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== विक्षिप्तता == जहाँ ऐसा प्रमाणित किया जाय कि जिस व्यक्ति ने अपराध किया है, वह अपराध करने के समय विक्षिप्त मानसिक दशा में रहने के कारण अपने किए अपराध के फल को समझने में अक्षम था, तो वह अपराध के लिये उत्तरदायी नहीं होगा और न अपराधी ही कहा जायगा। अपराध करने के समय कोई व्यक्ति विक्षिप्त था या नहीं, यह तथ्य का विषय है, कानून का नहीं। विक्षिप्तता का प्रमाणभार अभियुक्त पर है। विशेषज्ञ का साक्ष्य अनिवार्य नहीं है। यह भी आवश्यक नहीं कि प्रतिरक्षा के साक्षियों के द्वारा साक्ष्य दिया जाय। मामला चलाने वाले (prosecution) के साक्षियों की प्रतिपृच्छा (cross examination) से प्रमाणभार का दायित्व निभाया जा सकता है। केवल यह कहना कि कोई अपराध बिना उद्देश्य के किया गया, विक्षिप्तता सिद्ध नहीं करता। ऐसे मामलों में जूरी की संमति होती है "अपराधी किंतु विक्षिप्त" (Guilty but insane)। अपराधी को राजा किंवा राष्ट्रपति की मरजी की अवधि पर्यंत जेल में रखा जाता है। अपराधी दोषसिद्ध या दंडासप्त नहीं कहा जा सकता। अत: उसे अपील करने का अधिकार नहीं रहता। इस प्रसंग में नैतिक विक्षिप्तता (moral insanity) असंबद्ध है। अर्थात् यदि यह कहा जाय कि अपराध के समय अपराधी की मेधाशक्ति ठीक थी, किंतु उसका नैतिक चिंतन स्खलित हो चुका था अथवा वह मस्तिष्क के असंयमित प्रवाह (uncontrollable impulse) के वशीभूत होकर मेधा शक्ति के रहते हुए भी अपराध कर बैठा, तो उसका अपराध क्षम्य नहीं होगा।
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