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==जीव-जन्तु== {{main|गंगा घाटी के जीव-जन्तु और वनस्पति}} [[चित्र:Indian Gharial Crocodile Digon3.JPG|thumb|right|256px|गंगा नदी में पाए जाने वाले घड़ियाल]] [[Image:Comdolph.jpg|256px|thumb|गंगा नदी में पायी जाने वाली डॉलफिन मछली जिसे आम बोलचाल की भाषा में सोंस कहते हैं]] ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह ज्ञात होता है कि १६वीं तथा १७वीं शताब्दी तक गंगा-यमुना प्रदेश घने वनों से ढका हुआ था। इन वनों में जंगली [[हाथी]], [[भैंस]], गेंडा, शेर, [[बाघ]] तथा गवल का शिकार होता था। गंगा का तटवर्ती क्षेत्र अपने शान्त व अनुकूल पर्यावरण के कारण रंग-बिरंगे पक्षियों का संसार अपने आंचल में संजोए हुए है। इसमें मछलियों की १४० प्रजातियाँ, ३५ सरीसृप तथा इसके तट पर ४२ स्तनधारी प्रजातियाँ पायी जाती हैं। यहाँ की उत्कृष्ट पारिस्थितिकी संरचना में कई प्रजाति के वन्य जीवों जैसे— [[नीलगाय]], साम्भर, [[खरगोश]], [[नेवला]], चिंकारा के साथ सरीसृप वर्ग के जीव-जन्तुओं को भी आश्रय मिला हुआ है। इस इलाके में ऐसे कई जीव-जन्तुओं की प्रजातियाँ हैं जो दुर्लभ होने के कारण संरक्षित घोषित की जा चुकी हैं। गंगा के पर्वतीय किनारों पर [[लंगूर]], लाल बंदर, भूरे भालू, लोमड़ी, चीते, बर्फीले चीते, हिरण, भौंकने वाले हिरण, साम्भर, कस्तूरी मृग, सेरो, बरड़ मृग, साही, तहर आदि काफ़ी संख्या में मिलते हैं। विभिन्न रंगों की तितलियाँ तथा कीट भी यहाँ पाए जाते हैं।<ref>{{cite web|url=http://210.212.78.56/50cities/gangotri/hindi/profile_environment.asp|title=पर्यावरण|access-date=[[२२ जून]] [[२००९]]|format=एएसपी|publisher=गंगोत्री|language=|archive-date=19 जून 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090619065813/http://210.212.78.56/50cities/gangotri/hindi/profile_environment.asp|url-status=dead}}</ref> बढ़ती हुई जनसंख्या के दबाव में धीरे-धीरे वनों का लोप होने लगा है और गंगा की घाटी में सर्वत्र कृषि होती है फिर भी गंगा के मैदानी भाग में हिरण, जंगली सूअर, जंगली बिल्लियाँ, भेड़िया, गीदड़, लोमड़ी की अनेक प्रजातियाँ काफी संख्या में पाए जाते हैं। [[डालफिन|डॉलफिन]] की दो प्रजातियाँ गंगा में पाई जाती हैं। जिन्हें [[गंगा डालफिन|गंगा डॉलफिन]] और [[इरावदी डालफिन|इरावदी डॉलफिन]] के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा गंगा में पाई जाने वाले [[शार्क]] की वजह से भी गंगा की प्रसिद्धि है, जिसमें बहते हुए पानी में पाई जानेवाली [[शार्क]] के कारण विश्व के वैज्ञानिकों की काफी रुचि है। इस नदी और बंगाल की खाड़ी के मिलन स्थल पर बनने वाले मुहाने को सुन्दरवन के नाम से जाना जाता है जो विश्व की बहुत-सी प्रसिद्ध वनस्पतियों और प्रसिद्ध बंगाल बाघ का गृहक्षेत्र है।
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