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==लेखनशैली== <br> 'कविता में मानव प्रेम का उत्कर्ष होना चाहिए, कविता को अभिव्यक्ति का उच्चतम माध्यम बनना चाहिए, कविता स्वतन्त्रता के लिए लिखा जाना चाहिए। कविता न्याय, प्रेम और जीवन के लिए लिखा होना चाहिए' कहने वाले विचार के धनी सुमन पोखरेल की सिर्जना में शालिनता एक वैशिष्ठ्य है। वो शिल्प और कथ्य दोनो प्रकार से व्यक्ति वा समाज की पीडा को पारदर्शी ढंग से प्रस्तुत करते हुए समाज को सुख, शान्ति एवम् आनन्द की अनुभूति कराते हैं। <ref>Dadhiraj Subedi, "नेपाली साहित्यका मुस्कानहरू (The Smiles of Nepali Literature)"- 2013, Purwanchal Sahitya Academy, Biratnagar - ISBN 978 9937248266</ref> <br /> <br>कवि पोखरेल पुराने मान्यताओं को तोडकर नये मान्यताओं को स्थापित करने वाले कवि के रूप में जाने जाते हैं। उनकी 'ताजमहल र मेरो प्रेम' ([[ताजमहल]] और मेरा प्रेम) शीर्षक की कविता इसका एक सशक्त दृष्टान्त है। <ref name="autogenerated2">Article "Suman Ek Suwas Aanek" by Gandakiputra, Nagarik National Daily, Friday 26 April 2013</ref><br /> {{Quote box |width=300px |align=right|quoted=true |bgcolor=#FFFFF0 |salign=right |quote = <poem> क्षितिज का रंग -सुमन पोखरेल हर सुबह के उपर कुछ पल खडे हो कर हर साम के पास कुछ देर रूक कर खुद को भूल देख रहे हैं मेरी नजरेँ रोशनी के साथ साथ समेट रहेँ है मेरी पलकेँ, क्षिति के अन्तिम किनारे पे टकराकर रंगे हुए आकाश को। सोच रहा हूँ; यह रक्तता एक दुसरे से जुदा हो के विपरित रास्ते को चले युगल के टुटे हुए हृदय का रंग है, या वियोग की अंधेरी मौषम के बाद जुडे हुए दिलों मे खिले हुए मिलन की रक्तिम रोशनी ! दिन को खोलनेवाले फाटक और बन्द करनेवाले दरवाजे पे बिखरे हुए इन्ही लालिमाओँ को देखते देखते आधा जीवन रंग ही रंग से भिग चुका, मगर समझ न पाया कि यह धर्ती और आकाश साम को जुदा हो के सुबह को मिलते हैं या सुबह को बिछुड्कर साम को मिला करते हैँ! </poem>|source = (कवि स्वयम् द्वारा अनुदित) }}
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