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=== नयी कहानियाँ === कहानी पत्रिका से मुक्त होते ही उन्होंने [[राजकमल प्रकाशन]] से प्रकाशित होने वाली 'नयी कहानियाँ' का संपादन सँभाला। वस्तुतः उनके 'कहानी' पत्रिका में रहते हुए ही राजकमल प्रकाशन के तत्कालीन प्रबन्ध निदेशक ओम प्रकाश कहानी-केंद्रित पत्रिका निकालने की योजना बना रहे थे और एक सक्षम संपादक के रूप में स्वभावतः भैरव प्रसाद गुप्त इस कार्य के लिए सर्वथा उपयुक्त थे। अतः 'कहानी' पत्रिका से मुक्ति के दिन ही उन्हें राजकमल प्रकाशन दिल्ली से ओमप्रकाश का तार मिला, जिसमें उनसे कहीं और नियुक्ति न लेने का अनुरोध किया गया, क्योंकि अगले दिन ही वे बात करने के लिए इलाहाबाद आ रहे थे। 14 जनवरी को ओमप्रकाश इलाहाबाद आये, भैरव प्रसाद गुप्त से बात हुई और 15 जनवरी को ही उन्होंने 'नयी कहानियाँ' का संपादन-भार संभाल लिया।<ref>भैरव प्रसाद गुप्त (विनिबंध), मधुरेश, साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली, प्रथम संस्करण-2000, पृष्ठ-77.</ref> भैरव प्रसाद गुप्त का योगदान कहानी तथा नयी कहानियाँ के संपादक के रूप में नयी कहानी आंदोलन के संचालन के अतिरिक्त कहानी के गुणात्मक विकास तथा कहानी-समीक्षा को गुणात्मक रूप से विकसित करने में अहम भूमिका निभाने के रूप में भी स्वीकार किया जाता है। [[मार्कण्डेय]] के शब्दों में: {{quote|"प्रेमचन्द के बाद से कथा-साहित्य के पूरे विकास के लंबे दौर में शायद यह पहला अवसर था जब कथा-समीक्षा को एक वैज्ञानिक समीक्षा प्रणाली देने के गंभीर प्रयास हुए। 'नयी कहानियाँ' में दो स्तम्भ शुरू हुए -- 'हाशिए पर' तथा 'जो लिखा जा रहा है'। एक [[नामवर सिंह]] लिखते रहे और दूसरा मैं।"<ref>कहानी की बात, [[मार्कण्डेय]], [[लोकभारती प्रकाशन]], इलाहाबाद, प्रथम संस्करण-1984, पृष्ठ-8.</ref>}} जनवरी 1963 तक उन्होंने 'नयी कहानियाँ' का संपादन किया और एक बार फिर नीतिगत मतभेद के कारण ही इसके संपादन से भी हट गये।
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