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= खुली अर्थव्यवस्था के लाभ = खुली अर्थव्यवस्था का सबसे बडा फय्दा है आज़ादी। आज़ादी मुक्त रूप से व्यापार करने की, उन्नति करने की, पैसा कमाने की। चूकि खुली अर्थव्यवस्था मूल रूप से उद्योगों और व्यापार को बढावा देती है, तो ऐसे समाज मे नागरिकों को एक ही उत्पाद खरीगदने के कई विकल्प होते है। ऐसे मे हर उद्योग पे अपने उत्पादों को और बेह्तर और सस्ता बनाने का एक प्रकृतिक दबाव होता है। इस्से उद्योग नयी से नयी तक्नीक का इस्तेमाल करते है। जिस्से उत्पादों की गुणवत्ता बेह्तर होती है। चूकि ऐसी अर्थव्यवस्था मे उद्योगों को बढावा दिया जाता है तो ज़्यादा से ज़्यादा कार्खानें और दफ्तर खुल्ते है। इस्से लोगों को ज़्यादा रोज़्गार के साधन मिल्ते है। बाज़ार मे होने वाली प्रतिस्तपर्धा का सबको फयदा होता है। नये उत्पाद बनते है। पुराने उत्पादों की गुणवत्ता बेह्तर बनती है। लोगों को रोज़्गार मिल्ता है। उद्योगों पे कर्म्चारियों की मांग बढ्ने से इस्मे भी प्रतिस्पर्धा पनप्ती है। और सभी उद्योग अपने कर्म्चरियों को ज़्यादा तंख्वाह दे के विरोधी कम्पनी मे जाने से रोकते है। ऐसा होने से लोगो की पर्चेज़िंग पावर बढती है। लोगो के पास ज़्यादा पैसा आने से उनका रहन सहन बेह्तर होता है। वे बडे घर मे रह सकते है। अपने बच्चों को बेह्तर स्कूल भेज सकते है और अपनी पारिवारिक और सामाजिक ज़िम्मेवारियों का बेहरती से वहन कर सकते है। खुली अर्थव्यवस्था मे बहुत सारी चीज़ों पे से सरकार का नियंत्रण कम होता है। इसको [[निजीकरण]] भी कह्ते है। मस्लन अब काफी व्यापार पे [[बैंक]] और अन्य [[वित्तीय संस्थानों]] की नज़र होती है। जब कोइ वित्तीय संस्थान किसी उद्योग में पूंजी निवेश कर्ता है तो वोह ये देखने को बाध्य होता है कि यह उद्योग थीक से काम करे। वित्तीय संस्थान ये भी देख्ता है के उद्योग ऐसा कुछ ना करे जिस्से कि उसपे किसी तरह का लीगल प्रौब्लम हो। खुली अर्थव्यवस्था मे बाज़ार स्वतह ही ऐसे काम कर्ता है जिसकी की लोगों को ज़रूरत है। अगर कोइ उत्पाद या सेवा ऐसी है जिसकी लोगों को ज़रूरत है तो पुराने उद्योग्पति या कोइ नया आंत्रप्रेन्यौर उस तरह के उत्पाद या सेवा को लोगो तक पहुंचाने लग्ता है। आखिर इस्मे उत्पादक और उत्भोग्ता - दोनो का ही फयदा है। अगर कोइ उत्पाद या सेवा ऐसी है जिसकी लोगों को अब ज़रूरत नही है तो वह धीरे धीरे बन्द हो जाती है। अगर लोग खरीदेने नही तो कम्पनी को घाटा होगा और वह या तो अपना उत्पाद वक्त के साथ बदलेगी या उसे बनाना बन्द कर देगी। खुली अर्थव्यवस्था से नयी तक्नीकों का विकास होता है। बाज़ार मे होने वाली प्रतिस्पर्धा उद्योगो को नयी तक्नीकों के विकास को बाध्य कर्ती है।
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