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=== पाश्चात्य पुनरान्वेषण === एक ब्रिटिश अधिकारी जनरल टेलर पहले ज्ञात इतिहासकार थे, इन्होंने सन [[१८१८]] में, सांची के स्तूप का अस्तित्व दर्ज किया।<ref name="IGNCA">{{हिन्दी चिह्न}}[http://tdil.mit.gov.in/coilnet/ignca/mw046.htm इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20060115093822/http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mw046.htm |date=15 जनवरी 2006 }} के जालस्थल पर</ref> अव्यवसायी पुरातत्ववेत्ताओं और खजाने के शिकारियों ने इस स्थल को खूब ध्वंस किया, जब तक कि सन [[१८१८]] में उचित जीर्णोद्धार कार्य नहीं आरम्भ हुआ। [[१९१२]] से [[१९१९]] के बीच, ढांचे को वर्तमान स्थिति में लाया गया। यह सब जॉन मार्शल की देखरेख में हुआ।<ref>{{Cite web |url=http://projectsouthasia.sdstate.edu/docs/archaeology/primarydocs/Sanchi/HistArt.htm |title=जॉन मार्शल, "An Historical and Artistic Description of Sanchi", from ''ए गाइड टू सांची,'' कलकत्ता: सुपरिन्टेन्डेंट, गवर्नमेंट प्रिंटिंग (१९१८). पृष्ठ ७-२९ on line, Project South Asia. |access-date=16 मार्च 2008 |archive-date=10 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090210033559/http://projectsouthasia.sdstate.edu/docs/archaeology/primarydocs/Sanchi/HistArt.htm |url-status=dead }}</ref> आज लगभग पचास स्मारक स्थल सांची के टीले पर ज्ञात हैं, जिनमें तीन स्तूप और कई मंदिर भी हैं। यह स्मारक [[१९८९]] में [[यूनेस्को]] द्वारा [[विश्व धरोहर स्थल]] घोषित हुआ है।
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