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== लाला लाजपतराय का बदला == 17 दिसम्बर, 1928 को चन्द्रशेखर आज़ाद, [[भगत सिंह]] और राजगुरु ने संध्या के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ़्तर को जा घेरा। ज्यों ही जे. पी. सांडर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकला, पहली गोली राजगुरु ने दाग़ दी, जो साडंर्स के मस्तक पर लगी और वह मोटर साइकिल से नीचे गिर पड़ा।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/news/PUN-LUD-HMU-story-on-lala-lajpat-rai-5168768-PHO.html|title=इन्होंने लिया था लालाजी की मौत का बदला, बीच सड़क पर अंग्रेज को मारी थी गोलियां|date=2015-11-15|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2021-02-28}}</ref> भगतसिंह ने आगे बढ़कर चार–छह गोलियाँ और दागकर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया। जब सांडर्स के अंगरक्षक ने पीछा किया तो चन्द्रशेखर आज़ाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया। लाहौर नगर में जगह–जगह परचे चिपका दिए गए कि लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया। समस्त भारत में क्रान्तिकारियों के इस क़दम को सराहा गया।<ref>{{Cite web|url=https://tubelighttalks.com/chandra-shekhar-azad-punyatithi/|title=Chandra Shekhar Azad Punyatithi: काकोरी कांड और आजाद जी का संबंध|date=2021-02-27|website=Tube Light Talks|language=en-US|access-date=2021-02-28}}</ref> ==== केन्द्रीय असेंबली में बम ==== चन्द्रशेखर आज़ाद के ही सफल नेतृत्व में भगतसिंह और [[बटुकेश्वर दत्त]] ने 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट किया। यह विस्फोट किसी को भी नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से नहीं किया गया था। विस्फोट अंग्रेज़ सरकार द्वारा बनाए गए काले क़ानूनों के विरोध में किया गया था। इस काण्ड के फलस्वरूप क्रान्तिकारी बहुत जनप्रिय हो गए। केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट करने के पश्चात भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने स्वयं को गिरफ्तार करा लिया। वे न्यायालय को अपना प्रचार–मंच बनाना चाहते थे।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/hindi/india-52207151|title=जब भगत सिंह ने काउंसिल हाउस में बम फेंका, कैसे की थी तैयारी|work=BBC News हिंदी|access-date=2021-02-28|language=hi}}</ref>
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