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== कई एक पिंडों की समस्या == {{मुख्य|बहुपिण्ड तंत्र}} तीन पिंडों की गतिकी समस्या की जटिलता का आभास तब हुआ जब सन् १७४३-५० में आलेक्सी क्लेरो (Alexis C.Clairaut) ने [[सूर्य]] और [[पृथ्वी]] के आकर्षण के वशीभूत [[चन्द्रमा|चंद्रमा]] की गति पर अपनी खोजें की और १८ वीं शताब्दी के महान् गणितज्ञ ग्रहों की क्षुब्ध गतियों और चाद्र सिद्धांत की गवेषणा में बहुत समय तक जुटे रहे। इसके फलस्वरूप [[वैश्लेषिक गतिविज्ञान]] (ऐनालिटिकल डाइनैमिक्स) जैसे बृहत् विषय का विकास हुआ, जिसमें अब [[प्राक्षेपिकी]] (बैलिस्टिक्स Ballistics), खगोलीय बलविज्ञान (सिलेश्चैल मेकैनिक्स Celestial Mechanics), कण गतिविज्ञान, दृढ़ गतिविज्ञान और कंपन सिद्धांत का समावेश है। संघटन में आकुंचन और प्रभरण की जटिल प्रक्रियाओं की छानबीन से बचने के लिए यह सरलकारी कल्पना की गई है कि संघटनकारी पिंडों में क्षणिक संपर्क होता है और गति की एक व्यवस्था से दूसरी में परिवर्तन असतत होता है। इस कल्पना पर जब न्यूटन ने अपने गति नियमों को लगाया तो ऐसे समीकरण प्राप्त हुए जिनमें केवल अवस्थितत्वपद विद्यमान थे और जो यह प्रकट करते थे कि प्रत्येक पिंड संघटन से पूर्व और उसके पश्चात् एक समान वेग से चलता है। [[चित्र:TRUE Procedural Animation.gif|thumb|center|550px]]
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