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== गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश == [[चित्र:Black hole lensing web.gif|right|thumb|225px|एक गैलेक्सी के आगे एक बड़ा [[कृष्ण विवर|ब्लैक होल (काला छिद्र)]] है - जैसे-जैसे गैलेक्सी उसके पीछे से निकलती है, उसका प्रकाश ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षक लेंस के प्रभाव से मुड़ता है]] आइनस्टाइन के इस सनसनी फैला देने वाले सिद्धांत का एक बहुत बड़ा प्रमाण रोशनी पर गुरुत्वाकर्षण का असर देखने से आया। न्यूटन की भौतिकी में सिद्धांत था कि दो वस्तुएं एक-दूसरे को दोनों के [[द्रव्यमान]] (अंग्रेजी में "मास") के अनुसार खींचती हैं। लेकिन प्रकाश का तो द्रव्यमान होता ही नहीं, यानि शून्य होता है। तो न्यूटन के मुताबिक़ जिस चीज़ का कोई द्रव्यमान या वज़न ही नहीं उसका किसी दूसरी वस्तु के गुरुत्वाकर्षण से खिचने का सवाल ही नहीं बनता चाहे दूसरी वस्तु कितनी भी बड़ी क्यों न हो। प्रकाश हमेशा एक सीधी लकीर में चलता ही रहता है। लेकिन अगर आइनस्टाइन सही है और किसी बड़ी वस्तु (जैसे कि ग्रह या तारा) की वजह से दिक् ही मुड़ जाए, तो रोशनी भी दिक् के मुड़ने के साथ मुड़ जानी चाहिए। यानि ब्रह्माण्ड में स्थित बड़ी वस्तुओं को [[लेंस]] का काम करना चाहिए- जिस तरह चश्मे, [[दूरदर्शी|दूरबीन]] या [[सूक्ष्मदर्शी|सूक्ष्मबीन]] का लेंस प्रकाश मोड़ता है उसी तरह तारों और ग्रहों को भी मोड़ना चाहिए। १९२४ में एक [[ओरॅस्त ख़्वोलसन]] नाम के [[रूसी भाषा|रूसी]] भौतिकविज्ञानी ने आइनस्टाइन के सापेक्षता सिद्धांत को समझकर भविष्यवाणी की कि ऐसे [[गुरुत्वाकर्षक लेंस]] ब्रह्माण्ड में ज़रूर होंगे। पचपन साल बाद, १९७९ में पहली दफ़ा यह चीज़ देखी गई जब ट्विन क्वासर नाम की वस्तु की एक के बजाए दो-दो छवियाँ देखी गई। उसके बाद काफ़ी दूर-दराज़ वस्तुओं की ऐसी छवियाँ देखी जा चुकी हैं जिनमें उन वस्तुओं और पृथ्वी के बीच कोई बहुत बड़ी अन्य वस्तु रखी हो जो पहली वस्तु से आ रही प्रकाश की किरणों पर लेंसों का काम करे और उसकी छवि को या तो मरोड़ दे या आसमान में उसकी एक से ज़्यादा छवि दिखाए।
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