावोत्पादक गुण होता है। पर्याप्त मात्रा में प्राप्त न होने के कारण इसकी उपयोगिता बहुत सीमित है। (घ) गामा ग्लोब्यूलिन (Gamma Gobulin) - मानवी सीरम में पाए जानेवाले अधिकतर प्रतिरक्षी गामा ग्लोब्यूलिन अंश में सीमित होते हैं। जिन बच्चों में मसूरिका (measles) के संक्रमण की आशंका होती है उन्हें गामा ग्लोब्यूलिन की सुई द्वारा, प्रतिरक्षण प्रदान किया जा सकता है। पोलियो महामारी में रोगनिरोधी उपाय के रूप में भी गामा ग्लोब्यूलिन का उत्साहवर्धक योग पाया गया है। ग्लोब्यूलिन का प्रधान स्रोत, रेडक्रॉस रक्तदान कार्यक्रम के अंतर्गत व्यक्तियों द्वारा प्रदत्त रुधिर है। व्यापार का ग्लोब्यूलिन प्लेसेंटा (placenta) से प्राप्त होता है।
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