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== प्रकाश प्रक्रिया, हिल प्रक्रिया अथवा फोटोकेमिकल प्रक्रिया == [[चित्र:Thylakoid membrane.svg|thumb|280px|right|क्लोपोप्लास्ट में होने वाली प्रकाश अभिक्रिया]] प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में जो प्रक्रिया प्रकाश की उपस्थिति में होती है उसे प्रकाश क्रिया के अन्तर्गत अध्ययन किया जाता है। इस क्रिया को हिल आदि अन्य वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन किया गया। प्रकाश प्रक्रियाओं के समय अंधेरी प्रक्रियायें सीमाबद्ध कारक का कार्य करती हैं। प्रकाश प्रक्रियायें दो चरणों में होती हैं, फोटोलाइसिस एवं हाइड्रोजन का स्थापन। फोटोलाइसिस की प्रक्रिया में प्रकाश क्लोरोफिल के अणु द्वारा फोटोन के रूप में अवशोषित की जाती है। जब क्लोरोफिल का अणु एक क्वान्टम प्रकाश शोषित कर लेता है उसके पश्चात् क्लोरोफिल का दूसरा अणु तब तक प्रकाश शोषित नहीं करता है जब तक कि पहली ऊर्जा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में प्रयोग नहीं हो जाती है। क्लोरोफिल द्वारा इस प्रकार शोषित प्रकाश का फोटोन उच्च ऊर्जा स्तर पर एक [[इलेक्ट्रान]] निकालती है तथा यह शक्ति फास्फेट के तीसरे बाँड पर स्थित होकर उच्च ऊर्जा वाले एडिनोसाइन ट्राइफास्फेट के रूप में प्रकट होते हैं। इस प्रकार क्लोरोपिल प्रकाश की उपस्थिति में एटीपी उत्पन्न करते हैं तथा इस प्रक्रिया को फोस्फोराइलेशन कहते हैं। इस प्रकार सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा एटीपी अर्थात् रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार क्लोरोफिल अणु में निर्मित एटीपी क्लोरोफिल अणु से पृथक होकर CO<sub>2</sub> को [[शर्करा]] में अनाक्सीकृत होने आदि अनेक रासायनिक क्रियाओं में सहायक है। क्लोरोफिल इस एटीपी को स्वतन्त्र करने पर फिर अक्रिय हो जाता है। वान नील फ्रैंक, विशनिक के अनुसार पानी जब इस क्रियाशील क्लोरोफिल के सम्पर्क में आते हैं तब पानी अनाक्सीकृत H तथा तेज आक्सीकारक OH में विच्छेदित हो जाता है।<br /> क्लोरोफिल + प्रकाश → सक्रिय क्लोरोफिल<br/> H<sub>2</sub>O + सक्रिय क्लोरोफिल → H<sup>+</sup> + OH<sup>-</sup><br/> इस फोटोलाइसिस प्रक्रिया में O<sub>2</sub> पानी से स्वतन्त्र हो जाती है तथा हाइड्रोजन भी हाइड्रोजन ग्राहक पर चली जाती है।<br/> 2H<sub>2</sub>O + 2A → 2AH<sub>2</sub> + O<sub>2</sub> <br/> इस प्रकार पौधों की प्रकाश-संश्लेषण की क्रियायों से निकली समस्त आक्सीजन जल से प्राप्त होती हैं। हिल, रूबेन ने इसका समर्थन किया तथा O<sup>18</sup> का प्रयोग करके इसको सिद्ध किया। पानी से आक्सीजन निकलने को क्लोरील्ला नामक शैवाल में CO<sub>2</sub> की अनुपस्थिति में दिखाया गया। इसका अर्थ हुआ कि CO<sub>2</sub> की अनुपस्थिति में आक्सीजन का उत्पादन हो सकता है, परन्तु इसमें हाइड्रोजन ग्राहक होना चाहिए। ऐसा देखा गया है कि पौधों में एनएडीपी (NADP) दो NADPH<sub>2</sub> बनाता है। <br/> 2H<sub>2</sub>O+2NADP=2NADPH<sub>2</sub>+O<sub>2</sub>
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