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== धर्मसुधार की सफलता के कारण == यूरोपीय धर्मसुधार का व्यापक प्रसार एवं गहरा प्रभाव देखकर अनायास ही मन में यह प्रश्न उठता है कि इस अपूर्व सफलता का क्या रहस्य है। इस सफलता के अनेक कारणों की कल्पना की गई है : 15वीं शताब्दी के आरंभ में काथलिक कलीसिया की दयनीय दशा और इसके कर्णधारों की निष्क्रियता, कलीसिया की संपति हड़पने को उत्सुक राजनेताओं की सहायता, नवजागरण के कारण व्यक्तिगत स्वतंत्रता का आंदोलन, मुद्रण के आविष्कार से प्रचार की नई सुविधाएँ। यह सब आलोच्य आंदोलन के लिए सहायक सिद्ध हुआ किंतु इसकी सफलता का रहस्य अन्यत्र ढूँढना चाहिए। धर्मसुधार के प्रवर्तक सात्विक और धार्मिक भाव से प्रेरित थे और वे अपने प्रतिभाशाली सहयोगियों में भी धार्मिक नवजागरण की उत्कट अभिलाषा उत्पन्न करने में समर्थ हुए। इनके विचार में उस नवजागरण का एकमात्र उपाय यह प्रतीत होता था कि मनुष्य अपने पुण्य कर्मों पर भरोसा न रखकर ईसा के प्रति आत्मसमर्पण करे और बाइबिल में सुरक्षित ईसा के सुसमाचार पर विश्वास करे। उन्होंने बाइबिल को अपने आंदोलन का आधार बना लिया, बाइबिल में जो शक्ति निहित है उसी के द्वारा उन्हें सफलता मिली है। आजकल ईसाई संसार में 16वीं शताब्दी की घटनाओं पर तटस्थ दृष्टि से विचार किया जा रहा है। काथिलक यूरोपीय धर्मसुधार की रचनात्मक उपलब्धियों को स्वीकार करते हैं और प्रोटेटैंस्ट समझने लगे हैं कि कलीसिया की तत्कालीन बुराइयों का विरोध करना कितना ही आवश्यक क्यों न था, उसकी एकता छिन्न भिन्न करने से ईसाई धर्म को बहुत हानि हुई है। द्वितीय महायुद्ध के बाद ईसाई एकता के आंदोलन को अत्यधिक महत्व दिया जाने लगा है और धर्मसुधार के दुष्परिणाम को दूर करने की अभिलाषा बढ़ती जा रही है।
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