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== अनिश्चितता सिद्धान्त<ref>{{Cite web |url=http://hyperphysics.phy-astr.gsu.edu/hbase/uncer.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170608142616/http://hyperphysics.phy-astr.gsu.edu/hbase/uncer.html |archive-date=8 जून 2017 |url-status=dead }}</ref> == १९२७ में जर्मन वैज्ञानिक [[वर्नर हाइजनबर्ग|वॅर्नर हाइज़ॅनबर्ग]] ने अपना [[अनिश्चितता सिद्धान्त]] प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने कहा के यह पूर्ण निश्चितता के साथ कभी नहीं कहा जा सकता के कोई वस्तु कहाँ स्थित है या उस की गति क्या है। उन्होंने स्पष्ट किया की यह किसी मापदण्ड में कमी की वजह से नहीं है, बल्कि प्रकृति में ही ऐसा नियम है। जिस तरह से किसी तरंग के बारे में यह ठीक से नहीं कहा जा सकता के वह कहाँ स्थित है उसी तरह से वस्तुओं के बारे में भी यह नहीं कहा जा सकता। जितनी छोटी वस्तु होगी उसके अकार के हिसाब से उतनी ही अनिश्चितता अधिक होगी। उन्होंने गणित में इसे ऐसे लिखा - :<math>\Delta x \Delta p \ge \frac{\hbar}{2} </math> जहाँ :<math>\Delta</math> [[मानक विचलन]] (स्टैन्डर्ड डीवीएशन) है, जिसे अनिश्चितता का एक माप समझा जा सकता है :'''x''' यह दर्शाता है के कण कहाँ स्थित है और '''p''' उसका [[संवेग (भौतिकी)|संवेग]] (मोमॅन्टम) है :''<math>\hbar</math>'' प्लांक के नियतांक को 2<math>\pi</math> से बांटकर मिला हुआ नियन्तक है यह अनिश्चितता सिद्धान्त जल्दी ही क्वाण्टम यान्त्रिकी की नीव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया और इसमें भी पदार्थों के तरंग-कण द्विरूप की पहचान निहित है। यह सही है
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