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==== भारत छोड़ो आन्दोलन ==== 9 अगस्त १९४२ को जब गांधी जी व अन्य कांग्रेस के नेता गिरफ्तार कर लिए गए, तब लोहिया ने भूमिगत रहकर '[[भारत छोड़ो आन्दोलन|भारत छोड़ो आंदोलन]]' को पूरे देश में फैलाया। लोहिया, [[अच्युत पटवर्धन]], सादिक अली, पुरूषोत्तम टिकरम दास, मोहनलाल सक्सेना, रामनन्दन मिश्रा, सदाशिव महादेव जोशी, साने गुरूजी, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, अरूणा आसिफअली, [[सुचेता कृपलानी]] और पूर्णिमा बनर्जी आदि नेताओं का केन्द्रीय संचालन मंडल बनाया गया। लोहिया पर नीति निर्धारण कर विचार देने का कार्यभार सौंपा गया। भूमिगत रहते हुए 'जंग जू आगे बढ़ो, क्रांति की तैयारी करो, आजाद राज्य कैसे बने' जैसी पुस्तिकाएं लिखीं। 20 मई 1944 को लोहिया जी को [[बंबई]] में गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद [[लाहौर किला|लाहौर किले]] की एक अंधेरी कोठरी में रखा गया जहां 14 वर्ष पहले [[भगत सिंह]] को [[फांसी]] दी गई थी। पुलिस द्वारा लगातार उन्हें यातनाएँ दी गई, 15-15 दिन तक उन्हें सोने नहीं दिया जाता था। किसी से मिलने नहीं दिया गया 4 महीने तक ब्रुश या पेस्ट तक भी नहीं दिया गया। हर समय हथकड़ी बांधे रखी जाती थी। लाहौर के प्रसिद्ध वकील [[जीवनलाल कपूर]] द्वारा हैबियस कारपस की दरखास्त लगाने पर उन्हें तथा [[जयप्रकाश नारायण]] को स्टेट प्रिजनर घोषित कर दिया गया। मुकदमे के चलते सरकार को लोहिया को पढ़ने-लिखने की सुविधा देनी पड़ी। पहला पत्र लोहिया ने [[ब्रिटिश लेबर पार्टी]] के अध्यक्ष प्रो॰ हेराल्ड जे. लास्की को लिखा जिसमें उन्होंने पूरी स्थिति का विस्तृत ब्यौरा दिया। 1945 में लोहिया को [[लाहौर]] से [[आगरा]] जेल भेज दिया गया। [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] समाप्त होने पर गांधी जी तथा कांग्रेस के नेताओं को छोड़ दिया गया। केवल लोहिया व जयप्रकाश ही जेल में थे। इसी बीच अंग्रेजों की सरकार और कांग्रेस की बीच समझौते की बातचीत शुरू हो गई। [[इंग्लैंड]] में [[लेबर पार्टी]] की सरकार बन गई सरकार का प्रतिनिधि मंडल डॉ॰ लोहिया से आगरा जेल में मिलने आया। इस बीच लोहिया के पिता हीरालाल जी की मृत्यु हो गई। किन्तु लोहिया जी ने सरकार की कृपा पर पेरोल पर छूटने से इंकार कर दिया।
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