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==मैं ब्रिटिश नागरिक नहीं हूँ== एक बार दुगड्डा में प्रभात फेरी से लौटते समय चुनाधार इलाके में अचानक कर्नल इबाटसन व स्थानीय तहसीलदार ५०-६० जवानों के साथ आ धमके, गंगा सिंह त्यागी नामक एक बालक जो कक्षा ९ का छात्र था अपने हाथ में तिरंगा लिए हुए जोर-जोर से आजादी के नारे लगा रहा था उस पर कर्नल साहब बिगड़ गए व अपने घोड़े पर बैठकर ही कोड़ों की बरसात कर दी, बालक गंगा बेहोश होकर गिर पड़ा, इब्ट्सन को इस पर भी चैन नहीं आया; वह धोड़े से उतरा व बेहोश बालक को जोर से लात मारने लगा, इस पर नौटियाल जी को बहुत क्रोध आया उन्होंने कर्नल को उसके कॉलर से पकड़ा व उठा कर सड़क के नीचे पहाड़ी में फ़ेंक दिया , खुशनसीबी से इब्ट्सन ने एक उखड़े हुए पेड़ की जड़ पकड़ ली व मौत से बच गया.राम प्रसाद जी के पीछे [[अंग्रेज़|अंग्रेज]] अफसर भागे किन्तु वे चूनाधार के जंगलो में गायब हो गए. इस मुक़दमे की सुनवाई के लिए इन्हें कोटद्वार लाया गया, जहाँ इन्हें जज गिल साहब के सामने पेश होना पड़ा, इन्हें उनके पास शरीर पर बेड़ियाँ डाल कर ले जाया गया, जज ने तुरंत आदेश दिया की इनकी बेड़ियाँ खोल दी जाय. इब्ट्सन के वकील ने तहरीर पढ़ना आरम्भ किया, तहरीर पूरी हुई तो जज ने राम प्रसाद जी से कहा, "तुम्हे कुछ कहना है" राम प्रसाद बोले, "जब इब्ट्सन खुद कोर्ट में मौजूद है तो वे क्यों नहीं कटघरे में आकर घटना का विवरण देतें है." इस पर जज ने इब्ट्सन की ओर देखा, आखिर इब्ट्सन को कटघरे में आना पड़ा, उसने सब कुछ सच बताया. जज ने पुनः राम प्रसाद जी को कहा, "आपको कुछ कहना है?" अब राम प्रसाद जानबूझकर जोर-जोर से बोले, '''मैं अपने आप को ब्रिटिश नागरिक नहीं मानता अतः इस कोर्ट में कुछ भी कहना मेरे लिए अपमानजनक होगा.''' यह सुनकर जज चौंक गए व बोले, "आप कोर्ट का अपमान कर रहें है, इसके लिए आप पर अवमानना का अभियोग चलाया जा सकता है." बाद में कोर्ट ने अपनी सजा सुनाई व इन्हें बरेली जेल भेज दिया गया.
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